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Noida News: स्पेशल 26 फिल्म की तरह फर्जी पुलिस बनकर किया अगवा, वसूली फिरौती
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- जीएसटी सलाहकार की छह माह तक रेकी के बाद की वारदात, पांच आरोपी गिरफ्तार, दो की तलाश जारी
बरामद सामान
24.50 लाख नगदी, 4.50 लाख के जेवरात, 2 कार, 2 वर्दी और 7 मोबाइल
नंबर
8 घंटे तक कार में बनाया बंधक, 10 थाना क्षेत्रों से गुजरी कार
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। स्पेशल 26 फिल्म की तरह फर्जी पुलिस बनकर जीएसटी सलाहकार को अगवा कर फिरौती वसूली का खुलासा हुआ है। महंगे शौक की वजह से कर्ज में डूबे आरोपियों ने पैसे जुटाने के लिए छह माह तक रेकी कर वारदात को अंजाम दिया था। बुधवार को बिसरख कोतवाली पुलिस ने मुख्य आरोपी समेत पांच को गिरफ्तार कर लिया। जबकि दो की तलाश जारी है। आरोपियों के पास से फिरौती की रकम के 29 लाख रुपये (24.50 लाख नगद व 4.50 लाख के जेवरात), दो कार, 7 मोबाइल और दिल्ली सिविल डिफेंस व यूपी पुलिस की वर्दी बरामद हुई है।
डीसीपी सेंट्रल नोएडा शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया आरोपियों की पहचान कशिश चौहान उर्फ ईशु निवासी बिजनौर, राजेश पवार निवासी दिल्ली, विवेक शर्मा निवासी मथुरा, अंकित शाही निवासी देवरिया और अंशुल निवासी एटा के रूप में हुई है। मुख्य आरोपी कशिश चौहान उर्फ ईशु सलारपुर में किराये पर रहता था। उसका भाई लवली स्पा सेंटर संचालक है। मामले में लवली और चांद की तलाश जारी है। पुलिस के मुताबिक ईशू को महंगी रील बनाने का भी शौक था। वारदात के बाद वह फ्लाइट से बंगलूरू घूमकर आया था। बरेली में महिला मित्र से भी मिला था। ईशू की शादी नहीं हुई है। वारदात में अंकित की कार का घटना में प्रयोग किया गया। वहीं अंशुल की कार से रेकी की गई थी।
दर्ज मामले के मुताबिक 20 जुलाई को जीएसटी सलाहकार संदीप कुमार सोसाइटी से निकले थे। कार में उनका पालतू कुत्ता और लैपटॉप था। तभी कुछ लोगों ने अपनी कार पीड़ित की कार के आगे लगा दी और फर्जी पुलिस व जीएसटी अधिकारी बनकर संदीप की कार में बैठ गए। आरोपियों ने पीड़ित को दो कंपनियों का नाम बताकर पर्जी ई-वे बिल व सत्यापन का कार्य करने के नाम पर ब्लैकमेल किया और 29 लाख रुपये की वसूली की। घटना की एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने पांच टीमें गठित की थी। पुलिस जांच में पता चला है कि छह माह पहले ही आरोपियों ने रेकी शुरू की।
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सुबह 11:30 बजे किया अपहरण, शाम को 7:30 छोड़ा
पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने सुबह 11:30 बजे पीड़ित को उसी की कार में अगवा किया। पैसा मिलने के बाद आरोपियों ने पीड़ित को नोएडा में सेक्टर-144 के पास छोड़ा। करीब 8 घंटे तक पीड़ित आरोपियों संग रहा। इस बीच बर्गर भी खाया था। जेवर टोल प्लाजा के सीसीटीवी कैमरे में कार कैद हुई। करीब 10 थानों की सीमा से कार निकली लेकिन कहीं पर भी उसे पकड़ा नहीं गया। पीड़ित ने अपने भाई को फोन कर पैसे मंगवाए।
दिल्ली से वर्दी खरीद बना यूपी पुलिस का फर्जी दरोगा
