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इंजीनियर युवराज की मौत: भ्रष्टाचार का दलदल है स्पोर्ट्स सिटी, डूब चुकी हैं कई जांच; हर कदम पर अधिकारी मेहरबान

अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 24 Jan 2026 03:17 PM IST
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सार

ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में बेसमेंट के लिए खोदे गए प्लॉट में डूबकर सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत के मामले में सीबीआई की तरफ से दर्ज की गई प्राथमिकी में स्पोर्ट्स सिटी के तीन बिल्डर समूह व उनके निदेशक नामजद हैं। इसमें जिनाडु एस्टेट के साथ बिल्डर निर्मल सिंह, विदुर भारद्वाज, सुरप्रती सिंह व प्राधिकरण के अज्ञात अधिकारियों व अन्य जो भी शामिल हैं।

Software engineer Yuvraj death Sports City is quagmire of corruption several investigations already failed
इंजीनियर युवराज का आखिरी वीडियो वायरल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एक सप्ताह पहले ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में बेसमेंट के लिए खोदे गए प्लॉट में डूबकर सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत के बाद गठित एसआईटी की जांच में एक बार फिर स्पोर्ट्स सिटी का भ्रष्टाचार उजागर हुआ है। एसआईटी ने बिल्डरों पर की गई मेहरबानी को लेकर प्राधिकरण अधिकारियों से जवाब मांगा है। 
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इसमें प्राधिकरण का स्पोर्ट्स सिटी और नियोजन विभाग घिरा हुआ है। पिछले कुछ वर्षों तो स्पोर्ट्स सिटी में कई बार भ्रष्टाचार का दलदल सामने आ चुका है। जिसमें प्राधिकरण व शासन स्तर की कई जांचें डूब चुकी हैं। 
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मार्च 2025 में सीबीआई ने भी प्राथमिकी दर्ज करवाई थी। इसमें सेक्टर-150 के लीड विकासर्कता लोटस ग्रीन्स व उसके निदेशक, प्राधिकरण अधिकारी नामजद हुए थे। इसी प्लाट के सब-डिवीजन के बाद ए-3 प्लाट विशटाउन बिल्डर ने लिया था।

हर कदम पर अधिकारी मेहरबान
स्पोर्ट्स सिटी परियोजना में प्राधिकरण के अधिकारी बिल्डरों पर हर कदम पर मेहरबान रहे हैं। बिल्डरों से कई वर्षों तक परियोजना की जमीन का पैसा नहीं मांगा गया। बकाये के लिए नोटिस नहीं जारी किए गए। बगैर खेल सुविधाएं ग्रुप हाउसिंग समेत प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी गई। प्राधिकरण का 9000 करोड़ रुपये अभी भी बकाया है।
 

चार बिल्डरों को दिए गए थे प्लॉट, किए 84 टुकड़े
सेक्टर-78, 79, 101, 150, 152 में स्पोर्टस् सिटी के लिए चार बिल्डर समूह प्लाॅट आवंटित किए गए थे। जमीन के टुकड़े करने के बाद बकाये के मांगपत्र सब-डिवीजन से जमीन पाने वाले छोटे-छोटे बिल्डरों को जारी कर दिए गए। चार बड़े प्लॉट का सब-डिवीजन कर बिल्डर व प्राधिकरण ने 84 टुकड़े कर प्लॉट निकाल दिए। 
 

इनमें 74 प्लॉट के लेआउट को नोएडा प्राधिकरण ने मंजूरी दे दी। वहीं 46 प्लॉट पर ग्रुप हाउसिंग के नक्शे पास हो चुके हैं। वर्ष 2011 में परियोजना में बिल्डर कंपनियों के लिए नेटवर्थ और टर्नओवर को मंजूरी दी गई। इसके बाद 2017 के पहले तक नक्शे पास किए गए।
 

आर्थिक मंदी का हवाला देकर घटाए नेटवर्थ के मानक
स्पोर्ट्स सिटी में प्लॉट लेने के लिए बिल्डर कंपनी के लिए टर्नओवर का मानक 400 करोड़ से 200 करोड़ और नेटवर्थ का मानक 100 की जगह 80 करोड़ रुपये किए जाने पर सीएजी ने आपत्ति दर्ज कराई है। प्राधिकरण की तरफ से तर्क दिया जाता रहा है कि जब यह बदलाव किए गए उस समय आर्थिक मंदी थी। मानक घटाए जाने से कम पूंजी क्षमता वाले बिल्डर आए और इस वजह से अधिकतर ग्रुप हाउसिंग परियोजनाएं फंसी।

 

सीबीआई ने बिल्डर व प्राधिकरण अधिकारियों के खिलाफ दर्ज की है प्राथमिकी
सीबीआई की तरफ से दर्ज की गई प्राथमिकी में स्पोर्ट्स सिटी के तीन बिल्डर समूह व उनके निदेशक नामजद हैं। इसमें जिनाडु एस्टेट के साथ बिल्डर निर्मल सिंह, विदुर भारद्वाज, सुरप्रती सिंह व प्राधिकरण के अज्ञात अधिकारियों व अन्य जो भी शामिल हैं। इनके नाम प्राथमिकी में शामिल किया गया है।
 

इसी तरह लोटस ग्रीन्स के खिलाफ प्राथमिकी में भी बिल्डर व निदेशक निर्मल सिंह, विदुर भारद्वाज, सुरप्रती सिंह व प्राधिकरण के अज्ञात अधिकारियों व अन्य के साथ नामजद हैं। तीसरी प्राथमिकी लॉजिक्स इंफ्रा डेवलपर्स के खिलाफ हुई है। इसमें निदेशक शक्ति नाथ, मीरा नाथ, विक्रम नाथ प्राधिकरण के अज्ञात अधिकारियों व अन्य नामजद हैं।
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