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Delhi NCR News: बड़े संस्थानों का कचरा अब निजी एजेंसियां संभालेंगी
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लैंडफिल पर बोझ घटाने के लिए एमसीडी की नई पहल, प्रदर्शन के आधार पर होगा एजेंसियों का मूल्यांकन
विनोद डबास
नई दिल्ली। एमसीडी ने राजधानी के बड़े संस्थानों, आवासीय परिसरों, मॉल, होटल, अस्पताल और अन्य बल्क वेस्ट जेनरेटर (बीडब्ल्यूजी) में निकलने वाले कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए निजी विशेषज्ञ एजेंसियों की सेवाएं लेने का फैसला किया है। निगम का कहना है कि अधिकांश बड़े संस्थानों के पास ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए न तो पर्याप्त तकनीकी विशेषज्ञता है और न ही जरूरी बुनियादी ढांचा। इस वजह से बड़ी मात्रा में कचरा लैंडफिल स्थलों तक पहुंच रहा है, जिससे उन पर लगातार दबाव बढ़ रहा है।
इसी स्थिति को देखते हुए एमसीडी ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के तहत निजी एजेंसियों को पैनल में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की है। शुरुआत में इन्हें परीक्षण अवधि के लिए काम दिया जाएगा। इस दौरान उनकी कार्यक्षमता, कचरा प्रबंधन की गुणवत्ता और प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा। संतोषजनक प्रदर्शन नहीं होने पर एजेंसी को पैनल से हटाया भी जा सकेगा।
नई व्यवस्था के तहत निजी एजेंसियां गीले कचरे की कम्पोस्टिंग और बायो-मीथेनेशन, सूखे कचरे का पृथक्करण व रीसाइक्लिंग और विशेष श्रेणी के कचरे के सुरक्षित निस्तारण व ई-कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन जैसी सेवाएं उपलब्ध कराएंगी। जरूरत पड़ने पर बागवानी से निकलने वाले कचरे का भी निस्तारण किया जाएगा।
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एमसीडी ने एजेंसियों के लिए समयबद्ध लक्ष्य तय किए हैं। पैनल में शामिल होने के बाद उन्हें निर्धारित अवधि में अधिक से अधिक बल्क वेस्ट जेनरेटर के साथ समझौते कर कचरा प्रबंधन परियोजनाएं शुरू करनी होंगी। प्रत्येक समझौते का रिकॉर्ड, वित्तीय विवरण और चार्टर्ड अकाउंटेंट से प्रमाणित दस्तावेज एमसीडी को देना होगा। साथ ही यह भी बताना होगा कि कचरे का प्रसंस्करण किस तकनीक और किस स्थान पर किया जा रहा है।
ये आते हैं बल्क वेस्ट जेनरेटर की श्रेणी में
नियमों के अनुसार 20 हजार वर्गमीटर या उससे अधिक निर्मित क्षेत्र, प्रतिदिन 40 हजार लीटर या अधिक जल खपत या 100 किलोग्राम से अधिक ठोस कचरा उत्पन्न करने वाले परिसर बल्क वेस्ट जेनरेटर की श्रेणी में आते हैं। ऐसे सभी संस्थानों के लिए वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन व्यवस्था सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा।
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विनोद डबास
नई दिल्ली। एमसीडी ने राजधानी के बड़े संस्थानों, आवासीय परिसरों, मॉल, होटल, अस्पताल और अन्य बल्क वेस्ट जेनरेटर (बीडब्ल्यूजी) में निकलने वाले कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए निजी विशेषज्ञ एजेंसियों की सेवाएं लेने का फैसला किया है। निगम का कहना है कि अधिकांश बड़े संस्थानों के पास ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए न तो पर्याप्त तकनीकी विशेषज्ञता है और न ही जरूरी बुनियादी ढांचा। इस वजह से बड़ी मात्रा में कचरा लैंडफिल स्थलों तक पहुंच रहा है, जिससे उन पर लगातार दबाव बढ़ रहा है।
इसी स्थिति को देखते हुए एमसीडी ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के तहत निजी एजेंसियों को पैनल में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की है। शुरुआत में इन्हें परीक्षण अवधि के लिए काम दिया जाएगा। इस दौरान उनकी कार्यक्षमता, कचरा प्रबंधन की गुणवत्ता और प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा। संतोषजनक प्रदर्शन नहीं होने पर एजेंसी को पैनल से हटाया भी जा सकेगा।
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नई व्यवस्था के तहत निजी एजेंसियां गीले कचरे की कम्पोस्टिंग और बायो-मीथेनेशन, सूखे कचरे का पृथक्करण व रीसाइक्लिंग और विशेष श्रेणी के कचरे के सुरक्षित निस्तारण व ई-कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन जैसी सेवाएं उपलब्ध कराएंगी। जरूरत पड़ने पर बागवानी से निकलने वाले कचरे का भी निस्तारण किया जाएगा।
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एमसीडी ने एजेंसियों के लिए समयबद्ध लक्ष्य तय किए हैं। पैनल में शामिल होने के बाद उन्हें निर्धारित अवधि में अधिक से अधिक बल्क वेस्ट जेनरेटर के साथ समझौते कर कचरा प्रबंधन परियोजनाएं शुरू करनी होंगी। प्रत्येक समझौते का रिकॉर्ड, वित्तीय विवरण और चार्टर्ड अकाउंटेंट से प्रमाणित दस्तावेज एमसीडी को देना होगा। साथ ही यह भी बताना होगा कि कचरे का प्रसंस्करण किस तकनीक और किस स्थान पर किया जा रहा है।
ये आते हैं बल्क वेस्ट जेनरेटर की श्रेणी में
नियमों के अनुसार 20 हजार वर्गमीटर या उससे अधिक निर्मित क्षेत्र, प्रतिदिन 40 हजार लीटर या अधिक जल खपत या 100 किलोग्राम से अधिक ठोस कचरा उत्पन्न करने वाले परिसर बल्क वेस्ट जेनरेटर की श्रेणी में आते हैं। ऐसे सभी संस्थानों के लिए वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन व्यवस्था सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा।