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विश्व पुस्तक मेले में युवाओं का क्रेज: अंग्रेजी नॉवेल बने टीचर, भीड़ से प्रकाशक और साहित्यकार गदगद
संवाद न्यूज एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: अनुज कुमार
Updated Thu, 15 Jan 2026 08:00 AM IST
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सार
Delhi World Book Fair 2026: आज का युवा शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट के तेज दौर में भी किताबों के साथ ठहरकर सोचने-समझने का रास्ता चुन रहा है। भारत मंडपम में हुए विश्व पुस्तक मेले ने साबित किया कि युवा सिर्फ़ मनोरंजन नहीं, ज्ञान और खासकर अंग्रेजी भाषा की गहरी तलाश में है।
पुस्तक मेला
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
डिजिटल दौर और शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट के बीच अगर कोई चीज आज भी युवाओं को ठहरकर सोचने, समझने और सीखने का अवसर दे रही है, तो वह है किताब। भारत मंडपम में आयोजित विश्व पुस्तक मेला इस बात का सजीव प्रमाण बनकर उभरा है कि आज का युवा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि ज्ञान और भाषा की तलाश में भी है। खासकर अंग्रेजी भाषा सीखने की चाह रखने वाले युवाओं में अंग्रेजी उपन्यासों और साहित्य को लेकर जबरदस्त क्रेज देखा जा रहा है।
मेले में घूमते युवा पाठकों के हाथों में अंग्रेजी नॉवेल, शॉर्ट स्टोरी कलेक्शन और बायोग्राफी साफ बताती हैं कि अब भाषा सीखने का तरीका बदल रहा है। क्लासरूम और ग्रामर बुक्स से इतर, युवा साहित्य को अपना शिक्षक बना रहे हैं। उनका मानना है कि अंग्रेजी उपन्यास न सिर्फ शब्द सिखाते हैं, बल्कि सोचने का नजरिया, संवाद शैली और आत्मविश्वास भी विकसित करते हैं। युवाओं का कहना है कि अंग्रेजी नॉवेल पढ़ते हुए वे भाषा को रटते नहीं, बल्कि जीते हैं। किरदारों की भावनाएं, संवादों की सहजता और कहानी की गति उन्हें भाषा से जोड़ देती है। यही कारण है कि क्लासिक से लेकर समकालीन अंग्रेज़ी साहित्य तक, हर तरह की किताबों पर युवाओं की नजरें टिकी हैं।
जब स्टॉल भी कहानी सुनाने लगें
इस साल विश्व पुस्तक मेले की एक खास पहचान रही रचनात्मक और कल्पनाशील बुक स्टॉल। किताबें केवल अलमारियों में बंद नहीं रहीं, बल्कि कला और विचार के साथ प्रस्तुत की गईं। चर्चित उपन्यास ‘दीवार में एक खिड़की’ से प्रेरित एक स्टॉल में पूरी दीवार को उपन्यास के कवर की शक्ल दी गई। दीवार में बनी खिड़की के पास खड़े होकर पाठक तस्वीरें खिंचवाते दिखे, जबकि उसके पीछे उसी उपन्यास सहित कई पुस्तकें सजी थीं। लकड़ी के ढांचे से बना एक अनोखा स्टॉल, जिसके बीचों-बीच छोटा सा कमरा और उसमें सहेजी गई किताबें, लोगों को ठहरकर देखने पर मजबूर करता रहा। वहीं, एक पीले रंग के ट्रक को खास अंदाज में बुक स्टॉल में तब्दील किया गया, जिसने बच्चों से लेकर युवाओं तक सभी को आकर्षित किया। ये स्टॉल केवल किताबें बेचने का जरिया नहीं थे, बल्कि पढ़ने की संस्कृति को अनुभव में बदलते नजर आए।
