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Delhi NCR News: यमुना की हद तय करेगी 25 साल की बाढ़, नहीं होगा कोई निर्माण
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-मास्टर प्लान-2047 ने यमुना के बाढ़ क्षेत्र की सीमा 2011 की बाढ़ के आधार पर होगी तय, ओ जोन में सक्रिय बाढ़ क्षेत्र व रिवर फ्रंट शामिल
-- सक्रिय बाढ़ क्षेत्र में सामाजिक-सांस्कृतिक और मनोरंजन से जुड़ी सुविधाओं की रहेगी इजाजत
संतोष कुमार
नई दिल्ली।दिल्ली में यमुना के सक्रिय फ्लड प्लेन की सीमा 25 साल में आई सबसे बड़ी बाढ़ के आधार पर तय की जाएगी। इसके लिए जियोस्पेशियल दिल्ली लिमिटेड (जीएसडीएल) ने 2011 में यमुना के 205.72 मीटर के अधिकतम जलस्तर को आधार बनाकर फ्लड प्लेन का नक्शा तैयार किया है। जलस्तर को राउंड ऑफ कर 206 मीटर माना गया है। जीएसडीएल ने 20 शीट में तैयार नक्शे भौतिक सत्यापन के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को भेजे हैं। डीडीए अब मौके पर इसका सीमांकन करेगा।
मास्टर प्लान-2047 में सक्रिय फ्लड प्लेन को निर्माण निषिद्ध क्षेत्र माना गया है। हालांकि इसमें आवश्यक सरकारी सुविधाओं, सामाजिक-सांस्कृतिक और मनोरंजन सुविधाओं, सार्वजनिक बुनियादी ढांचे तथा नदी संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों की अनुमति का प्रावधान है। इसके लिए सक्षम प्राधिकरण और वैधानिक निकाय से एनओसी लेना जरूरी होगा। विशेषज्ञों की मुख्य आपत्ति इसी प्रावधान को लेकर है।
मास्टर प्लान में फ्लड प्लेन निर्धारण की प्रक्रिया नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के 13 जनवरी 2015 के आदेश के अनुरूप बताई गई है। मनोज मिश्रा बनाम भारत संघ मामले में एनजीटी ने 25 साल में आने वाली अधिकतम बाढ़ के आधार पर नदी के बाढ़ क्षेत्र की पहचान करने की बात कही थी। इसका उद्देश्य यमुना की पारिस्थितिकी, जैव विविधता और प्राकृतिक प्रवाह को संरक्षित करना था। मास्टर प्लान में यमुना के फ्लड प्लेन और रिवर फ्रंट को ओ-जोन में शामिल किया गया है।
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आईआईटी दिल्ली के आकलन के अनुसार 2011 की बाढ़ 25 साल में एक बार आने वाली बाढ़ थी। उस समय ताजेवाला से 6.41 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद दिल्ली में यमुना का जलस्तर 205.72 मीटर तक पहुंचा था। इसी रिकॉर्ड के आधार पर फ्लड प्लेन की सीमा निर्धारित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
यमुना पर मास्टर प्लान एक नजर में
सक्रिय बाढ़ क्षेत्र निर्माण मुक्त क्षेत्र होगा और इसमें प्रतिबंधित विकास की ही अनुमति होगी।
वजीराबाद और ओखला बैराज के बीच करीब 1,700 हेक्टेयर क्षेत्र में 13 परियोजनाओं के जरिए नमभूमि, प्राकृतिक गड्ढों, बाढ़ मैदान के पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता की बहाली की जा रही है।
मौजूदा नमभूमियों की गाद निकालकर उन्हें बाढ़ के पानी के संग्रहण के लिए पुनर्जीवित किया जाएगा।
बाढ़ मैदान के जंगलों और घास के मैदानों को विकसित किया जाएगा।
जहां संभव होगा, नदी किनारे ग्रीन बफर जोन बनाए रखा जाएगा।
बाढ़ मैदान के साथ 52 किलोमीटर लंबा साइकिल ट्रैक विकसित किया जा रहा है।
तटबंधों के साथ 75 से 100 मीटर चौड़ा सार्वजनिक ग्रीनवे विकसित किया जा सकता है।
22 नालों के सीवेज को उपचारित कर नदी में प्रदूषण कम करने का प्रावधान है। इसके लिए सीवेज ट्रीटमेंट, निर्मित आर्द्रभूमि और जैव-उपचार का इस्तेमाल किया जाएगा।
घाटों का उपयोग सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए नियंत्रित और स्थायी तरीके से किया जाएगा।
