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Delhi NCR News: 70 मशीनों से होगी सड़कों की सफाई, 923.57 करोड़ खर्च करेगी एमसीडी
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126 प्रवेश बिंदुओं पर बैरियर मुक्त टोल वसूली व्यवस्था को भी स्थायी समिति ने दी मंजूरी, एएनपीआर तकनीक से होगी वाहनों की पहचान
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली में सड़कों से धूल कम करने और वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए एमसीडी अगले 10 वर्षों तक 70 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों से सफाई कराएगी। इस परियोजना पर करीब 923.57 करोड़ रुपये खर्च होंगे। वहीं, राजधानी के 126 प्रवेश बिंदुओं पर मौजूदा आरएफआईडी व्यवस्था को मल्टी लेन फ्री फ्लो तकनीक से अपग्रेड किया जाएगा। इससे व्यावसायिक वाहनों को टोल चुकाने के लिए बैरियर पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। स्थायी समिति की शुक्रवार को हुई बैठक में दोनों प्रमुख प्रस्तावों सहित कई अन्य प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने बताया कि सड़क सफाई परियोजना के तहत तीन कंपनियों को मशीनों की तैनाती, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। पहले पैकेज में 29 मशीनों के लिए लॉयन सर्विसेज लिमिटेड को 369.53 करोड़ रुपये, दूसरे पैकेज में 28 मशीनों के लिए जीए इंफ्रा और वीएन इंजीनियरिंग के सहसंघ को 368.83 करोड़ रुपये तथा तीसरे पैकेज में 13 मशीनों के लिए जेएस एनवायरो सर्विसेज को 185.20 करोड़ रुपये का काम देने की मंजूरी मिली है। उन्होंने कहा कि छोटी क्षमता वाली मशीनें इलेक्ट्रिक होंगी, जबकि बड़ी मशीनें इलेक्ट्रिक या सीएनजी से चल सकेंगी। इन मशीनों से सड़कों पर जमा धूल हटाई जाएगी, जिससे धूलकणों के प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी।
छह साल का होगा टोल वसूली का ठेका
समिति ने 126 पथकर संग्रहण केंद्रों पर बैरियर मुक्त टोल व्यवस्था लागू करने के लिए छह साल का ठेका देने को भी मंजूरी दी। नई व्यवस्था में रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (एएनपीआर) तकनीक से चलते वाहनों की पहचान कर पथकर और पर्यावरण प्रतिपूर्ति प्रभार (ईसीसी) वसूला जाएगा। परियोजना के लिए सालाना न्यूनतम आरक्षित मूल्य 910 करोड़ रुपये तय किया गया है।
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जल संचयन की सुविधा वाला कम से कम एक पार्क विकसित करें : सत्या शर्मा
बैठक में सत्या शर्मा ने जोन उपायुक्तों को कार्यालयों का औचक निरीक्षण करने और पार्षदों की समस्याओं का समाधान जोन स्तर पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रत्येक वार्ड में वर्षा जल संचयन की सुविधा वाला कम से कम एक पार्क विकसित करने को भी कहा। इस दौरान पक्ष और विपक्ष के पार्षदों ने सफाई, सड़कों, पार्कों और कर्मचारियों की कमी से जुड़े मुद्दे उठाए।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली में सड़कों से धूल कम करने और वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए एमसीडी अगले 10 वर्षों तक 70 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों से सफाई कराएगी। इस परियोजना पर करीब 923.57 करोड़ रुपये खर्च होंगे। वहीं, राजधानी के 126 प्रवेश बिंदुओं पर मौजूदा आरएफआईडी व्यवस्था को मल्टी लेन फ्री फ्लो तकनीक से अपग्रेड किया जाएगा। इससे व्यावसायिक वाहनों को टोल चुकाने के लिए बैरियर पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। स्थायी समिति की शुक्रवार को हुई बैठक में दोनों प्रमुख प्रस्तावों सहित कई अन्य प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने बताया कि सड़क सफाई परियोजना के तहत तीन कंपनियों को मशीनों की तैनाती, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। पहले पैकेज में 29 मशीनों के लिए लॉयन सर्विसेज लिमिटेड को 369.53 करोड़ रुपये, दूसरे पैकेज में 28 मशीनों के लिए जीए इंफ्रा और वीएन इंजीनियरिंग के सहसंघ को 368.83 करोड़ रुपये तथा तीसरे पैकेज में 13 मशीनों के लिए जेएस एनवायरो सर्विसेज को 185.20 करोड़ रुपये का काम देने की मंजूरी मिली है। उन्होंने कहा कि छोटी क्षमता वाली मशीनें इलेक्ट्रिक होंगी, जबकि बड़ी मशीनें इलेक्ट्रिक या सीएनजी से चल सकेंगी। इन मशीनों से सड़कों पर जमा धूल हटाई जाएगी, जिससे धूलकणों के प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी।
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छह साल का होगा टोल वसूली का ठेका
समिति ने 126 पथकर संग्रहण केंद्रों पर बैरियर मुक्त टोल व्यवस्था लागू करने के लिए छह साल का ठेका देने को भी मंजूरी दी। नई व्यवस्था में रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (एएनपीआर) तकनीक से चलते वाहनों की पहचान कर पथकर और पर्यावरण प्रतिपूर्ति प्रभार (ईसीसी) वसूला जाएगा। परियोजना के लिए सालाना न्यूनतम आरक्षित मूल्य 910 करोड़ रुपये तय किया गया है।
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जल संचयन की सुविधा वाला कम से कम एक पार्क विकसित करें : सत्या शर्मा
बैठक में सत्या शर्मा ने जोन उपायुक्तों को कार्यालयों का औचक निरीक्षण करने और पार्षदों की समस्याओं का समाधान जोन स्तर पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रत्येक वार्ड में वर्षा जल संचयन की सुविधा वाला कम से कम एक पार्क विकसित करने को भी कहा। इस दौरान पक्ष और विपक्ष के पार्षदों ने सफाई, सड़कों, पार्कों और कर्मचारियों की कमी से जुड़े मुद्दे उठाए।