पश्चिम एशिया संकट: सुलह की कोशिश करा रहे पाकिस्तान को ईरान ने दिखाया आईना, कहा- यूएस की शर्त मानने लायक नहीं
ईरान ने सोमवार को दावा किया कि अमेरिका के साथ कोई सीधी वार्ता नहीं हो रही है और केवल मध्यस्थों के जरिये अव्यवहारिक मांगें भेजी जा रही हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिकी कूटनीति लगातार बदलती रहती है, लेकिन ईरान का रुख पर कायम है। पढ़िए रिपोर्ट-
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उन्होंने कहा, अमेरिकी 'कूटनीति' लगातार बदलती रहती है, लेकिन हमारा रुख स्पष्ट है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान का मंच उनका अपना है और ईरान ने उसमें भाग नहीं लिया। उन्होंने कहा, क्षेत्र में युद्ध समाप्त करने की अपील स्वागत योग्य है, लेकिन यह याद रखना चाहिए कि इस संघर्ष की शुरुआत किसने की थी।
ये भी पढ़ें: 'अगर जल्द समझौता नहीं हुआ, तो तबाह कर देंगे खर्ग द्वीप', ट्रंप की ईरान को चेतावनी#Iran FM Spox: No direct US talks; only excessive, unreasonable demands via intermediaries.#US "diplomacy" flips constantly; our stance is clear.
Pakistan's forums are their own; we didn't participate.
Regional calls to end war are welcome, but remember who started it!#War pic.twitter.com/o9NDkZAAqN — Consulate General of the I.R. Iran in Mumbai (@IRANinMumbai) March 30, 2026
ईरान ने यह बयान ऐसे समय में दिया है, जब पाकिस्तान, सऊदी अरब, तुर्किये और मिस्र जैसे देशों के प्रतिनिधि मिलकर वार्ता का प्रयास कर रहे हैं ताकि युद्ध को खत्म किया जा सके, लेकिन अब भी प्रत्यक्ष वार्ता नहीं हो पाई है।
ट्रंप की ईरान को खर्ग द्वीप पर हमले की चेतावनी
इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज फिर ईरान को चेतावनी दी। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में लिखा, अमेरिका, ईरान में अपने सैन्य अभियानों को समाप्त करने के लिए एक और अधिक समझदार शासन के साथ गंभीरता से बातचीत कर रहा है।
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उन्होंने कहा कि इस दिशा में काफी प्रगति हुई है। लेकिन अगर किसी भी वजह जल्द ही कोई समझौता नहीं हो पाता है (जिसकी बहुत अधिक संभावना है)और अगर होर्मुजलडमरूमध्य व्यापार के लिए नहीं खुलता है, तो हम उनके सभी बिजली उत्पादन संयंत्रों, तेल कुओं और खर्ग द्वीप को पूरी तरह तबाह कर देंगे, जिन्हें हमने जानबूझकर अभी तक छुआ नहीं है। उन्होंने लिखा, यह उन असंख्य सैनिकों और अन्य लोगों का बदला होगा, जिन्हें ईरान ने पिछले शासन के 47 वर्षों के आतंक के दौरान बेरहमी से मार डाला था। इस मामले पर ध्यान देने के धन्यवाद।
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