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Spy Network: सरहद पार बैठे आईएसआई अधिकारी संवेदनशील मूवमेंट देखते थे लाइव, बीकेआई से गठजोड़ का भी खुलासा
पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 11 Apr 2026 07:07 AM IST
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सार
पहले आईएसआई के लिए जासूसी करने वाले लोग संवेदनशील स्थालों की फोटो और वीडियो अपने मोबाइल पर लेते थे। बाद में इन्हें सरहद पार अपने आकाओं के पास भिजवाते थे।
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विस्तार
पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और बीकेआई ने भारत में जासूसी का नया तरीका अपनाया। पहले आईएसआई के लिए जासूसी करने वाले लोग संवेदनशील स्थालों की फोटो और वीडियो अपने मोबाइल पर लेते थे।
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बाद में इन्हें सरहद पार अपने आकाओं के पास भिजवाते थे लेकिन इस बार आईएसआई ने भारत के संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए, जिनकी फुटेज पाकिस्तान में बैठकर लाइव देख रहे थे। स्पेशल सेल के एक अधिकारी ने बताया कि पीएमओ ने देश भर में सभी जगह लगे सीसीटीवी कैमरों का ऑडिट करने का आदेश दिया है।
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जासूसी के लिए सिम फर्जी आईडी या किसी गरीब को पैसे का लालच देकर लिए जाते थे। शुरुआती जांच में पता चला कि आईएसआई आकाओं ने अपने मॉड्यूल को सीसीटीवी कहां लगाने है यह निर्देश भी दिया था।
स्पेशल सेल के एक अधिकारी ने बताया कि सीसीटीवी कैमरों के जरिये जासूसी फरवरी के शुरूआत में ही हो गई थी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इन कैमरों में रिकार्डिंग नहीं होती थी। लाइव फीड ही पाकिस्तान जाती थी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पाकिस्तानी हैंडलर गिरफ्तार आरोपी को एक सीसीटीवी लगाने के लिए 15 से 20 हजार रुपये देते थे।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन जासूसी करने वाले मॉड्यूल का पदार्फाश होने से आईएसआई और बीकेआई का गठजोड़ फिर उजागर हुआ है। स्पेशल सेल के एक अधिकारी ने बताया कि पीएमओ के आदेश पर पता लगाया जा रहा है कि कहीं और सीसीटीवी तो नहीं लगे हैं जिनके जरिये पाकिस्तान नजर रख रहा है। पुलिस का कहना है कि इस आतंकी माॅड्यूल का हाल ही में गाजियाबाद में पकड़े गए आतंकियों से सीधा कनेक्शन नहीं है। हालांकि दोनाें आतंकी मॉड्यूल के पाकिस्तान में बैठे हैंडलर एक ही हैं।
हैंडलर से ऐसे जुड़े
12वीं तक पढ़ाई करने वाला गुरजीत सिंहचचेरे भाई के जरिये पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स से संपर्क साधा। उसका चचेरा भाई सीमा पार से नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल था। पाकिस्तान के हैंडलर के निर्देशों के मुताबिक उसने आर्मी कैंट का मुआयना किया और उसकी तस्वीरें और वीडियो पाकिस्तान के हैंडलर के साथ शेयर किए।
उसे अपने पाकिस्तानी हैंडलर के लिए और लोगों को भर्ती करने का काम भी सौंपा गया था। रोजी-रोटी कमाने के लिए ड्राइवर का काम करने वाला आरोपी रिंपलदीप सिंह स्थानीय साथियों और हैंडलर के बीच एक अहम कड़ी का काम किया। उसने आर्मी व बीएसएफ कैंपों की तस्वीरों/वीडियो समेत कई संवेदनशील जानकारियाँ इकट्ठा कीं।
तस्करी में की मदद
हरप्रीत सिंह उर्फ हैप्पी ने हैंडलर के निर्देशों पर काम करते हुए अंतरराष्ट्रीय सीमा पार से नशीले पदार्थों की तस्करी में मदद की, तस्करी से मिले पैसे को हैंडलर के एजेंटों तक पहुंचाया, संवेदनशील जगहों का मुआयना किया। आर्मी व अर्धसैनिक बलों की आवाजाही के बारे में जानकारी दी।
सिम कार्ड का इंतज़ाम किया व सोलर से चलने वाले सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना बनाई। सलविंदर सिंह उर्फ कालू अभी डीजे ऑपरेटर के तौर पर काम कर रहा था। उसने रिंपलदीप सिंह के साथ मिलकर संवेदनशील जगहों का मुआयना किया और सेना के ठिकानों की तस्वीरें और वीडियो शेयर करने में मदद की।
सभी आरोपियों को बांटा था काम
अविवाहित और बीसीए डिग्री होल्डर मनप्रीत सिंह एक एन्क्रिप्टेड ऐप के जरिये पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के संपर्क में आया। उसने हथियारों को इकट्ठा किया और पहुंचाया। सिम कार्डों का इंतजाम किया। पाकिस्तान के हैंडलर्स के निर्देशों पर पैसे लिए और भेजे।
10वीं पास अनमोल वॉलपेपर लगाने का काम करता है। उसने अपने साथी साहिल की मदद से 9 जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए। 12वीं पास साहिल वॉलपेपर लगाने का काम करता है। उसने कैमरे लगाने में अनमोल की मदद की। न्यूजीलैंड से बिजनेस में मास्टर डिग्री हासिल करने वाला अतुल राठी एक एन्क्रिप्टेड ऐप के जरिये हैंडलर्स के संपर्क में आया। उसने मनप्रीत से एक 4 विदेशी पिस्तौलें लीं। बिज़नेस में मास्टर डिग्री होल्डर रोहित पंजाब से हथियार लेने के लिए अतुल राठी के साथ गया था। ग्रेजुएट अजय ने रोहित से एक देसी पिस्तौल ली।