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रोगियों के प्रति करुणामय सेवा के संकल्प पर अडिग रहें : राष्ट्रपति

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 15 Jul 2026 06:49 PM IST
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Remain steadfast in the resolve to serve patients with compassion: President
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सौश्रुतम का किया उद्घाटन। - फोटो : AMAR UJALA
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान में 'सौश्रुतम् 2026' का किया उद्घाटन, एआई-सक्षम हाई-फील्ड एमआरआई का भी लोकार्पण
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 'सौश्रुतम् 2026' का उद्घाटन किया। आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा पर केंद्रित यह सम्मेलन सुश्रुत जयंती के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। इस मौके पर राष्ट्रपति ने युवा विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं से आचार्य सुश्रुत के दिखाए मार्ग पर चलते हुए चिकित्सा में नैतिकता और रोगियों के प्रति करुणामय सेवा के संकल्प पर अडिग रहने का आह्वान किया।
राष्ट्रपति ने संस्थान में स्थापित एआई-सक्षम तीन टेस्ला हाई-फील्ड एमआरआई मशीन का उद्घाटन किया। साथ ही राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (एनसीआईएसएम) की उस अध्ययन रिपोर्ट का विमोचन भी किया, जिसमें आयुर्वेद शिक्षा प्राप्त महिलाओं के कॅरिअर और उनके समक्ष आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण किया गया है।
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आयुर्वेद के भविष्य के लिए जैव विविधता का संरक्षण बेहद जरूरी : राष्ट्रपति
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि आयुर्वेद के भविष्य के लिए जैव विविधता का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर बल देते हुए आयुर्वेद के क्षेत्र में महिला चिकित्सकों को अधिक अवसर उपलब्ध कराने और उनके पेशेवर विकास को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद स्वास्थ्य के प्रति समग्र दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, जिसकी प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है।
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प्राचीन ज्ञान परंपराएं भारत की सबसे बड़ी शक्ति : एलजी
दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी प्राचीन ज्ञान परंपराएं हैं और आयुर्वेद उनका महत्वपूर्ण हिस्सा है। केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली है।

कई देशों के विशेषज्ञ ले रहे हिस्सा
सम्मेलन में भारत के अलावा थाईलैंड, इजराइल, ऑस्ट्रिया, ब्रिटेन, श्रीलंका, इंडोनेशिया, नेपाल और ग्रीस के विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। तीन दिनों तक आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा, रोबोटिक सर्जरी, कैंसर उपचार और अनुसंधान सहित विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श होगा। एआईआईए के निदेशक प्रो. पी.के. प्रजापति ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़ते हुए आयुर्वेद को साक्ष्य-आधारित चिकित्सा प्रणाली के रूप में और अधिक सशक्त बनाना है।
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