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Delhi NCR News: एसआईआर में सत्यापन के लिए पुराने रिकॉर्ड तलाश रहे लोग
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आरके पुरम, संगम विहार और ओखला समेत कई इलाकों में लोगों को नहीं मिल रहा 2002 की मतदाता सूची में नाम
सचिन कुमार
नई दिल्ली। राजधानी में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाता सत्यापन का काम तेजी से चल रहा है, लेकिन साल 2002 की मतदाता सूची अब हजारों लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी है। दिल्ली के कई इलाकों में ऐसे लोग हैं, जिनका नाम 2002 की मतदाता सूची में नहीं मिल रहा। वहीं, बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं, जो उस समय 18 साल की आयु पूरी कर चुके थे, लेकिन पढ़ाई, नौकरी, जानकारी के अभाव या दूसरे कारणों से मतदाता सूची में नाम दर्ज नहीं करा सके। अब सत्यापन के दौरान ऐसे लोगों को पुराने रिकॉर्ड के अभाव में परेशानी झेलनी पड़ रही है।
आरके पुरम, संगम विहार, कालकाजी, ओखला, गोविंदपुरी, मोती बाग, बदरपुर, लक्ष्मी नगर समेत अन्य इलाकों से भी इसी तरह की समस्याएं सामने आ रहीं हैं। बीएलओ घर-घर जाकर फॉर्म भरवा रहे हैं। कई जगह लोग पुराने वोटर कार्ड, राशन कार्ड और अन्य दस्तावेज निकालकर सत्यापन कराने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन 20 साल से अधिक पुराने रिकॉर्ड नहीं मिलने से कई लोगों की चिंता बढ़ गई है।
पुराने दस्तावेज जुटाना मुश्किल
संगम विहार में भी बड़ी संख्या में लोग सत्यापन के दौरान पुराने रिकॉर्ड तलाश रहे हैं। कई परिवार सालों में एक से अधिक बार घर बदल चुके हैं। ऐसे में पुराने दस्तावेज संभालकर रखना आसान नहीं रहा। स्थानीय निवासी सना ने बताया कि साल 2002 में हम यहां नहीं रहते थे। बाद में दिल्ली आए और वोटर कार्ड बनवाया। अब 2002 का रिकॉर्ड मांगने पर समझ नहीं आ रहा कि क्या करें। वहीं, अन्य मतदाता इरफान ने बताया कि हमारे माता पिता का निधन हो चुका है। पुराने कागज भी नहीं मिल रहे हैं। अब सत्यापन को लेकर चिंता बनी हुई है। सरकार को ऐसे मामलों के लिए अलग व्यवस्था करनी चाहिए। वहीं, आरके पुरम के कई सेक्टरों में बीएलओ के पहुंचने के बाद लोगों के बीच 2002 की मतदाता सूची चर्चा का विषय बनी हुई है। कई परिवारों ने बताया कि उनके पास मौजूदा वोटर आईडी और अन्य पहचान पत्र हैं, लेकिन 2002 की सूची में नाम नहीं मिलने से वे असमंजस में हैं। लोगों के अनुसार, ज्यादतर लोग बीएलो के पास सत्यापन कराने पहुंचे हैं, लेकिन पुराने दस्तावेजों की जानकारी न होने के कारण उन्हें बार बार पूछताछ करनी पड़ रही है।
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ओखला में नौकरी और पलायन बना वजह
ओखला में रहने वाले कई लोगों ने बताया कि साल 2002 के आसपास बड़ी संख्या में लोग काम के सिलसिले में दिल्ली आए थे। उस समय कई लोगों ने मतदाता सूची में नाम दर्ज नहीं कराया। अब सत्यापन के दौरान उन्हें कठिनाई हो रही है। स्थानीय निवासी शाहिद ने बताया कि उस समय हम किराये पर रहते थे। वोटर कार्ड बनवाने पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। बाद में नाम जुड़ गया, लेकिन अब पुराने रिकॉर्ड का सवाल सामने आ गया है। वहीं, स्थानीय निवासी अमन ने बताया कि आज हमारे पास सभी पहचान पत्र हैं, लेकिन 24 साल पुराने रिकॉर्ड जुटाना हर किसी के लिए आसान नहीं। चुनाव आयोग को ऐसे मामलों में स्पष्ट दिशा निर्देश जारी करने चाहिए, ताकि किसी पात्र मतदाता को केवल पुराने रिकॉर्ड के अभाव में परेशानी न उठानी पड़े।
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बीएलओ घर आए और पूरी जानकारी दी, लेकिन 2002 की सूची में नाम नहीं मिलने से परेशानी हो रही है। -मुस्कान
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मैं कई साल से वोट डाल रहा हूं, लेकिन अब सत्यापन के दौरान 2002 की सूची में नाम नहीं मिल रहा। -विक्रम
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हमारे इलाके में कई लोग 2002 के बाद यहां आकर बसे। उस समय वोटर सूची में नाम नहीं जुड़ पाया था। प्रक्रिया आसान बनानी चाहिए। -राज