डीसीपी ने बताया कि आरोपी ईशू ने यूपी पुलिस के दरोगा की वर्दी पहनी थी। वर्दी दिल्ली की दुकान से खरीदी गई थी। वर्दी पर लगे बैच की सिलाई थी। वारदात के वक्त राजेश और चांद जीएसटी अधिकारी बने। अपहरण के समय पीड़ित की कार में तीनों सवार थे। कार की अगली सीट पर ईशू व राजेश बैठे थे। ईशू कार चला रहा था। चांद पीड़ित संदीप के साथ पिछली सीट पर बैठा था।
पोर्टल पर की शिकायत, बगैर जांच के निस्तारण
वारदात 20 जुलाई की थी। मामले में 19 दिन बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। इस दौरान पीड़ित पुलिस के चक्कर लगाता रहा। आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत भी की। जांच किए बिना उसका निस्तारण भी कर दिया गया। डीसीपी ने कहा कि एफआईआर में देरी और आईजीआरएस के निस्तारण की जांच एसीपी को सौंपी गई है।
4 घंटे बाद दी 112 पर सूचना, हवाला लेने-देन की जांच शुरू
पुलिस ने बताया कि पीड़ित करीब चार घंटे बाद डायल-112 पर फोन कर वारदात की सूचना दी। पुलिस पैसों का इंतजाम हवाला के माध्यम से करने की जांच कर रही है। पुलिस अफसरों ने बताया कि पीड़ित जीएसटी के केसों को निपटाने का दावा करता है। जांच में सामने आया है कि पीड़ित जीएसटी चोरी की रकम को कम करने का दावा करता है। इस तरह के दस्तावेज मिले हैं। इसके बदले वह उद्यमियों से मोटी फीस लेता है। इस संबंध में जीएसटी विभाग को पत्र भेजकर जांच करने को कहा जाएगा।
पालतू कुत्ते की फुटेज देख आरोपियों तक पहुंची पुलिस
पुलिस ने बताया कि पीड़ित ने सफेद रंग की अर्टिगा कार होने की जानकारी दी थी। जांच में पता चला कि कार अर्टिगा नहीं थी। इसका पता पीड़ित के पालतू कुत्ते से चला। एडीसीपी ने बताया कि आरोपियों ने पीड़ित की कार से पालतू कुत्ते को साथियों की कार में भेज दिया था। नोएडा में ही आरोपियों की कार पंप पर पेट्रोल लेने रुकी थी। वहां सीसीटीवी फुटेज में कार में कुत्ता दिखा। जिससे आरोपियों की कार की पहचान हो गई। पुलिस ने कार का पता लगाकर आरोपियों तक पहुंच गई।
गलत सूचना पर 12 कारों की हुई जांच
पुलिस ने बताया कि पीड़ित ने सफेद रंग की अर्टिगा कार की जानकारी दी थी। पुलिस ने घटना वाले रूट पर अर्टिगा कारों को तलाश किया। कुल 12 कार मिली और इन 12 कारों की जांच के लिए 12 टीमें लगाई गई थी। हालांकि मामले की जांच के बाद में कार दूसरी निकली।
खुलासे के बाद भी पुराने दावे पर कायम है पुलिस
मामला सामने आने के बाद पुलिस ने दावा किया था कि पीड़ित अपनी मर्जी से कार में गया था, लेकिन अब जब खुलासा हुआ है तो पूरा मामला उल्टा निकला है। हालांकि पुलिस पुराने दावे पर कायम है। पुलिस का कहना है कि पीड़ित जीएसटी के मुकदमे को रफा-दफा करने के मकसद से ही कार में बैठकर आरोपियों के साथ घूमता रहा। पैसा देने के बाद आरोपियों ने उसे छोड़ भी दिया।
ड्राइवर बना था दरोगा
पुलिस ने बताया कि मुख्य आरोपी इशू यशोभूमि द्वारका दिल्ली में डीसीपीओ (ड्राइवर कम पंप ऑपरेटर) है। आरोपी राजेश पंवार दिल्ली नागरिक सुरक्षा बल (डीसीडी) से जुडा हुआ है। वहीं विवेक शर्मा बल्लभगढ़ में डीसीपीओ था। अंकित सलारपुर गांव में लोहे की ग्रिल व गेट बनाने का काम करता है। घटना में प्रयुक्त वाहन एक्सएल-6 कार अंकित की है। पांचवां आरोपी अंशुल दिल्ली में प्रॉपर्टी डीलर है। कामकाज के माध्यम से ही सभी एक-दूसरे से जुड़े हैं।
पीड़ित से परिचित था मुख्य आरोपी
