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Noida News: यथार्थ अस्पताल के डॉक्टरों पर मेडिकल लापरवाही का आरोप खारिज
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जिला उपभोक्ता आयोग
यथार्थ अस्पताल के डॉक्टरों पर मेडिकल लापरवाही का आरोप खारिज
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। गौतमबुद्धनगर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने यथार्थ अस्पताल, सेक्टर-110 नोएडा के डॉक्टरों पर मेडिकल लापरवाही के आरोप में दाखिल शिकायत को खारिज कर दिया है। पूर्वी दिल्ली निवासी संजय कुमार सिंह ने 2019 में शिकायत दाखिल कर आरोप लगाया था कि 28 सितंबर 2018 को उनकी पत्नी निर्मला (41) यथार्थ अस्पताल में नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. उपेंद्र सिंह को दिखाने पहुंची थीं।
शिकायत के अनुसार, जांच के दौरान उन्हें बताया गया कि उनकी किडनी की कार्यक्षमता केवल छह प्रतिशत रह गई है। इसके बाद वह बेहोश हो गईं। आरोप था कि उन्हें तत्काल आईसीयू में भर्ती करने और आपात उपचार देने के बजाय ईएसआई अस्पताल भेजा गया, जिससे उपचार में चार घंटे से अधिक की देरी हुई। शिकायतकर्ता ने पत्नी की मौत के लिए डॉक्टरों और अस्पताल को जिम्मेदार बताते हुए करीब 20 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की थी।
अस्पताल की ओर से आरोपों को खारिज करते हुए बताया गया कि निर्मला पहले से उच्च रक्तचाप, क्रोनिक किडनी डिजीज और हाइपोथायरॉइडिज्म से पीड़ित थीं। डॉक्टरों के अनुसार, 28 सितंबर को ओपीडी में अचानक बेहोश होने पर तत्काल कोड ब्लू घोषित कर उन्हें एमआईसीयू में ले जाया गया। लेकिन 30 सितंबर को हृदय गति रुकने से उनकी मौत हो गई। आयोग ने केवल उपचार के अपेक्षित परिणाम न मिलने या मरीज की मौत होने से चिकित्सकीय लापरवाही साबित नहीं होती। इसके आधार पर आयोग ने शिकायत खारिज कर दी।
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यथार्थ अस्पताल के डॉक्टरों पर मेडिकल लापरवाही का आरोप खारिज
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। गौतमबुद्धनगर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने यथार्थ अस्पताल, सेक्टर-110 नोएडा के डॉक्टरों पर मेडिकल लापरवाही के आरोप में दाखिल शिकायत को खारिज कर दिया है। पूर्वी दिल्ली निवासी संजय कुमार सिंह ने 2019 में शिकायत दाखिल कर आरोप लगाया था कि 28 सितंबर 2018 को उनकी पत्नी निर्मला (41) यथार्थ अस्पताल में नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. उपेंद्र सिंह को दिखाने पहुंची थीं।
शिकायत के अनुसार, जांच के दौरान उन्हें बताया गया कि उनकी किडनी की कार्यक्षमता केवल छह प्रतिशत रह गई है। इसके बाद वह बेहोश हो गईं। आरोप था कि उन्हें तत्काल आईसीयू में भर्ती करने और आपात उपचार देने के बजाय ईएसआई अस्पताल भेजा गया, जिससे उपचार में चार घंटे से अधिक की देरी हुई। शिकायतकर्ता ने पत्नी की मौत के लिए डॉक्टरों और अस्पताल को जिम्मेदार बताते हुए करीब 20 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की थी।
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अस्पताल की ओर से आरोपों को खारिज करते हुए बताया गया कि निर्मला पहले से उच्च रक्तचाप, क्रोनिक किडनी डिजीज और हाइपोथायरॉइडिज्म से पीड़ित थीं। डॉक्टरों के अनुसार, 28 सितंबर को ओपीडी में अचानक बेहोश होने पर तत्काल कोड ब्लू घोषित कर उन्हें एमआईसीयू में ले जाया गया। लेकिन 30 सितंबर को हृदय गति रुकने से उनकी मौत हो गई। आयोग ने केवल उपचार के अपेक्षित परिणाम न मिलने या मरीज की मौत होने से चिकित्सकीय लापरवाही साबित नहीं होती। इसके आधार पर आयोग ने शिकायत खारिज कर दी।
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