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मैं नौकरी के लिए दिल्ली आया था। उस समय वोटर सूची में नाम नहीं जुड़वा सका। अब सभी पहचान पत्र हैं, लेकिन 24 साल पुराने रिकॉर्ड नहीं हैं। -मनीष
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सचिन कुमार
नई दिल्ली। राजधानी में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाता सत्यापन का काम तेजी से चल रहा है, लेकिन साल 2002 की मतदाता सूची अब हजारों लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी है। दिल्ली के कई इलाकों में ऐसे लोग हैं, जिनका नाम 2002 की मतदाता सूची में नहीं मिल रहा। वहीं, बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं, जो उस समय 18 साल की आयु पूरी कर चुके थे, लेकिन पढ़ाई, नौकरी, जानकारी के अभाव या दूसरे कारणों से मतदाता सूची में नाम दर्ज नहीं करा सके। अब सत्यापन के दौरान ऐसे लोगों को पुराने रिकॉर्ड के अभाव में परेशानी झेलनी पड़ रही है।
आरके पुरम, संगम विहार, कालकाजी, ओखला, गोविंदपुरी, मोती बाग, बदरपुर, लक्ष्मी नगर समेत अन्य इलाकों से भी इसी तरह की समस्याएं सामने आ रहीं हैं। बीएलओ घर-घर जाकर फॉर्म भरवा रहे हैं। कई जगह लोग पुराने वोटर कार्ड, राशन कार्ड और अन्य दस्तावेज निकालकर सत्यापन कराने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन 20 साल से अधिक पुराने रिकॉर्ड नहीं मिलने से कई लोगों की चिंता बढ़ गई है।
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पुराने दस्तावेज जुटाना मुश्किल
संगम विहार में भी बड़ी संख्या में लोग सत्यापन के दौरान पुराने रिकॉर्ड तलाश रहे हैं। कई परिवार सालों में एक से अधिक बार घर बदल चुके हैं। ऐसे में पुराने दस्तावेज संभालकर रखना आसान नहीं रहा। स्थानीय निवासी सना ने बताया कि साल 2002 में हम यहां नहीं रहते थे। बाद में दिल्ली आए और वोटर कार्ड बनवाया। अब 2002 का रिकॉर्ड मांगने पर समझ नहीं आ रहा कि क्या करें। वहीं, अन्य मतदाता इरफान ने बताया कि हमारे माता पिता का निधन हो चुका है। पुराने कागज भी नहीं मिल रहे हैं। अब सत्यापन को लेकर चिंता बनी हुई है। सरकार को ऐसे मामलों के लिए अलग व्यवस्था करनी चाहिए। वहीं, आरके पुरम के कई सेक्टरों में बीएलओ के पहुंचने के बाद लोगों के बीच 2002 की मतदाता सूची चर्चा का विषय बनी हुई है। कई परिवारों ने बताया कि उनके पास मौजूदा वोटर आईडी और अन्य पहचान पत्र हैं, लेकिन 2002 की सूची में नाम नहीं मिलने से वे असमंजस में हैं। लोगों के अनुसार, ज्यादतर लोग बीएलो के पास सत्यापन कराने पहुंचे हैं, लेकिन पुराने दस्तावेजों की जानकारी न होने के कारण उन्हें बार बार पूछताछ करनी पड़ रही है।
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ओखला में नौकरी और पलायन बना वजह
ओखला में रहने वाले कई लोगों ने बताया कि साल 2002 के आसपास बड़ी संख्या में लोग काम के सिलसिले में दिल्ली आए थे। उस समय कई लोगों ने मतदाता सूची में नाम दर्ज नहीं कराया। अब सत्यापन के दौरान उन्हें कठिनाई हो रही है। स्थानीय निवासी शाहिद ने बताया कि उस समय हम किराये पर रहते थे। वोटर कार्ड बनवाने पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। बाद में नाम जुड़ गया, लेकिन अब पुराने रिकॉर्ड का सवाल सामने आ गया है। वहीं, स्थानीय निवासी अमन ने बताया कि आज हमारे पास सभी पहचान पत्र हैं, लेकिन 24 साल पुराने रिकॉर्ड जुटाना हर किसी के लिए आसान नहीं। चुनाव आयोग को ऐसे मामलों में स्पष्ट दिशा निर्देश जारी करने चाहिए, ताकि किसी पात्र मतदाता को केवल पुराने रिकॉर्ड के अभाव में परेशानी न उठानी पड़े।
बीएलओ घर आए और पूरी जानकारी दी, लेकिन 2002 की सूची में नाम नहीं मिलने से परेशानी हो रही है। -मुस्कान
मैं कई साल से वोट डाल रहा हूं, लेकिन अब सत्यापन के दौरान 2002 की सूची में नाम नहीं मिल रहा। -विक्रम
हमारे इलाके में कई लोग 2002 के बाद यहां आकर बसे। उस समय वोटर सूची में नाम नहीं जुड़ पाया था। प्रक्रिया आसान बनानी चाहिए। -राज
मैं नौकरी के लिए दिल्ली आया था। उस समय वोटर सूची में नाम नहीं जुड़वा सका। अब सभी पहचान पत्र हैं, लेकिन 24 साल पुराने रिकॉर्ड नहीं हैं। -मनीष