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Noida News: हाईटेक शहर, बिजली व्यवस्था पुरानी यही नोएडा की कहानी
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-फोटो
- अभी शुरुआती चरण में भूमिगत केबिल बिछाने का कार्य, सेक्टर-45 में फिलहाल जारी है काम
-शहर के 168 सेक्टरों में भूमिगत केबिल बिछाने का काम किया जाना है
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। हाईटेक शहर के रूप में स्थापित नोएडा विद्युत व्यवस्था के मामले में पुराने ढर्रे पर ही चल रहा है। शहर में भूमिगत विद्युत लाइन बिछाने की योजना लंबे समय से चर्चा में है लेकिन जमीनी स्थिति बेहद खराब है। अभी तक केवल दो ही स्थानों पर भूमिगत केबिल बिछाने का काम हो सका है। शहर का एक भी सेक्टर ऐसा नहीं है, जहां पूरी तरह भूमिगत केबिल के माध्यम से विद्युत आपूर्ति पहुंचती हो।
बार-बार आंधी और बारिश के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित होना यहां के निवासियों के लिए आम समस्या बन चुकी है। खुले बिजली के तार भी जंजाल का रूप ले चुके हैं। घने रिहायशी इलाकाें में हालत ऐसी है कि एक खंभे पर तारों का अंबार लग चुका है। पेड़ों की टहनियां गिरने से लाइनें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और घंटों तक बिजली गुल रहती है। पुराने सेक्टरों में तो स्थिति और भी खराब है।
दो जगहों पर ही भूमिगत केबिल
विद्युत निगम की ओर से स्काडा योजना के तहत हाल ही में भूमिगत केबिल बिछाने का काम शुरू किया गया है। अभी फिलहाल दो स्थानों पर ही काम हो सका है। सेक्टर-82 से सूरजपुर के बीच 4.2 किलोमीटर की लाइन बिछाई जा चुकी है। वहीं अन्य सेक्टर-45 में कबिल बिछाने का काम किया जा रहा है। शहर के 168 सेक्टरों में भूमिगत केबिल बिछाने का काम किया जाना है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि निगम की तैयारियां गर्मियों को लेकर किस स्तर की है।
भूमिगत केबिल न होने से होती हैं ये समस्याएं
मौसम खराब होते ही आपूर्ति बाधित हो जाती है। निवासियों को घंटों गर्मी झेलनी पड़ती है। खुले तार और पुराने पोल हादसों का कारण बन रहे हैं। शहर में कई स्थानों पर ऐसे पोल हैं जो नीचे से गल गए हैं। खराब मौसम में पुराने तार के टूटने से करंट का भय भी बना रहता है। वहीं फॉल्ट होने पर उसे ढूंढ़ने और ठीक करने में लंबा समय लग जाता है।
आखिर क्यों जरूरी है भूमिगत केबिल
भूमिगत केबिल से न सिर्फ बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर और सुरक्षित होती है। बल्कि मौसम का असर भी न्यूनतम रहता है। इससे बिजली चोरी के मामलों पर अंकुश लग सकता है और दुर्घटनाओं की संभावना भी कम हो सकेगी। साथ ही शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर अधिक व्यवस्थित और आधुनिक दिखाई देता है।
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अलग-अलग सेक्टरों में भूमिगत केबिल बिछाने का काम किया जा रहा है। कुछ सेक्टरों में फिलहाल कार्य जारी है। जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। -कृष्ण कुमार सिंह तोमर, अधिशासी अभियंता (स्काडा) विद्युत निगम।
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-शहर के 168 सेक्टरों में भूमिगत केबिल बिछाने का काम किया जाना है
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। हाईटेक शहर के रूप में स्थापित नोएडा विद्युत व्यवस्था के मामले में पुराने ढर्रे पर ही चल रहा है। शहर में भूमिगत विद्युत लाइन बिछाने की योजना लंबे समय से चर्चा में है लेकिन जमीनी स्थिति बेहद खराब है। अभी तक केवल दो ही स्थानों पर भूमिगत केबिल बिछाने का काम हो सका है। शहर का एक भी सेक्टर ऐसा नहीं है, जहां पूरी तरह भूमिगत केबिल के माध्यम से विद्युत आपूर्ति पहुंचती हो।
बार-बार आंधी और बारिश के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित होना यहां के निवासियों के लिए आम समस्या बन चुकी है। खुले बिजली के तार भी जंजाल का रूप ले चुके हैं। घने रिहायशी इलाकाें में हालत ऐसी है कि एक खंभे पर तारों का अंबार लग चुका है। पेड़ों की टहनियां गिरने से लाइनें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और घंटों तक बिजली गुल रहती है। पुराने सेक्टरों में तो स्थिति और भी खराब है।
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दो जगहों पर ही भूमिगत केबिल
विद्युत निगम की ओर से स्काडा योजना के तहत हाल ही में भूमिगत केबिल बिछाने का काम शुरू किया गया है। अभी फिलहाल दो स्थानों पर ही काम हो सका है। सेक्टर-82 से सूरजपुर के बीच 4.2 किलोमीटर की लाइन बिछाई जा चुकी है। वहीं अन्य सेक्टर-45 में कबिल बिछाने का काम किया जा रहा है। शहर के 168 सेक्टरों में भूमिगत केबिल बिछाने का काम किया जाना है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि निगम की तैयारियां गर्मियों को लेकर किस स्तर की है।
भूमिगत केबिल न होने से होती हैं ये समस्याएं
मौसम खराब होते ही आपूर्ति बाधित हो जाती है। निवासियों को घंटों गर्मी झेलनी पड़ती है। खुले तार और पुराने पोल हादसों का कारण बन रहे हैं। शहर में कई स्थानों पर ऐसे पोल हैं जो नीचे से गल गए हैं। खराब मौसम में पुराने तार के टूटने से करंट का भय भी बना रहता है। वहीं फॉल्ट होने पर उसे ढूंढ़ने और ठीक करने में लंबा समय लग जाता है।
आखिर क्यों जरूरी है भूमिगत केबिल
भूमिगत केबिल से न सिर्फ बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर और सुरक्षित होती है। बल्कि मौसम का असर भी न्यूनतम रहता है। इससे बिजली चोरी के मामलों पर अंकुश लग सकता है और दुर्घटनाओं की संभावना भी कम हो सकेगी। साथ ही शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर अधिक व्यवस्थित और आधुनिक दिखाई देता है।
अलग-अलग सेक्टरों में भूमिगत केबिल बिछाने का काम किया जा रहा है। कुछ सेक्टरों में फिलहाल कार्य जारी है। जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। -कृष्ण कुमार सिंह तोमर, अधिशासी अभियंता (स्काडा) विद्युत निगम।