कोलकाता से आईं विचार और इतिहास की दुर्लभ झलकियां
विश्व पुस्तक मेले में कोलकाता से आए सदी प्रकाशन का स्टॉल विचारशील पाठकों के लिए खास आकर्षण बना। सदी प्रकाशन के संयोजक जितेंद्र जिताशु ने बताया, कि उनके यहां प्रदर्शित किताबें गांधी के जीवन के उस जीवंत दर्शन को सामने लाती हैं, जो आज के समय में भी उतना ही प्रासंगिक है। पत्रकारिता और कोलकाता के ऐतिहासिक संबंधों पर लिखी गई पुस्तकों ने भी पाठकों की दिलचस्पी बढ़ाई। संत लालन फकीर पर आधारित रचनाएं हों या पाकिस्तान और भारत के ऐतिहासिक व वैचारिक संबंधों की पड़ताल करती किताबें सदी प्रकाशन का संग्रह उन पाठकों को आकर्षित करता दिखा, जो सतह से परे जाकर पढ़ना चाहते हैं।
भीड़ से प्रकाशक और साहित्यकार गदगद
प्रगति मैदान में चल रहे विश्व पुस्तक मेले में पाठकों की बढ़ती संख्या ने साहित्यकारों के साथ प्रकाशकों के चेहरे खिला दिए हैं। प्रभात प्रकाशन के निदेशक प्रभात कुमार बताते हैं कि सरकार के प्रवेश निःशुल्क किए जाने से भीड़ तो बढ़ी है, लेकिन ज्यादा युवा उमड़े हैं।
डिजिटल युग में कविता की नई यात्रा पर परिचर्चा
विश्व पुस्तक मेला 2026 के दौरान डिजिटल युग में कविता, पाठक, प्लेटफार्म और पहुंच परिचर्चा हुई। इसमें कवि एवं उद्यमी अर्पित मिश्रा विशेष रूप से उपस्थिति रही। कानपुर की माटी से जुड़े और वर्तमान में नोएडा निवासी अर्पित मिश्रा ने इस अवसर पर अपनी नवीन काव्य कृति भावांजलि के माध्यम से समकालीन कविता पर सार्थक संवाद प्रस्तुत किया। परिचर्चा में यह विचार प्रमुखता से सामने आया कि माध्यम चाहे डिजिटल हो जाए, किंतु कविता और पुस्तकें आज भी पाठकों की संवेदनाओं से गहराई से जुड़ी हुई हैं।
अनुवाद और बहुभाषी कहानी-पाठ पर विमर्श
साहित्य अकादमी की तरफ से प्रकाशित निर्मल वर्मा रचना-संचयन का लोकार्पण पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने किया। इस अवसर पर पूर्व राजनयिक एवं प्रख्यात लेखक अमरेंद्र खटुआ भी उपस्थित रहे। अकादमी के लेखक मंच पर ‘युवा साहिती: बहुभाषी कहानी-पाठ’ और ‘अनुवाद पर पैनल चर्चा’ हुई। कहानी-पाठ सत्र की अध्यक्षता अमरेंद्र खटुआ ने की, जिसमें एनी राय (ओड़िआ), युवराज भट्टराई (संस्कृत) और दत्तैयह अट्टम (तेलुगु) ने अपनी-अपनी कहानियां प्रस्तुत कीं। संवाद
वर्ल्ड बुक फेयर में रीडिंग इंडिया संवाद का आयोजन
नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) की ओर से वर्ल्ड बुक फेयर में रीडिंग इंडिया संवाद का आयोजन किया जाएगा। यह दो दिवसीय राष्ट्रीय संवाद 15 और 16 जनवरी को आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम पढ़ने की आदत, पुस्तकालयों और ज्ञान तक लोगों की पहुंच को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम का आयोजन शिक्षा मंत्रालय के तहत नेशनल बुक ट्रस्ट कर रहा है। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप है। संवाद
कैलाश सत्यार्थी ने करुणा गुणांक पर दिया जोर
