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Delhi NCR News: एक फैसला, तीन जिंदगियां... ब्रेन डेड महिला के अंगदान से मिला नया जीवन
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- आरएमएल में मल्टी-ऑर्गन रिट्रीवल की छठी सफलता, दिल-लीवर-किडनी से मरीजों को राहत
- एक 45 वर्षीय महिला आरएमएल अस्पताल में सेरेब्रल हेमरेज (मस्तिष्क रक्तस्राव) के कारण ब्रेन डेथ हुई
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राम मनोहर लोहिया अस्पताल (आरएमएल) ने एक 45 वर्षीय ब्रेन डेड महिला के अंगदान से तीन मरीजों को नई जिंदगी देकर मानवीय संवेदना की मिसाल पेश की है। अटल बिहारी वाजपेयी आयुर्विज्ञान संस्थान (एबीवीआईएमएस) और आरएमएल ने रविवार को छठी बार सफल मल्टी-ऑर्गन रिट्रीवल प्रक्रिया पूरी की। महिला की मौत सेरेब्रल हेमरेज के कारण ब्रेन डेथ होने के बाद हुई थी। इस कठिन समय में उनके परिजनों ने साहसिक निर्णय लेते हुए गुर्दे, लीवर और दिल दान करने की सहमति दी। यह निर्णय तीन गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए जीवनदायी साबित हुआ।
आरएमएल के नेफ्रोलॉजी विभाग में किडनी फेलियर से जूझ रहे एक मरीज को गुर्दा प्रत्यारोपित किया गया। वहीं लीवर को आरआर अस्पताल भेजा गया, जहां एक मरीज को नई जिंदगी मिली। इसके अलावा दिल को एयर एम्बुलेंस के जरिए लखनऊ के संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसजीपीजीआई) पहुंचाकर हृदय रोग (कार्डियक फेलियर) से जूझ रहे मरीज का सफल प्रत्यारोपण किया गया।
एयर एम्बुलेंस से हृदय को लखनऊ, ग्रीन कॉरिडोर से लीवर को सुरक्षित भेजा -
शुरुआती प्रक्रिया के दौरान मेडिसिन विभाग और क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग की टीम के डॉक्टरों ने परिवार के सदस्यों को ब्रेन डेड की स्थिति के बारे में समझाया। साथ ही, आईसीयू में सभी अंगों को ठीक से सुरक्षित रखा। लीवर को दिल्ली पुलिस की ओर से बनाए गए ग्रीन कॉरिडोर से तेजी से पहुंचाया गया, जबकि हृदय को एयर एम्बुलेंस से लखनऊ भेजा गया। ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर और नोडल अधिकारी ने डायरेक्टर, एमएस और एडिशनल एमएस की देखरेख में इस पूरी प्रक्रिया का समन्वय किया। अस्पताल प्रशासन ने डोनर के परिजनों के इस महान निर्णय की सराहना करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया। अंगदान की यह पहल न केवल जीवन बचाने का कार्य है, बल्कि समाज में जागरूकता और मानवता का संदेश भी देती है।
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- एक 45 वर्षीय महिला आरएमएल अस्पताल में सेरेब्रल हेमरेज (मस्तिष्क रक्तस्राव) के कारण ब्रेन डेथ हुई
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नई दिल्ली। राम मनोहर लोहिया अस्पताल (आरएमएल) ने एक 45 वर्षीय ब्रेन डेड महिला के अंगदान से तीन मरीजों को नई जिंदगी देकर मानवीय संवेदना की मिसाल पेश की है। अटल बिहारी वाजपेयी आयुर्विज्ञान संस्थान (एबीवीआईएमएस) और आरएमएल ने रविवार को छठी बार सफल मल्टी-ऑर्गन रिट्रीवल प्रक्रिया पूरी की। महिला की मौत सेरेब्रल हेमरेज के कारण ब्रेन डेथ होने के बाद हुई थी। इस कठिन समय में उनके परिजनों ने साहसिक निर्णय लेते हुए गुर्दे, लीवर और दिल दान करने की सहमति दी। यह निर्णय तीन गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए जीवनदायी साबित हुआ।
आरएमएल के नेफ्रोलॉजी विभाग में किडनी फेलियर से जूझ रहे एक मरीज को गुर्दा प्रत्यारोपित किया गया। वहीं लीवर को आरआर अस्पताल भेजा गया, जहां एक मरीज को नई जिंदगी मिली। इसके अलावा दिल को एयर एम्बुलेंस के जरिए लखनऊ के संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसजीपीजीआई) पहुंचाकर हृदय रोग (कार्डियक फेलियर) से जूझ रहे मरीज का सफल प्रत्यारोपण किया गया।
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एयर एम्बुलेंस से हृदय को लखनऊ, ग्रीन कॉरिडोर से लीवर को सुरक्षित भेजा -
शुरुआती प्रक्रिया के दौरान मेडिसिन विभाग और क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग की टीम के डॉक्टरों ने परिवार के सदस्यों को ब्रेन डेड की स्थिति के बारे में समझाया। साथ ही, आईसीयू में सभी अंगों को ठीक से सुरक्षित रखा। लीवर को दिल्ली पुलिस की ओर से बनाए गए ग्रीन कॉरिडोर से तेजी से पहुंचाया गया, जबकि हृदय को एयर एम्बुलेंस से लखनऊ भेजा गया। ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर और नोडल अधिकारी ने डायरेक्टर, एमएस और एडिशनल एमएस की देखरेख में इस पूरी प्रक्रिया का समन्वय किया। अस्पताल प्रशासन ने डोनर के परिजनों के इस महान निर्णय की सराहना करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया। अंगदान की यह पहल न केवल जीवन बचाने का कार्य है, बल्कि समाज में जागरूकता और मानवता का संदेश भी देती है।