ईशू पीड़ित को 2021 से जानता था। पुलिस पूछताछ में ईशू ने बताया कि पीड़ित संदीप जीएसटी के अभिलेखों व बिलों में हेराफेरी कर मोटा मुनाफा कमाता है। इसी कारण उसने पीड़ित से पैसे हड़पने की साजिश रची। ईशू ने जीएसटी ऑफिस में संदीप को देखा था।
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नंबर
8 घंटे तक कार में बनाया बंधक, 10 थाना क्षेत्रों से गुजरी कार
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। स्पेशल 26 फिल्म की तरह फर्जी पुलिस बनकर जीएसटी सलाहकार को अगवा कर फिरौती वसूली का खुलासा हुआ है। महंगे शौक की वजह से कर्ज में डूबे आरोपियों ने पैसे जुटाने के लिए छह माह तक रेकी कर वारदात को अंजाम दिया था। बुधवार को बिसरख कोतवाली पुलिस ने मुख्य आरोपी समेत पांच को गिरफ्तार कर लिया। जबकि दो की तलाश जारी है। आरोपियों के पास से फिरौती की रकम के 29 लाख रुपये (24.50 लाख नगद व 4.50 लाख के जेवरात), दो कार, 7 मोबाइल और दिल्ली सिविल डिफेंस व यूपी पुलिस की वर्दी बरामद हुई है।
डीसीपी सेंट्रल नोएडा शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया आरोपियों की पहचान कशिश चौहान उर्फ ईशु निवासी बिजनौर, राजेश पवार निवासी दिल्ली, विवेक शर्मा निवासी मथुरा, अंकित शाही निवासी देवरिया और अंशुल निवासी एटा के रूप में हुई है। मुख्य आरोपी कशिश चौहान उर्फ ईशु सलारपुर में किराये पर रहता था। उसका भाई लवली स्पा सेंटर संचालक है। मामले में लवली और चांद की तलाश जारी है। पुलिस के मुताबिक ईशू को महंगी रील बनाने का भी शौक था। वारदात के बाद वह फ्लाइट से बंगलूरू घूमकर आया था। बरेली में महिला मित्र से भी मिला था। ईशू की शादी नहीं हुई है। वारदात में अंकित की कार का घटना में प्रयोग किया गया। वहीं अंशुल की कार से रेकी की गई थी।
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दर्ज मामले के मुताबिक 20 जुलाई को जीएसटी सलाहकार संदीप कुमार सोसाइटी से निकले थे। कार में उनका पालतू कुत्ता और लैपटॉप था। तभी कुछ लोगों ने अपनी कार पीड़ित की कार के आगे लगा दी और फर्जी पुलिस व जीएसटी अधिकारी बनकर संदीप की कार में बैठ गए। आरोपियों ने पीड़ित को दो कंपनियों का नाम बताकर पर्जी ई-वे बिल व सत्यापन का कार्य करने के नाम पर ब्लैकमेल किया और 29 लाख रुपये की वसूली की। घटना की एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने पांच टीमें गठित की थी। पुलिस जांच में पता चला है कि छह माह पहले ही आरोपियों ने रेकी शुरू की।
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सुबह 11:30 बजे किया अपहरण, शाम को 7:30 छोड़ा
पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने सुबह 11:30 बजे पीड़ित को उसी की कार में अगवा किया। पैसा मिलने के बाद आरोपियों ने पीड़ित को नोएडा में सेक्टर-144 के पास छोड़ा। करीब 8 घंटे तक पीड़ित आरोपियों संग रहा। इस बीच बर्गर भी खाया था। जेवर टोल प्लाजा के सीसीटीवी कैमरे में कार कैद हुई। करीब 10 थानों की सीमा से कार निकली लेकिन कहीं पर भी उसे पकड़ा नहीं गया। पीड़ित ने अपने भाई को फोन कर पैसे मंगवाए।
दिल्ली से वर्दी खरीद बना यूपी पुलिस का फर्जी दरोगा
डीसीपी ने बताया कि आरोपी ईशू ने यूपी पुलिस के दरोगा की वर्दी पहनी थी। वर्दी दिल्ली की दुकान से खरीदी गई थी। वर्दी पर लगे बैच की सिलाई थी। वारदात के वक्त राजेश और चांद जीएसटी अधिकारी बने। अपहरण के समय पीड़ित की कार में तीनों सवार थे। कार की अगली सीट पर ईशू व राजेश बैठे थे। ईशू कार चला रहा था। चांद पीड़ित संदीप के साथ पिछली सीट पर बैठा था।