विश्व पुस्तक मेले के पांचवें दिन नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी की उपस्थिति दर्शकों, विशेषकर बच्चों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। उन्होंने बच्चों और पाठकों से संवाद करते हुए समाज में करुणा की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला और ‘करुणा गुणांक’ की अवधारणा को रेखांकित किया। वहीं, उन्होंने अपनी आगामी पुस्तक ‘करुणा: द पावर ऑफ कंपैशन’ के संदर्भ में कहा, कि जैसे आईक्यू किसी व्यक्ति की बुद्धिमत्ता का पैमाना होता है, वैसे ही सीक्यू यह दर्शाता है कि कोई व्यक्ति दूसरों के दुख-दर्द से कितना गहराई से जुड़ता है।
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मेले में घूमते युवा पाठकों के हाथों में अंग्रेजी नॉवेल, शॉर्ट स्टोरी कलेक्शन और बायोग्राफी साफ बताती हैं कि अब भाषा सीखने का तरीका बदल रहा है। क्लासरूम और ग्रामर बुक्स से इतर, युवा साहित्य को अपना शिक्षक बना रहे हैं। उनका मानना है कि अंग्रेजी उपन्यास न सिर्फ शब्द सिखाते हैं, बल्कि सोचने का नजरिया, संवाद शैली और आत्मविश्वास भी विकसित करते हैं। युवाओं का कहना है कि अंग्रेजी नॉवेल पढ़ते हुए वे भाषा को रटते नहीं, बल्कि जीते हैं। किरदारों की भावनाएं, संवादों की सहजता और कहानी की गति उन्हें भाषा से जोड़ देती है। यही कारण है कि क्लासिक से लेकर समकालीन अंग्रेज़ी साहित्य तक, हर तरह की किताबों पर युवाओं की नजरें टिकी हैं।
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जब स्टॉल भी कहानी सुनाने लगें
इस साल विश्व पुस्तक मेले की एक खास पहचान रही रचनात्मक और कल्पनाशील बुक स्टॉल। किताबें केवल अलमारियों में बंद नहीं रहीं, बल्कि कला और विचार के साथ प्रस्तुत की गईं। चर्चित उपन्यास ‘दीवार में एक खिड़की’ से प्रेरित एक स्टॉल में पूरी दीवार को उपन्यास के कवर की शक्ल दी गई। दीवार में बनी खिड़की के पास खड़े होकर पाठक तस्वीरें खिंचवाते दिखे, जबकि उसके पीछे उसी उपन्यास सहित कई पुस्तकें सजी थीं। लकड़ी के ढांचे से बना एक अनोखा स्टॉल, जिसके बीचों-बीच छोटा सा कमरा और उसमें सहेजी गई किताबें, लोगों को ठहरकर देखने पर मजबूर करता रहा। वहीं, एक पीले रंग के ट्रक को खास अंदाज में बुक स्टॉल में तब्दील किया गया, जिसने बच्चों से लेकर युवाओं तक सभी को आकर्षित किया। ये स्टॉल केवल किताबें बेचने का जरिया नहीं थे, बल्कि पढ़ने की संस्कृति को अनुभव में बदलते नजर आए।
कोलकाता से आईं विचार और इतिहास की दुर्लभ झलकियां
विश्व पुस्तक मेले में कोलकाता से आए सदी प्रकाशन का स्टॉल विचारशील पाठकों के लिए खास आकर्षण बना। सदी प्रकाशन के संयोजक जितेंद्र जिताशु ने बताया, कि उनके यहां प्रदर्शित किताबें गांधी के जीवन के उस जीवंत दर्शन को सामने लाती हैं, जो आज के समय में भी उतना ही प्रासंगिक है। पत्रकारिता और कोलकाता के ऐतिहासिक संबंधों पर लिखी गई पुस्तकों ने भी पाठकों की दिलचस्पी बढ़ाई। संत लालन फकीर पर आधारित रचनाएं हों या पाकिस्तान और भारत के ऐतिहासिक व वैचारिक संबंधों की पड़ताल करती किताबें सदी प्रकाशन का संग्रह उन पाठकों को आकर्षित करता दिखा, जो सतह से परे जाकर पढ़ना चाहते हैं।