त्योहारों के दौरान पूजा सामग्री के निपटान और मूर्ति विसर्जन जैसी गतिविधियों को विनियमित किया जाएगा।
मलबा और कचरा डालने समेत अवैध गतिविधियों पर निगरानी के लिए मानव सुरक्षा व्यवस्था और सीसीटीवी लगाए जाएंगे।
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विशेषज्ञों ने जताया एतराज
यमुना की जमीन यमुना की है। फ्लड प्लेन में किसी तरह की गतिविधि की इजाजत नहीं दी जा सकती। इसका बंटवारा भी नहीं होना चाहिए। मास्टर प्लान में सरकारी उपयोगिताओं, सामाजिक-सांस्कृतिक और मनोरंजक सुविधाओं तथा सार्वजनिक ढांचे के विकास की अनुमति से फ्लड प्लेन के संरक्षण पर ही सवाल खड़ा होगा। ऐसा हुआ तो मास्टर प्लान यमुना की बर्बादी का दस्तावेज बन जाएगा। यह एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के नदी संरक्षण से जुड़े फैसलों के खिलाफ होगा। फ्लड प्लेन के साथ रिवर फ्रंट को भी ओ-जोन में शामिल करने से आशंका बढ़ती है कि सरकारी एजेंसियां अपनी सुविधा के हिसाब से क्षेत्र तय करेंगी। 2021 के मास्टर प्लान के विपरीत इसमें बाढ़ क्षेत्र का क्षेत्रफल स्पष्ट नहीं किया गया है।
-राजेंद्र सिंह, जल पुरुष के नाम से मशहूर तरुण भारत संघ के संस्थापक
फ्लड प्लेन का भौतिक सत्यापन होना चाहिए। इसके बिना नदी की हद तय नहीं की जा सकती और अतिक्रमण जैसी गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। फ्लड प्लेन तय करने का आधार 100 साल की बाढ़ होना चाहिए। 25 साल की बाढ़ के आधार पर पर्याप्त स्पष्टता नहीं आएगी। पिछले मास्टर प्लान में बाढ़ क्षेत्र करीब 9,700 हेक्टेयर बताया गया था, जबकि मास्टर प्लान-2047 में इसे तय करने की जिम्मेदारी सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग पर डाल दी गई है। ओ-जोन के विभाजन की बात भी हो रही है। ऐसा हुआ तो यमुना शुद्धीकरण का मकसद ही संदिग्ध हो जाएगा।
-भीम सिंह रावत, संयोजक, साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम, रिवर एंड पीपुल (संदर्प)
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संतोष कुमार
नई दिल्ली।दिल्ली में यमुना के सक्रिय फ्लड प्लेन की सीमा 25 साल में आई सबसे बड़ी बाढ़ के आधार पर तय की जाएगी। इसके लिए जियोस्पेशियल दिल्ली लिमिटेड (जीएसडीएल) ने 2011 में यमुना के 205.72 मीटर के अधिकतम जलस्तर को आधार बनाकर फ्लड प्लेन का नक्शा तैयार किया है। जलस्तर को राउंड ऑफ कर 206 मीटर माना गया है। जीएसडीएल ने 20 शीट में तैयार नक्शे भौतिक सत्यापन के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को भेजे हैं। डीडीए अब मौके पर इसका सीमांकन करेगा।
मास्टर प्लान-2047 में सक्रिय फ्लड प्लेन को निर्माण निषिद्ध क्षेत्र माना गया है। हालांकि इसमें आवश्यक सरकारी सुविधाओं, सामाजिक-सांस्कृतिक और मनोरंजन सुविधाओं, सार्वजनिक बुनियादी ढांचे तथा नदी संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों की अनुमति का प्रावधान है। इसके लिए सक्षम प्राधिकरण और वैधानिक निकाय से एनओसी लेना जरूरी होगा। विशेषज्ञों की मुख्य आपत्ति इसी प्रावधान को लेकर है।
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मास्टर प्लान में फ्लड प्लेन निर्धारण की प्रक्रिया नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के 13 जनवरी 2015 के आदेश के अनुरूप बताई गई है। मनोज मिश्रा बनाम भारत संघ मामले में एनजीटी ने 25 साल में आने वाली अधिकतम बाढ़ के आधार पर नदी के बाढ़ क्षेत्र की पहचान करने की बात कही थी। इसका उद्देश्य यमुना की पारिस्थितिकी, जैव विविधता और प्राकृतिक प्रवाह को संरक्षित करना था। मास्टर प्लान में यमुना के फ्लड प्लेन और रिवर फ्रंट को ओ-जोन में शामिल किया गया है।
