महेंद्रपाल ने पेश की मिसाल: 48 की उम्र में दी लेखपाल परीक्षा, बेटे ने सिखाया गणित का हर सवाल हल करना
महेंद्रपाल सिंह का मानना है कि जीवन में सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो तो सफलता जरूर मिलती है। कई लोग उम्र बढ़ने के बाद नई शुरुआत करने से डरते हैं, लेकिन व्यक्ति को खुद पर विश्वास बनाए रखना चाहिए।
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कहते हैं कि सीखने और आगे बढ़ने की कोई उम्र नहीं होती। अक्सर पिता बेटे को शिक्षित करने के लिए प्रेरित करते हुए दिखाई देते हैं। लेकिन गौतमबृद्ध नगर में आयोजित हुई यूपीएसएसएससी लेखपाल मुख्य परीक्षा-2026 में अजीबोगरीब स्थिति देखने को मिली। बेटे से शिक्षा के गुर सीखने के बाद मथुरा निवासी 48 वर्षीय महेंद्रपाल सिंह ने लेखपाल भर्ती के लिए परीक्षा दी और युवाओं और समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया।
सेना से सेवानिवृत्त हैं महेंद्रपाल
महेंद्रपाल सिंह सेना से सेवानिवृत्त हैं और अब सरकारी सेवा में फिर से योगदान देने का सपना लेकर लेखपाल भर्ती परीक्षा में शामिल हुए। परीक्षा केंद्र से बाहर निकलने के बाद उन्होंने बताया कि उन्होंने जनवरी 2026 से ही लेखपाल परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी। उम्र को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया और नियमित पढ़ाई के साथ मेहनत जारी रखी। उन्होंने कहा कि परिवार का सहयोग उनकी सबसे बड़ी ताकत बना। खासतौर पर उनके बेटे ने तैयारी में काफी मदद की। बेटे ने उन्हें गणित के कठिन सवालों को आसान तरीके से हल करना सिखाया।
बेटा है 12वीं पास
महेंद्रपाल सिंह ने बताया कि बेटे द्वारा समझाए गए कई सवाल परीक्षा में भी आए, जिससे उनका आत्मविश्वास और बढ़ गया। उनके अनुसार सेना में बिताए गए वर्षों ने उन्हें अनुशासन और कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखना सिखाया है। यही अनुभव अब प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में भी काम आया। उन्होंने कहा कि यदि मन में लक्ष्य पाने का जज्बा हो तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती। उनके बेटा व बेटी है। बेटी की शादी कर दी है। वहीं, बेटे ने इस वर्ष 12वीं परीक्षा उत्तीर्ण की हैं।
लक्ष्य स्पष्ट हो तो मेहनत जरूरी
महेंद्रपाल सिंह का मानना है कि जीवन में सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो तो सफलता जरूर मिलती है। कई लोग उम्र बढ़ने के बाद नई शुरुआत करने से डरते हैं, लेकिन व्यक्ति को खुद पर विश्वास बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में असफलता भी सीखने का एक हिस्सा है, इसलिए हार मानने के बजाय लगातार प्रयास करना चाहिए।