पोर्टल पर की शिकायत, बगैर जांच के निस्तारण
वारदात 20 जुलाई की थी। मामले में 19 दिन बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। इस दौरान पीड़ित पुलिस के चक्कर लगाता रहा। आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत भी की। जांच किए बिना उसका निस्तारण भी कर दिया गया। डीसीपी ने कहा कि एफआईआर में देरी और आईजीआरएस के निस्तारण की जांच एसीपी को सौंपी गई है।
4 घंटे बाद दी 112 पर सूचना, हवाला लेने-देन की जांच शुरू
पुलिस ने बताया कि पीड़ित करीब चार घंटे बाद डायल-112 पर फोन कर वारदात की सूचना दी। पुलिस पैसों का इंतजाम हवाला के माध्यम से करने की जांच कर रही है। पुलिस अफसरों ने बताया कि पीड़ित जीएसटी के केसों को निपटाने का दावा करता है। जांच में सामने आया है कि पीड़ित जीएसटी चोरी की रकम को कम करने का दावा करता है। इस तरह के दस्तावेज मिले हैं। इसके बदले वह उद्यमियों से मोटी फीस लेता है। इस संबंध में जीएसटी विभाग को पत्र भेजकर जांच करने को कहा जाएगा।
पालतू कुत्ते की फुटेज देख आरोपियों तक पहुंची पुलिस
पुलिस ने बताया कि पीड़ित ने सफेद रंग की अर्टिगा कार होने की जानकारी दी थी। जांच में पता चला कि कार अर्टिगा नहीं थी। इसका पता पीड़ित के पालतू कुत्ते से चला। एडीसीपी ने बताया कि आरोपियों ने पीड़ित की कार से पालतू कुत्ते को साथियों की कार में भेज दिया था। नोएडा में ही आरोपियों की कार पंप पर पेट्रोल लेने रुकी थी। वहां सीसीटीवी फुटेज में कार में कुत्ता दिखा। जिससे आरोपियों की कार की पहचान हो गई। पुलिस ने कार का पता लगाकर आरोपियों तक पहुंच गई।
गलत सूचना पर 12 कारों की हुई जांच
पुलिस ने बताया कि पीड़ित ने सफेद रंग की अर्टिगा कार की जानकारी दी थी। पुलिस ने घटना वाले रूट पर अर्टिगा कारों को तलाश किया। कुल 12 कार मिली और इन 12 कारों की जांच के लिए 12 टीमें लगाई गई थी। हालांकि मामले की जांच के बाद में कार दूसरी निकली।
खुलासे के बाद भी पुराने दावे पर कायम है पुलिस
मामला सामने आने के बाद पुलिस ने दावा किया था कि पीड़ित अपनी मर्जी से कार में गया था, लेकिन अब जब खुलासा हुआ है तो पूरा मामला उल्टा निकला है। हालांकि पुलिस पुराने दावे पर कायम है। पुलिस का कहना है कि पीड़ित जीएसटी के मुकदमे को रफा-दफा करने के मकसद से ही कार में बैठकर आरोपियों के साथ घूमता रहा। पैसा देने के बाद आरोपियों ने उसे छोड़ भी दिया।
ड्राइवर बना था दरोगा
पुलिस ने बताया कि मुख्य आरोपी इशू यशोभूमि द्वारका दिल्ली में डीसीपीओ (ड्राइवर कम पंप ऑपरेटर) है। आरोपी राजेश पंवार दिल्ली नागरिक सुरक्षा बल (डीसीडी) से जुडा हुआ है। वहीं विवेक शर्मा बल्लभगढ़ में डीसीपीओ था। अंकित सलारपुर गांव में लोहे की ग्रिल व गेट बनाने का काम करता है। घटना में प्रयुक्त वाहन एक्सएल-6 कार अंकित की है। पांचवां आरोपी अंशुल दिल्ली में प्रॉपर्टी डीलर है। कामकाज के माध्यम से ही सभी एक-दूसरे से जुड़े हैं।
पीड़ित से परिचित था मुख्य आरोपी
ईशू पीड़ित को 2021 से जानता था। पुलिस पूछताछ में ईशू ने बताया कि पीड़ित संदीप जीएसटी के अभिलेखों व बिलों में हेराफेरी कर मोटा मुनाफा कमाता है। इसी कारण उसने पीड़ित से पैसे हड़पने की साजिश रची। ईशू ने जीएसटी ऑफिस में संदीप को देखा था।