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जेवर का लाल: पैरालिंपिक चैंपियन प्रवीण कुमार को पद्म श्री सम्मान, कड़ी मेहनत और जुनून ने शिखर पर पहुंचाया

पीयूष गौतम, अमर उजाला, जेवर Published by: विकास कुमार Updated Sun, 25 Jan 2026 11:14 PM IST
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सार

प्रवीण को पद्म श्री मिलने की सूचना दिल्ली में मिली। वह दिल्ली में ही जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में वर्ष 2018 से ही अभ्यास कर रहे हैं। वह शनिवार को ही अपने गांव आए थे और रविवार सुबह ही दिल्ली के लिए निकलें। उनकी और परिवार की आस थी कि उन्हें यह पद्म सम्मान मिले। वह दो वर्ष से इस पदम सम्मान का इंतजार कर रहे थे, आज इसकी सूचना मिलते ही उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

Paralympic champion Praveen Kumar honoured with Padma Shri hard work and passion took him to the top
प्रवीण कुमार (पैरा-एथलीट) - फोटो : ANI
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विस्तार
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पैरालंपिक में स्वर्ण पदक और रजत पदक समेत कई अन्य विश्वस्तरीय प्रतियोगिताओं में भारत का नाम रोशन करने वाले जेवर के गोविंदगढ़ निवासी प्रवीण कुमार को उनकी कड़ी मेहनत और जुनून ने खेलों के शिखर तक पहुंचाया है। गांव में जहां खेल के मैदान और सुविधाओं के अभाव के बीच अपने को निखार कर इस मुकाम तक पहुंचे हैं कि देश उनको पद्म श्री से सम्मानित कर रहा है।

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जेवर से 6 किलोमीटर दूर यमुना के खादर स्थित गोविंद गढ़ गांव में पद्म श्री के लिए चयनित होने की खबर पर घर में मौजूद उनके पिता अमरपाल सिंह, मां निर्दोष, भाई सचिन समेत पूरे परिवार में हर्ष का माहौल था। परिजन और ग्रामीण एक-दूसरे का मुंह मीठा करा रहे थे। वहीं, प्रवीण के घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ था।

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प्रवीण के पिता अमरपाल सिंह ने बताया कि बचपन से वह अपने मित्रों और सहपाठियों के साथ मिलकर वॉलीबॉल खेलते थे। उनकी टीम आसपास के गांवों में भी खेलने जाती थी। प्रवीण गांव की टीम में थे वह ऊंची छलांग लगाकर वॉलीबाल का तेज शॉट लगाता, एक माह बाद से उनके बेटे के एक पैर में दिक्कत दिखने लगी थी। प्रवीण की मां निर्दोष देवी ने बताया कि बड़े होने के बाद प्रवीण घर में कूदता-फांदता रहता था। सातवीं कक्षा के बाद उछलकर घर की छत को भी छू लेता था। उन्होंने बताया कि बचपन में ज्यादा कूद फांद करने पर वह खूब डांटती थीं।

प्रवीण ने बताया कि गांव में न तो खेल की सुविधा थी और न खेल का मैदान। कक्षा 9 के बाद प्रवीण स्कूल की ओर से ऊंची कूद और लंबी कूद स्पर्धा में हिस्सा लेने लगा था। तब वह यमुना किनारे रेत में गड्डे बनाकर अभ्यास करता था। ऐसे में कई बार चोट भी लग जाती थी।

कोच डॉ. सत्यपाल ने निखारी प्रतिभा 
गाजियाबाद के एक खेल आयोजन में प्रवीण की मुलाकात कोच डॉ. सत्यपाल से हुई थी। उनके कहने पर पैरों के बल ही प्रवीण ने करीब 1.8 मीटर छलांग लगाई थी। इसे देखकर डॉ. सत्यपाल ने उसे प्रशिक्षण देने का फैसला कर लिया था। कोच ने उसे दिल्ली बुलाया और अपने कोटला स्थित फ्लैट की चाभी दे दी। प्रवीण वर्ष 2018 से लगातार दिल्ली में रहकर ही प्रशिक्षण ले रहे थे। केवल छुट्टियों में ही घर आते थे।

दिव्यांग होने पर मिले ताने लेकिन अपनी प्रतिभा के बल छू लिया आसमान 
प्रवीण को कई स्थानों पर दिव्यांग होने के ताने मिले लेकिन उन्होंने अपनी प्रतिभा के बल पर ऐसा जवाब दिया कि फिकरे कसने वाले अब उनसे मिलने पर तारीफों के पुल बांधते रहते हैं। शुरूआत में उन्हें कई बार प्रतियोगिता में सामान्य बच्चों के साथ प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती थी लेकिन उन्होंने सामान्य बच्चों को पछाड़कर कई बार पदक जीते और आज वह इस मुकाम पर पहुंचे हैं।

स्विट्जरलैंड में जब लगा था तैयारियों को धक्का लेकिन नहीं मानी हार 
प्रवीण कुमार बताते हैं कि जब वर्ष 2018 में जूनियर विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा लेने पहुंचे तो उन्हें टी-42 वर्ग के बजाए उन्हें टी-44 वर्ग में डाल दिया गया। यह सबसे कठिनतम कैटगरी होती है। शुरूआत में उनको इसका धक्का लगा लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी मेहतन से इस प्रतियोगिता में भी जीत हासिल की। इसके बाद से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

 उपलब्धि 
1. स्वर्ण पदक विजेता-पेरिस 2024 पैरालंपिक खेल
पेरिस 2024 पैरालंपिक खेलों में एशियन रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता। 21 वर्ष की आयु में दो पैरालंपिक पदक (1 स्वर्ण और 1 रजत) जीतने वाला सबसे कम उम्र का भारतीय पैरा-एथलीट बना।
2. रजत पदक विजेता - टोक्यो 2020 पैरालंपिक खेल
टोक्यो 2020 पैरालंपिक खेलों में एशियन रिकॉर्ड के साथ रजत पदक जीता तथा 18 वर्ष की आयु में पैरालंपिक में पदक जीतने वाला सबसे कम उम्र का भारतीय पैरा-एथलीट बना।
3. स्वर्ण पदक विजेता - एशियन पैरा गेम्स 2022 (हांगझोउ, चीन)
22 से 28 अक्टूबर 2023 के दौरान हांगझोउ, चीन में आयोजित एशियन पैरा गेम्स 2022 में एशियन पैरा गेम्स रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता।
4. कांस्य पदक विजेता - विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2023 (पेरिस)
विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप, पेरिस 2023 में कांस्य पदक प्राप्त किया।
5. कांस्य पदक विजेता - विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 (नई दिल्ली)
विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप, नई दिल्ली 2025 में कांस्य पदक प्राप्त किया।
6. एबल-बॉडीड एथलेटिक्स में ऐतिहासिक उपलब्धि
एबल-बॉडीड नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले पैरा-एथलीट बने।
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