{"_id":"6a0475e4dfb57982160c40d0","slug":"petition-to-impose-tax-on-agricultural-income-dismissed-delhi-ncr-news-c-340-1-del1011-136133-2026-05-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi NCR News: कृषि आय पर टैक्स लगाने की याचिका खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi NCR News: कृषि आय पर टैक्स लगाने की याचिका खारिज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को एक जनहित याचिका (पीआईएल) को खारिज कर दिया। इस याचिका में राष्ट्रीय राजधानी में कृषि आय पर कर लगाने के लिए दिशा-निर्देश मांगे गए थे। अदालत ने याचिका को भ्रामक बताते हुए कहा कि अदालत सरकार या विधायिका को नीति बनाने या कानून बनाने का निर्देश नहीं दे सकती।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता आकाश गोयल की याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि याचिका में मांगी गई राहत पूरी तरह से विधायिका के क्षेत्राधिकार में आती है। पीठ ने कहा, प्रार्थना खंड को देखने से स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता अदालत से विधायिका को कोई विशेष कानून बनाने के लिए मैंडमस जारी करने का अनुरोध कर रहा है। हमारी स्पष्ट राय में ऐसा मैंडमस जारी करना संभव नहीं है। यह रिट याचिका अत्यधिक भ्रामक है। याचिका में कृषि आय को दी जा रही कर-मुक्त स्थिति को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि यह छूट राजकोषीय असमानता पैदा करती है और उच्च आय वाले व्यक्ति इसका दुरुपयोग करके टैक्स से बच रहे हैं। जबकि सैलरीड कर्मचारी, व्यापारी और पेशेवर कर के दायरे में हैं, वहीं अमीर किसानों या कृषि आय दिखाने वाले लोग टैक्स से बच जाते हैं।
सुनवाई के दौरान अदालत ने बार-बार पूछा कि क्या वह सरकार को कानून बनाने का निर्देश दे सकती है। जब याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि वे केवल विचार करने का अनुरोध कर रहे हैं, तो अदालत ने प्रार्थना खंड का हवाला देते हुए कहा कि याचिका में स्पष्ट रूप से विधायन का निर्देश मांगा गया है।
Trending Videos
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को एक जनहित याचिका (पीआईएल) को खारिज कर दिया। इस याचिका में राष्ट्रीय राजधानी में कृषि आय पर कर लगाने के लिए दिशा-निर्देश मांगे गए थे। अदालत ने याचिका को भ्रामक बताते हुए कहा कि अदालत सरकार या विधायिका को नीति बनाने या कानून बनाने का निर्देश नहीं दे सकती।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता आकाश गोयल की याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि याचिका में मांगी गई राहत पूरी तरह से विधायिका के क्षेत्राधिकार में आती है। पीठ ने कहा, प्रार्थना खंड को देखने से स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता अदालत से विधायिका को कोई विशेष कानून बनाने के लिए मैंडमस जारी करने का अनुरोध कर रहा है। हमारी स्पष्ट राय में ऐसा मैंडमस जारी करना संभव नहीं है। यह रिट याचिका अत्यधिक भ्रामक है। याचिका में कृषि आय को दी जा रही कर-मुक्त स्थिति को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि यह छूट राजकोषीय असमानता पैदा करती है और उच्च आय वाले व्यक्ति इसका दुरुपयोग करके टैक्स से बच रहे हैं। जबकि सैलरीड कर्मचारी, व्यापारी और पेशेवर कर के दायरे में हैं, वहीं अमीर किसानों या कृषि आय दिखाने वाले लोग टैक्स से बच जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
सुनवाई के दौरान अदालत ने बार-बार पूछा कि क्या वह सरकार को कानून बनाने का निर्देश दे सकती है। जब याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि वे केवल विचार करने का अनुरोध कर रहे हैं, तो अदालत ने प्रार्थना खंड का हवाला देते हुए कहा कि याचिका में स्पष्ट रूप से विधायन का निर्देश मांगा गया है।