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आईआईटी दिल्ली के आकलन के अनुसार 2011 की बाढ़ 25 साल में एक बार आने वाली बाढ़ थी। उस समय ताजेवाला से 6.41 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद दिल्ली में यमुना का जलस्तर 205.72 मीटर तक पहुंचा था। इसी रिकॉर्ड के आधार पर फ्लड प्लेन की सीमा निर्धारित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
यमुना पर मास्टर प्लान एक नजर में
सक्रिय बाढ़ क्षेत्र निर्माण मुक्त क्षेत्र होगा और इसमें प्रतिबंधित विकास की ही अनुमति होगी।
वजीराबाद और ओखला बैराज के बीच करीब 1,700 हेक्टेयर क्षेत्र में 13 परियोजनाओं के जरिए नमभूमि, प्राकृतिक गड्ढों, बाढ़ मैदान के पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता की बहाली की जा रही है।
मौजूदा नमभूमियों की गाद निकालकर उन्हें बाढ़ के पानी के संग्रहण के लिए पुनर्जीवित किया जाएगा।
बाढ़ मैदान के जंगलों और घास के मैदानों को विकसित किया जाएगा।
जहां संभव होगा, नदी किनारे ग्रीन बफर जोन बनाए रखा जाएगा।
बाढ़ मैदान के साथ 52 किलोमीटर लंबा साइकिल ट्रैक विकसित किया जा रहा है।
तटबंधों के साथ 75 से 100 मीटर चौड़ा सार्वजनिक ग्रीनवे विकसित किया जा सकता है।
22 नालों के सीवेज को उपचारित कर नदी में प्रदूषण कम करने का प्रावधान है। इसके लिए सीवेज ट्रीटमेंट, निर्मित आर्द्रभूमि और जैव-उपचार का इस्तेमाल किया जाएगा।
घाटों का उपयोग सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए नियंत्रित और स्थायी तरीके से किया जाएगा।
त्योहारों के दौरान पूजा सामग्री के निपटान और मूर्ति विसर्जन जैसी गतिविधियों को विनियमित किया जाएगा।
मलबा और कचरा डालने समेत अवैध गतिविधियों पर निगरानी के लिए मानव सुरक्षा व्यवस्था और सीसीटीवी लगाए जाएंगे।
विशेषज्ञों ने जताया एतराज
यमुना की जमीन यमुना की है। फ्लड प्लेन में किसी तरह की गतिविधि की इजाजत नहीं दी जा सकती। इसका बंटवारा भी नहीं होना चाहिए। मास्टर प्लान में सरकारी उपयोगिताओं, सामाजिक-सांस्कृतिक और मनोरंजक सुविधाओं तथा सार्वजनिक ढांचे के विकास की अनुमति से फ्लड प्लेन के संरक्षण पर ही सवाल खड़ा होगा। ऐसा हुआ तो मास्टर प्लान यमुना की बर्बादी का दस्तावेज बन जाएगा। यह एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के नदी संरक्षण से जुड़े फैसलों के खिलाफ होगा। फ्लड प्लेन के साथ रिवर फ्रंट को भी ओ-जोन में शामिल करने से आशंका बढ़ती है कि सरकारी एजेंसियां अपनी सुविधा के हिसाब से क्षेत्र तय करेंगी। 2021 के मास्टर प्लान के विपरीत इसमें बाढ़ क्षेत्र का क्षेत्रफल स्पष्ट नहीं किया गया है।
-राजेंद्र सिंह, जल पुरुष के नाम से मशहूर तरुण भारत संघ के संस्थापक
फ्लड प्लेन का भौतिक सत्यापन होना चाहिए। इसके बिना नदी की हद तय नहीं की जा सकती और अतिक्रमण जैसी गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। फ्लड प्लेन तय करने का आधार 100 साल की बाढ़ होना चाहिए। 25 साल की बाढ़ के आधार पर पर्याप्त स्पष्टता नहीं आएगी। पिछले मास्टर प्लान में बाढ़ क्षेत्र करीब 9,700 हेक्टेयर बताया गया था, जबकि मास्टर प्लान-2047 में इसे तय करने की जिम्मेदारी सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग पर डाल दी गई है। ओ-जोन के विभाजन की बात भी हो रही है। ऐसा हुआ तो यमुना शुद्धीकरण का मकसद ही संदिग्ध हो जाएगा।
-भीम सिंह रावत, संयोजक, साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम, रिवर एंड पीपुल (संदर्प)