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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Questions raised again over Yamuna cleanup; several drains and sewage plants fail inspection.

Delhi NCR News: यमुना की सफाई पर फिर सवाल, कई नाले और सीवेज प्लांट जांच में फेल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 02 Aug 2026 07:11 PM IST
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जून की डीपीसीसी रिपोर्ट में कई प्रमुख नालों में बीओडी और टीएसएस तय मानकों से तीन-चार गुना अधिक मिले
यमुना विहार, घिटोरनी, मेहरौली और वसंत कुंज के कई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी मानकों पर खरे नहीं उतरे
नितिन राजपूत
नई दिल्ली। दिल्ली में यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के सरकारी प्रयासों के बीच दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की जून माह की निगरानी रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि राजधानी के कई बड़े नालों का पानी अब भी अत्यधिक प्रदूषित है और कुछ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) भी गंदे पानी का शोधन निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में यमुना में प्रदूषण का दबाव कम होने के बजाय बरकरार रहने की आशंका जताई जा रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, यमुना में गिरने वाले कई नालों में बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) और कुल अघुलनशील ठोस कण (टीएसएस) का स्तर निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक दर्ज किया गया। बीओडी पानी में मौजूद जैविक गंदगी का संकेतक है, जबकि टीएसएस पानी में ठोस अपशिष्ट और कचरे की मात्रा को दर्शाता है। पर्यावरण मानकों के अनुसार नालों के पानी में बीओडी 30 मिलीग्राम प्रति लीटर और टीएसएस 100 मिलीग्राम प्रति लीटर तक ही होना चाहिए, लेकिन जांच में कई स्थानों पर बीओडी 80 से 140 मिलीग्राम प्रति लीटर तथा टीएसएस 200 से 370 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पाया गया।
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रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कुछ नालों में निरीक्षण के दौरान पानी का बहाव नहीं मिला, जबकि हिंडन कट नाले की स्थिति अन्य नालों की तुलना में अपेक्षाकृत बेहतर रही। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक नालों से यमुना में जाने वाले प्रदूषित पानी पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होगा, तब तक नदी की सफाई के प्रयास अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाएंगे।
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डीपीसीसी ने राजधानी के विभिन्न सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की। जांच में यमुना विहार, घिटोरनी, मेहरौली और वसंत कुंज के कुछ एसटीपी निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। इन प्लांटों से निकलने वाले उपचारित पानी में बीओडी, फीकल कोलीफॉर्म, फॉस्फेट और अन्य प्रदूषक तत्व तय सीमा से अधिक पाए गए। रिपोर्ट में इन संयंत्रों के संचालन और रखरखाव में सुधार की आवश्यकता बताई गई है।
कुछ राहत की तस्वीर भी
हालांकि, रिपोर्ट में कुछ राहत देने वाली तस्वीर भी सामने आई। रोहिणी, रिठाला, ओखला, कोरोनेशन पिलर, सोनिया विहार, नांगलोई, कोंडली और पप्पनकलां स्थित एसटीपी निर्धारित पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप कार्य करते मिले। इससे स्पष्ट है कि बेहतर संचालन और नियमित निगरानी से सीवेज शोधन की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकती है। अब चुनौती यह है कि खराब प्रदर्शन करने वाले नालों और एसटीपी में जल्द सुधार कर यमुना में प्रदूषण का प्रवाह प्रभावी ढंग से रोका जाए।


प्रदूषण के 'हॉटस्पॉट' बने ये नाले
मुंगेशपुर नाला: बीओडी 130, टीएसएस 374 मिग्रा/लीटर
तुगलकाबाद नाला: बीओडी 120, टीएसएस 256 मिग्रा/लीटर
बारापुला नाला: बीओडी 115 मिग्रा/लीटर
शाहदरा नाला: बीओडी 115 मिग्रा/लीटर
आईएसबीटी, सेन नर्सिंग होम, महारानी बाग और साहिबाबाद नालों में भी प्रदूषण का स्तर चिंताजनक मिला।
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ये एसटीपी बने चिंता की वजह
मानकों पर खरे नहीं उतरे: रिपोर्ट के अनुसार, यमुना विहार, घिटोरनी, मेहरोली और वसंत कुंज के सीवेज प्लांट तय मानकों को पूरा नहीं कर पाए। वसंत कुंज के दोनों एसटीपी, यमुना विहार के एक प्लांट और घिटोरनी व मेहरोली के प्लांटों में सुधार की जरूरत बताई गई है।
मुख्य खामियां: बीओडी, फीकल कोलीफॉर्म और फॉस्फेट का स्तर तय सीमा से अधिक।
राहत की खबर: रोहिणी, रिठाला, ओखला, कोरोनेशन पिलर, सोनिया विहार, नांगलोई, कोंडली और पप्पनकलां के एसटीपी मानकों के अनुरूप संचालित मिले।
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