महाविद्यालय की हालत महाखराब: दो कमरों में पढ़ रहीं एक हजार छात्राएं, 34 साल पहले हुई थी इस स्कूल की स्थापना
कुछ महीने पहले डीसी और एसडीएम ने स्कूल का दौरा किया था और समस्याओं के समाधान का वादा किया था, मगर वह वादा अब तक हवा में है।
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हरियाणा के नूंह जिला स्थित पिनगवां खंड के ऐतिहासिक गांव शाह चोखा का राजकीय कन्या वरिष्ठ महाविद्यालय बेटियों की शिक्षा के लिए एक उम्मीद की किरण है, लेकिन स्कूल की बदहाल स्थिति इस उम्मीद को धूमिल कर रही है। यहां करीब 1000 छात्राएं शिक्षा ग्रहण करने आती हैं, मगर स्कूल में सुविधाओं का अभाव उनकी पढ़ाई में सबसे बड़ी बाधा बन रहा है। स्कूल में मात्र चार कमरे हैं, जिनमें से एक मिड-डे मील की रसोई और दूसरा स्टाफ रूम के लिए उपयोग होता है। बचे दो कमरे भी जर्जर हैं कि हल्की बरसात आने पर उनमें पानी भर जाता है, जिसके कारण अक्सर छुट्टी करनी पड़ती है।
मिड-डे मील कक्ष की बदबू पढ़ाई में बाधा
सर्दी गर्मी में छात्राएं टूटे-फूटे टीन शेड के नीचे या खुले आसमान तले जमीन पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। स्कूल भवन की स्थिति इतनी दयनीय है कि छत का प्लास्ट गिर रहा है और सरिया गल चुके हैं, जो किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकते हैं। खेल के लिए कोई मैदान नहीं है, और मिड-डे मील कक्ष की बदबू पढ़ाई में व्यवधान पैदा करती है।
ठंड में छात्राएं खुले आसमान के नीचे बैठकर कर रहीं पढ़ाई
पड़ रही कड़ाके की ठंड में छात्राएं टीन शेड के नीचे या खुले आसमान के नीचे बैठकर पढ़ाई कर रही हैं। स्कूल की स्थापना 1991 में लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए की गई थी, लेकिन तीन दशक बीत जाने के बाद भी शिक्षा विभाग ने यहां मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराईं। प्रिंसिपल आबिद हुसैन ने बताया कि स्कूल में शिक्षकों की कमी के साथ-साथ कमरों की भारी किल्लत है। एक हजार छात्राओं के लिए केवल दो कमरे उपलब्ध हैं, जिसके चलते सर्दी, गर्मी और बरसात में बेटियां खुले में पढ़ने को मजबूर हैं। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी, उपायुक्त मेवात से लेकर चंडीगढ़ तक कई बार शिकायत की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
डीसी और एसडीएम ने किया था स्कूल का दौरा
कुछ महीने पहले डीसी और एसडीएम ने स्कूल का दौरा किया था और समस्याओं के समाधान का वादा किया था, मगर वह वादा अब तक हवा में है। छात्राओं ने सरकार से गुहार लगाई है कि स्कूल में पूर्ण शिक्षक स्टाफ, नए भवन और खेल का मैदान उपलब्ध कराया जाए ताकि वे सुरक्षित और बेहतर माहौल में पढ़ाई कर सकें।
राजकीय कन्या वरिष्ठ महाविद्यालय के बिल्कुल सामने लड़कों का स्कूल है और लड़कों के लिए दूसरी जगह भवन बन चुका है बस स्थानांतरित करना बाकी है। अगर लड़कों के स्कूल को दूसरे भवन में स्थानांतरित कर दिया जाए तो सामने वाला स्कूल लड़कियों की पढ़ाई में काम आ जाए। -आबिद हुसैन प्रिंसिपल
लड़कों के स्कूल के लिए दूसरा भवन बना हुआ है । स्थानांतरित के लिए कई बार बोला गया है ताकि लड़कियों के लिए ये भवन खाली हो जाए लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है। - हाजी तौफीक सरपंच प्रतिनिधि