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Delhi NCR News: राउज एवेन्यू कोर्ट ने साइबर फ्रॉड में बैंक खाते फ्रीज करने पर लगाई लगाम
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राउज एवेन्यू स्थित जिला अदालत ने साइबर फ्रॉड की जांच के दौरान बैंक खातों को मनमाने ढंग से फ्रीज करने की जांच एजेंसियों की शक्तियों पर सख्त रुख अपनाते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने सीबीआई को एक याचिकाकर्ता के फ्रीज किए कई बैंक खातों को तुरंत खोलने का आदेश दिया।
अदालत ने आदेश में कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 106 पुरानी सीआरपीसी की धारा 102 के समान है, जो केवल संपत्ति की जब्ती की अनुमति देती है। बैंक खातों को फ्रीज या अटैच करने के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि किसी भी बैंक खाते को फ्रीज करने के लिए अपराध और उस खाते में जमा राशि के बीच सीधा संबंध साबित करना अनिवार्य है। इस मामले में सीबीआई याचिकाकर्ता के खातों में जमा राशि को अपराध से सीधे जोड़ नहीं पाई। साथ ही, कुल ठगी की राशि का भी सही आकलन नहीं किया गया था। अदालत ने प्रक्रियात्मक खामियों पर भी नाराजगी जताई। खातों को फ्रीज करने की सूचना मजिस्ट्रेट को देने में करीब 10 दिन की देरी को लापरवाही बताते हुए कोर्ट ने कहा कि यह गंभीर अनियमितता है, हालांकि केवल इसी आधार पर पूरी कार्रवाई को अवैध नहीं माना जा सकता।
शर्तों के साथ खाते खोलने का आदेश : अदालत ने सीबीआई को खातों को डी-फ्रीज करने का आदेश देते हुए याचिकाकर्ता पर शर्त रखी कि उसे खातों में जमा कुल राशि के बराबर का निजी मुचलका अदालत में जमा करना होगा।
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अदालत ने आदेश में कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 106 पुरानी सीआरपीसी की धारा 102 के समान है, जो केवल संपत्ति की जब्ती की अनुमति देती है। बैंक खातों को फ्रीज या अटैच करने के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि किसी भी बैंक खाते को फ्रीज करने के लिए अपराध और उस खाते में जमा राशि के बीच सीधा संबंध साबित करना अनिवार्य है। इस मामले में सीबीआई याचिकाकर्ता के खातों में जमा राशि को अपराध से सीधे जोड़ नहीं पाई। साथ ही, कुल ठगी की राशि का भी सही आकलन नहीं किया गया था। अदालत ने प्रक्रियात्मक खामियों पर भी नाराजगी जताई। खातों को फ्रीज करने की सूचना मजिस्ट्रेट को देने में करीब 10 दिन की देरी को लापरवाही बताते हुए कोर्ट ने कहा कि यह गंभीर अनियमितता है, हालांकि केवल इसी आधार पर पूरी कार्रवाई को अवैध नहीं माना जा सकता।
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शर्तों के साथ खाते खोलने का आदेश : अदालत ने सीबीआई को खातों को डी-फ्रीज करने का आदेश देते हुए याचिकाकर्ता पर शर्त रखी कि उसे खातों में जमा कुल राशि के बराबर का निजी मुचलका अदालत में जमा करना होगा।