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Noida News: डार्क वेब और सोशल मीडिया के जरिये ड्रग्स तस्करी का मास्टरमाइंड चढ़ा एसटीएफ के हत्थे

Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 25 May 2026 07:43 PM IST
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STF nabs mastermind of drug trafficking through dark web and social media
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गाजियाबाद के लिए उपयोगी

फोटो
-दिल्ली-एनसीआर के कॉलेजों और हॉस्टलों में पढ़ने वाले छात्रों को बेच रहा था नशा
-गाजियाबाद की सोसायटी में रहता है आरोपी, ग्रेनो के परी चौक से पकड़ा गया
-आरोपी पर हत्या, एनडीपीएस और आर्म्स एक्ट समेत चार मामले पहले से दर्ज मिले
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। एसटीएफ नोएडा यूनिट ने दिल्ली-एनसीआर में विदेशी मादक पदार्थों की ऑनलाइन तस्करी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश करते हुए आरोपी को दबोचा है। टीम ने रविवार को गैंग के सरगना को ग्रेटर नोएडा के परी चौक से पकड़ा। आरोपी की पहचान अजनारा इंटीग्रिटी राजनगर एक्सटेंशन नंदग्राम गाजियाबाद निवासी गौरव खन्ना के रूप में हुई है। वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और डार्क वेब के जरिये इम्पोर्टेड ड्रग्स की सप्लाई करता था। गिरोह खासतौर पर दिल्ली-एनसीआर के कॉलेजों, यूनिवर्सिटी और हॉस्टलों में पढ़ने वाले छात्रों को निशाना बनाता था।
एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक राजकुमार मिश्र ने बताया कि लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि कुछ लोग डार्क वेब और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कम्युनिटी ग्रुप बनाकर विदेशी ड्रग्स जैसे इम्पोर्टेड गांजा, ओजी, बाबा कुश, चरस और अन्य नशीले पदार्थों की सप्लाई कर रहे हैं। जांच में पता चला कि गिरोह के सदस्य ऑनलाइन नेटवर्क के जरिये युवाओं तक आसानी से पहुंच बना रहे थे। इसी कड़ी में एसटीएफ नोएडा यूनिट को सूचना मिली कि गिरोह का संचालक गौरव खन्ना परी चौक ग्रेटर नोएडा के आसपास है। इसके बाद टीम ने जाल बिछाकर उसे गिरफ्तार किया। इससे पहले इस गिरोह के एक अन्य सदस्य करण राजीव को 5 मई 2026 को गाजियाबाद से पकड़ा था। उस समय पुलिस ने उसके कब्जे से भारी मात्रा में मादक पदार्थ बरामद किए थे। बरामदगी में नशा, इलेक्ट्रॉनिक तराजू, पासबुक, चेकबुक, डेबिट-क्रेडिट कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, चाकू और मोबाइल बरामद हुए थे। इस मामले में थाना नंदग्राम में एनडीपीएस एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। गौरव खन्ना तभी से फरार चल रहा था।
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कॉलेजों और हॉस्टलों के ग्रुपों को बेचता था नशा : पूछताछ में गौरव खन्ना ने बताया कि 1999 में फरीदाबाद के डीएवी कॉलेज से उसने बीसीए की पढ़ाई की थी। पढ़ाई के दौरान उसके साथी छात्र हेमराज की हत्या हो गई थी। इस मामले में वह करीब 10 महीने तक रोहतक जेल में बंद रहा। जेल से छूटने के बाद उसने फरीदाबाद में फाइनेंस का काम शुरू किया। इस दौरान भी मारपीट और हत्या के प्रयास जैसे मामलों में उसका नाम सामने आया। 2012 में गौरव गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन में रहने लगा और बाद में अपने परिचित करण राजीव को भी वहीं बुला लिया। 2019 से उसने थाईलैंड से इम्पोर्टेड गांजा और हिमाचल प्रदेश से चरस मंगवाकर ऑनलाइन तरीके से बेचने का कारोबार शुरू किया। आरोपी डार्क वेब के जरिये विदेशी ड्रग्स मंगाता था और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बने व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुपों के जरिए ग्राहकों तक पहुंचता था। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी शिक्षण संस्थानों के छात्रों को अपने नेटवर्क में जोड़ता था। वह अलग-अलग कॉलेजों और हॉस्टलों के ग्रुपों में सक्रिय रहकर ड्रग्स का प्रचार करता था। छात्रों को हाई क्वालिटी विदेशी गांजा और चरस उपलब्ध कराने के नाम पर ऑनलाइन ऑर्डर लिए जाते थे। भुगतान यूपीआई और बैंक खातों के जरिये लिया जाता था।
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ऑनलाइन डिलीवरी सेवा कंपनी की लेता था मददः आरोपी मादक पदार्थों की सप्लाई के लिए रैपिडो, ऊपर और पोर्टर जैसी डिलीवरी सेवाओं का इस्तेमाल करता था। ड्रग्स की पैकिंग ऐसी कि जाती कि वह कंप्यूटर पार्ट्स, पेन ड्राइव या इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसी दिखाई देती थी, ताकि इससे पुलिस और डिलीवरी एजेंसियों को शक न हो। आरोपी ने ड्रग्स कारोबार के लिए कई बैंक खातों और निजी कंपनियों का इस्तेमाल किया। जांच में अब तक 17 बैंक खातों की जानकारी सामने आई है। एजेंसियां अब इन खातों में हुए लेनदेन और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। आरोपी के खिलाफ पहले से हत्या, मारपीट, आर्म्स एक्ट और एनडीपीएस एक्ट सहित कुल चार आपराधिक मामले दर्ज हैं। फिलहाल आरोपी को गिरफ्तार कर स्थानीय पुलिस को सौंप दिया गया है। आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। मामले में अन्य आरोपियों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की तलाश जारी है। साथ ही इस बात की जांच की जा रही है कि आरोपी कब से यह काम कर रहा था। अबतक कितने लोगों को मादक पदार्थों की सप्लाई कर चुका है।
आरोपी ने बताया इतने में बेचता था : पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह ओजी गांजा करीब 1400 रुपये प्रति ग्राम, हशीश 4500 रुपये प्रति 10 ग्राम और बाबा कुश 5500 रुपये प्रति ग्राम के हिसाब से बेचता था। वहीं एलएसडी जैसे ड्रग्स की कीमत 4400 रुपये प्रति ग्राम तक वसूली जाती थी।
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