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Delhi NCR News: अब दीपके ने संभाली भूख हड़ताल की कमान
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जंतर-मंतर पर तैनात भारी पुलिस बल।
- फोटो : Amar Ujala
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कहा-आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और युवाओं की आवाज का प्रतीक है
-अभिजीत पर अज्ञात महिला ने फेंकी स्याही, लगाए जय श्री राम के नारे
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। बीते 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद आंदोलन की कमान अब सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने संभाल ली है। उन्होंने अन्य छात्रों के साथ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करते हुए साफ किया कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि लाखों युवाओं की आवाज है और वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी आंदोलन जारी रहेगा।
शनिवार सुबह करीब सात बजे पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम जंतर-मंतर पहुंची। पुलिस ने हाईकोर्ट के निर्देश और डॉक्टरों की सलाह का हवाला देते हुए वांगचुक को चिकित्सकीय निगरानी के लिए सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें हटाने के लिए धक्का-मुक्की और मारपीट की। कार्रवाई के बाद कुछ समय के लिए जंतर-मंतर जाने वाले सभी मार्ग बंद कर दिए गए और किसी को भी प्रदर्शन स्थल तक जाने की अनुमति नहीं दी गई।
वांगचुक को अस्पताल ले जाने के तुरंत बाद अभिजीत दीपके मंच पर पहुंचे और भूख हड़ताल की जिम्मेदारी संभाल ली। भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और युवाओं की आवाज का प्रतीक है। उन्होंने समर्थकों से शांति और अहिंसा बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि 20 जुलाई को प्रस्तावित 'संसद चलो' अभियान हर हाल में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से इस अभियान में शामिल होने का आह्वान भी किया।
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उधर, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सुबह बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी, जिनमें कई सादे कपड़ों में भी थे, जंतर मंतर पहुंचे। उनका आरोप है कि पुलिस ने मंच के आसपास मौजूद लोगों को हटाया और विरोध कर रहे कुछ लोगों के साथ बल प्रयोग किया। हालांकि, पुलिस ने अपनी कार्रवाई को अदालत के आदेश और चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुरूप बताया है।
घटना के बाद जंतर-मंतर और उसके आसपास पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग कर लोगों और वाहनों की आवाजाही पर नजर रखी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच आंदोलनकारियों ने साफ संकेत दिए हैं कि नेतृत्व बदल सकता है, लेकिन आंदोलन नहीं रुकेगा। अब सबकी निगाहें 20 जुलाई को प्रस्तावित 'संसद चलो' अभियान और वांगचुक के स्वास्थ्य पर टिकी हैं।
जरूरत पड़ी तो मैं संभालूंगी आंदोलन की कमान : गीतांजलि
वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने कहा कि सोनम के स्वास्थ्य में सुधार होने पर वह सोमवार से फिर भूख हड़ताल पर लौटने की कोशिश करेंगे। यदि डॉक्टर इसकी अनुमति नहीं देते या उनकी तबीयत साथ नहीं देती, तो वह स्वयं आंदोलन की कमान संभालेंगी। उन्होंने समर्थकों से आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखने की अपील की।
दीपके पर स्याही फेंकी, थप्पड़ मारने की भी कोशिश
जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल संभालने के दौरान अभिजीत दीपके पर एक अज्ञात महिला ने स्याही फेंक दी और उन्हें थप्पड़ मारने की कोशिश की। घटना के बाद महिला ने 'जय श्रीराम' के नारे लगाए, जबकि दीपके ने सोशल मीडिया पर लिखा कि नीला उनका पसंदीदा रंग है और उन्होंने 'जय भीम' का नारा भी लगाया। उन्होंने समर्थकों से महिला के साथ किसी तरह का दुर्व्यवहार न करने की अपील की। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
सुरक्षा के घेरे में जंतर-मंतर, बढ़ाई गई निगरानी
पुलिस कार्रवाई के बाद जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्र को सुरक्षा के लिहाज से छावनी में तब्दील कर दिया गया। अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है, प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई है और आने-जाने वालों की जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां पूरे इलाके की निगरानी कर रही हैं।
हाईकोर्ट के निर्देश बने पुलिस कार्रवाई का आधार
दिल्ली हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका में वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई गई थी। अदालत ने सरकारी डॉक्टरों को प्रतिदिन स्वास्थ्य परीक्षण कराने और आवश्यकता पड़ने पर जरूरी चिकित्सकीय हस्तक्षेप सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। पुलिस ने इसी आदेश और डॉक्टरों की सलाह के आधार पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया।
वांगचुक की सहेत पर लगातार रखी जा रही नजर
मैंने दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों और डॉक्टरों की सलाह के अनुरूप कार्रवाई की है। कुछ प्रदर्शनकारियों ने इसमें रुकावट डाली, जिससे थोड़ी अफरातफरी मची। डॉक्टरों ने जांच में पाया कि लंबे समय तक उपवास रखने के कारण वांगचुक कमजोर हो गए हैं। उनकी आगे की जांच की जा रही है और विशेषज्ञों की निगरानी में उनकी सेहत पर लगातार नजर रखी जा रही है।
