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Delhi NCR News: मुख्यमंत्री अधिवक्ता कल्याण योजना में माता-पिता को नहीं मिलेगा बीमा का लाभ
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- दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि यह सरकार और बीमा कंपनी के बीच समझौता
- वर्तमान में केवल वकील, उसकी पत्नी और बच्चों को मिलता है लाभ
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री अधिवक्ता कल्याण योजना के तहत योग्य वकीलों के माता-पिता को भी लाभ देने की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज किया है। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा कि इस मामले में कोई आदेश जारी नहीं किया जा सकता।
याचिका फर्स्ट जेनरेशन लायर्स एसोसिएशन द्वारा दायर की गई थी, जिसमें योजना के नियम-3 के तहत 'परिवार' की परिभाषा में केवल पति/पत्नी और बच्चों को शामिल करने को चुनौती दी गई थी। एसोसिएशन की ओर से पेश अधिवक्ता रुद्र विक्रम सिंह ने तर्क दिया कि योजना में स्वजन (माता-पिता) को शामिल नहीं किया है, जबकि यह वकीलों के कल्याण के लिए है। योजना के तहत पंजीकृत अधिवक्ताओं को 10 लाख रुपये का टर्म लाइफ इंश्योरेंस कवर मिलता है। साथ ही, अधिवक्ता, उनकी पत्नी और 25 वर्ष तक के दो बच्चों को 5 लाख रुपये का मेडिकल इंश्योरेंस प्रदान किया जाता है। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि इस लाभ को वकीलों के माता-पिता तक विस्तारित किया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह योजना दिल्ली सरकार और इंश्योरेंस कंपनी के बीच एक समझौता है। दिल्ली सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता समीर वशिष्ठ ने बताया कि माता-पिता को इंश्योरेंस लाभ देने वाली अलग नीतियां हैं और मांगे गए आदेश जारी नहीं किए जा सकते, क्योंकि इसमें कई व्यावहारिक रुकावटें हैं।
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- वर्तमान में केवल वकील, उसकी पत्नी और बच्चों को मिलता है लाभ
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री अधिवक्ता कल्याण योजना के तहत योग्य वकीलों के माता-पिता को भी लाभ देने की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज किया है। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा कि इस मामले में कोई आदेश जारी नहीं किया जा सकता।
याचिका फर्स्ट जेनरेशन लायर्स एसोसिएशन द्वारा दायर की गई थी, जिसमें योजना के नियम-3 के तहत 'परिवार' की परिभाषा में केवल पति/पत्नी और बच्चों को शामिल करने को चुनौती दी गई थी। एसोसिएशन की ओर से पेश अधिवक्ता रुद्र विक्रम सिंह ने तर्क दिया कि योजना में स्वजन (माता-पिता) को शामिल नहीं किया है, जबकि यह वकीलों के कल्याण के लिए है। योजना के तहत पंजीकृत अधिवक्ताओं को 10 लाख रुपये का टर्म लाइफ इंश्योरेंस कवर मिलता है। साथ ही, अधिवक्ता, उनकी पत्नी और 25 वर्ष तक के दो बच्चों को 5 लाख रुपये का मेडिकल इंश्योरेंस प्रदान किया जाता है। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि इस लाभ को वकीलों के माता-पिता तक विस्तारित किया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह योजना दिल्ली सरकार और इंश्योरेंस कंपनी के बीच एक समझौता है। दिल्ली सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता समीर वशिष्ठ ने बताया कि माता-पिता को इंश्योरेंस लाभ देने वाली अलग नीतियां हैं और मांगे गए आदेश जारी नहीं किए जा सकते, क्योंकि इसमें कई व्यावहारिक रुकावटें हैं।
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