भीड़ से प्रकाशक और साहित्यकार गदगद
प्रगति मैदान में चल रहे विश्व पुस्तक मेले में पाठकों की बढ़ती संख्या ने साहित्यकारों के साथ प्रकाशकों के चेहरे खिला दिए हैं। प्रभात प्रकाशन के निदेशक प्रभात कुमार बताते हैं कि सरकार के प्रवेश निःशुल्क किए जाने से भीड़ तो बढ़ी है, लेकिन ज्यादा युवा उमड़े हैं।
डिजिटल युग में कविता की नई यात्रा पर परिचर्चा
विश्व पुस्तक मेला 2026 के दौरान डिजिटल युग में कविता, पाठक, प्लेटफार्म और पहुंच परिचर्चा हुई। इसमें कवि एवं उद्यमी अर्पित मिश्रा विशेष रूप से उपस्थिति रही। कानपुर की माटी से जुड़े और वर्तमान में नोएडा निवासी अर्पित मिश्रा ने इस अवसर पर अपनी नवीन काव्य कृति भावांजलि के माध्यम से समकालीन कविता पर सार्थक संवाद प्रस्तुत किया। परिचर्चा में यह विचार प्रमुखता से सामने आया कि माध्यम चाहे डिजिटल हो जाए, किंतु कविता और पुस्तकें आज भी पाठकों की संवेदनाओं से गहराई से जुड़ी हुई हैं।
अनुवाद और बहुभाषी कहानी-पाठ पर विमर्श
साहित्य अकादमी की तरफ से प्रकाशित निर्मल वर्मा रचना-संचयन का लोकार्पण पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने किया। इस अवसर पर पूर्व राजनयिक एवं प्रख्यात लेखक अमरेंद्र खटुआ भी उपस्थित रहे। अकादमी के लेखक मंच पर ‘युवा साहिती: बहुभाषी कहानी-पाठ’ और ‘अनुवाद पर पैनल चर्चा’ हुई। कहानी-पाठ सत्र की अध्यक्षता अमरेंद्र खटुआ ने की, जिसमें एनी राय (ओड़िआ), युवराज भट्टराई (संस्कृत) और दत्तैयह अट्टम (तेलुगु) ने अपनी-अपनी कहानियां प्रस्तुत कीं। संवाद
वर्ल्ड बुक फेयर में रीडिंग इंडिया संवाद का आयोजन
नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) की ओर से वर्ल्ड बुक फेयर में रीडिंग इंडिया संवाद का आयोजन किया जाएगा। यह दो दिवसीय राष्ट्रीय संवाद 15 और 16 जनवरी को आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम पढ़ने की आदत, पुस्तकालयों और ज्ञान तक लोगों की पहुंच को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम का आयोजन शिक्षा मंत्रालय के तहत नेशनल बुक ट्रस्ट कर रहा है। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप है। संवाद
कैलाश सत्यार्थी ने करुणा गुणांक पर दिया जोर
विश्व पुस्तक मेले के पांचवें दिन नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी की उपस्थिति दर्शकों, विशेषकर बच्चों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। उन्होंने बच्चों और पाठकों से संवाद करते हुए समाज में करुणा की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला और ‘करुणा गुणांक’ की अवधारणा को रेखांकित किया। वहीं, उन्होंने अपनी आगामी पुस्तक ‘करुणा: द पावर ऑफ कंपैशन’ के संदर्भ में कहा, कि जैसे आईक्यू किसी व्यक्ति की बुद्धिमत्ता का पैमाना होता है, वैसे ही सीक्यू यह दर्शाता है कि कोई व्यक्ति दूसरों के दुख-दर्द से कितना गहराई से जुड़ता है।