-सचिन शर्मा, जिला पुलिस उपायुक्त, नई दिल्ली
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-अभिजीत पर अज्ञात महिला ने फेंकी स्याही, लगाए जय श्री राम के नारे
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। बीते 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद आंदोलन की कमान अब सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने संभाल ली है। उन्होंने अन्य छात्रों के साथ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करते हुए साफ किया कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि लाखों युवाओं की आवाज है और वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी आंदोलन जारी रहेगा।
शनिवार सुबह करीब सात बजे पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम जंतर-मंतर पहुंची। पुलिस ने हाईकोर्ट के निर्देश और डॉक्टरों की सलाह का हवाला देते हुए वांगचुक को चिकित्सकीय निगरानी के लिए सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें हटाने के लिए धक्का-मुक्की और मारपीट की। कार्रवाई के बाद कुछ समय के लिए जंतर-मंतर जाने वाले सभी मार्ग बंद कर दिए गए और किसी को भी प्रदर्शन स्थल तक जाने की अनुमति नहीं दी गई।
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वांगचुक को अस्पताल ले जाने के तुरंत बाद अभिजीत दीपके मंच पर पहुंचे और भूख हड़ताल की जिम्मेदारी संभाल ली। भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और युवाओं की आवाज का प्रतीक है। उन्होंने समर्थकों से शांति और अहिंसा बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि 20 जुलाई को प्रस्तावित 'संसद चलो' अभियान हर हाल में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से इस अभियान में शामिल होने का आह्वान भी किया।
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उधर, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सुबह बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी, जिनमें कई सादे कपड़ों में भी थे, जंतर मंतर पहुंचे। उनका आरोप है कि पुलिस ने मंच के आसपास मौजूद लोगों को हटाया और विरोध कर रहे कुछ लोगों के साथ बल प्रयोग किया। हालांकि, पुलिस ने अपनी कार्रवाई को अदालत के आदेश और चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुरूप बताया है।
घटना के बाद जंतर-मंतर और उसके आसपास पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग कर लोगों और वाहनों की आवाजाही पर नजर रखी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच आंदोलनकारियों ने साफ संकेत दिए हैं कि नेतृत्व बदल सकता है, लेकिन आंदोलन नहीं रुकेगा। अब सबकी निगाहें 20 जुलाई को प्रस्तावित 'संसद चलो' अभियान और वांगचुक के स्वास्थ्य पर टिकी हैं।
जरूरत पड़ी तो मैं संभालूंगी आंदोलन की कमान : गीतांजलि
वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने कहा कि सोनम के स्वास्थ्य में सुधार होने पर वह सोमवार से फिर भूख हड़ताल पर लौटने की कोशिश करेंगे। यदि डॉक्टर इसकी अनुमति नहीं देते या उनकी तबीयत साथ नहीं देती, तो वह स्वयं आंदोलन की कमान संभालेंगी। उन्होंने समर्थकों से आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखने की अपील की।
दीपके पर स्याही फेंकी, थप्पड़ मारने की भी कोशिश
जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल संभालने के दौरान अभिजीत दीपके पर एक अज्ञात महिला ने स्याही फेंक दी और उन्हें थप्पड़ मारने की कोशिश की। घटना के बाद महिला ने 'जय श्रीराम' के नारे लगाए, जबकि दीपके ने सोशल मीडिया पर लिखा कि नीला उनका पसंदीदा रंग है और उन्होंने 'जय भीम' का नारा भी लगाया। उन्होंने समर्थकों से महिला के साथ किसी तरह का दुर्व्यवहार न करने की अपील की। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
सुरक्षा के घेरे में जंतर-मंतर, बढ़ाई गई निगरानी
पुलिस कार्रवाई के बाद जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्र को सुरक्षा के लिहाज से छावनी में तब्दील कर दिया गया। अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है, प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई है और आने-जाने वालों की जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां पूरे इलाके की निगरानी कर रही हैं।
हाईकोर्ट के निर्देश बने पुलिस कार्रवाई का आधार
दिल्ली हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका में वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई गई थी। अदालत ने सरकारी डॉक्टरों को प्रतिदिन स्वास्थ्य परीक्षण कराने और आवश्यकता पड़ने पर जरूरी चिकित्सकीय हस्तक्षेप सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। पुलिस ने इसी आदेश और डॉक्टरों की सलाह के आधार पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया।
वांगचुक की सहेत पर लगातार रखी जा रही नजर
मैंने दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों और डॉक्टरों की सलाह के अनुरूप कार्रवाई की है। कुछ प्रदर्शनकारियों ने इसमें रुकावट डाली, जिससे थोड़ी अफरातफरी मची। डॉक्टरों ने जांच में पाया कि लंबे समय तक उपवास रखने के कारण वांगचुक कमजोर हो गए हैं। उनकी आगे की जांच की जा रही है और विशेषज्ञों की निगरानी में उनकी सेहत पर लगातार नजर रखी जा रही है।
-सचिन शर्मा, जिला पुलिस उपायुक्त, नई दिल्ली