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Noida News: पढ़ाई समझ नहीं आने पर कोचिंग सेंटर को फीस लौटाने का आदेश
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2024 का है मामला, छात्रा की मां ने जिला उपभोक्ता आयोग मे की थी शिकायत
ग्रेटर नोएडा(संवाद)। कम उम्र के कारण छात्रा को पढ़ाई समझ में नहीं आने पर एक स्पोकन इंग्लिश कोचिंग सेंटर को फीस लौटाने का आदेश दिया गया है। मामले की सुनवाई जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर और सदस्य अंजु शर्मा ने की। नोएडा के गढ़ी चौखंडी निवासी ममता पाल ने बेटी अदविका पाल का नामांकन 2024 में क स्पोकन इंग्लिश सेंटर में कराया था, जिसके लिए उन्होंने 47,170 रुपये का भुगतान किया था। हालांकि, कम उम्र के कारण उनकी बेटी ऑनलाइन कक्षाओं में ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रही थी।
शिकायतकर्ता के अनुसार, नामांकन से पहले सहमति बनी थी कि यदि बच्ची कक्षाओं से संतुष्ट नहीं होती है, तो पूरी फीस वापस कर दी जाएगी, लेकिन बाद में फीस वापसी का अनुरोध करने पर संस्थान ने राशि वापस नहीं की।
इसके बाद ममता पाल ने जिला उपभोक्ता आयोग में वाद दायर किया। सुनवाई के दौरान संस्थान ने अपना पक्ष प्रस्तुत नहीं किया, जिसके कारण आयोग ने एक पक्षीय सुनवाई की। आयोग ने सेवा में कमी मानते हुए संस्थान को पूरी राशि छह प्रतिशत ब्याज सहित 30 दिनों के भीतर वापस करने के निर्देश दिए। साथ ही मानसिक पीड़ा के लिए 500 रुपये और वाद व्यय के रूप में 500 रुपये का भुगतान भी करने को कहा।
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ग्रेटर नोएडा(संवाद)। कम उम्र के कारण छात्रा को पढ़ाई समझ में नहीं आने पर एक स्पोकन इंग्लिश कोचिंग सेंटर को फीस लौटाने का आदेश दिया गया है। मामले की सुनवाई जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर और सदस्य अंजु शर्मा ने की। नोएडा के गढ़ी चौखंडी निवासी ममता पाल ने बेटी अदविका पाल का नामांकन 2024 में क स्पोकन इंग्लिश सेंटर में कराया था, जिसके लिए उन्होंने 47,170 रुपये का भुगतान किया था। हालांकि, कम उम्र के कारण उनकी बेटी ऑनलाइन कक्षाओं में ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रही थी।
शिकायतकर्ता के अनुसार, नामांकन से पहले सहमति बनी थी कि यदि बच्ची कक्षाओं से संतुष्ट नहीं होती है, तो पूरी फीस वापस कर दी जाएगी, लेकिन बाद में फीस वापसी का अनुरोध करने पर संस्थान ने राशि वापस नहीं की।
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इसके बाद ममता पाल ने जिला उपभोक्ता आयोग में वाद दायर किया। सुनवाई के दौरान संस्थान ने अपना पक्ष प्रस्तुत नहीं किया, जिसके कारण आयोग ने एक पक्षीय सुनवाई की। आयोग ने सेवा में कमी मानते हुए संस्थान को पूरी राशि छह प्रतिशत ब्याज सहित 30 दिनों के भीतर वापस करने के निर्देश दिए। साथ ही मानसिक पीड़ा के लिए 500 रुपये और वाद व्यय के रूप में 500 रुपये का भुगतान भी करने को कहा।

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