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Delhi NCR News: अतिरिक्त न्यायालयों के निर्माण से अधिक मामलों की सुनवाई होगी संभव
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भाग- दो
फोटो -
टावर ऑफ जस्टिस के लोकार्पण के मौके पर बोले सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। टावर ऑफ जस्टिस के लोकार्पण के मौके पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि अतिरिक्त न्यायालयों के निर्माण से अधिक मामलों की सुनवाई संभव होगी। लंबित मामलों के निस्तारण में गति आएगी और विशेष रूप से कॉमर्शियल डिस्प्यूट तथा नेगोशियबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट से जुड़े मामलों के लिए अधिक न्यायिक क्षमता उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि हमारी प्राथमिकता सदैव ऐसी न्याय व्यवस्था का निर्माण होनी चाहिए जो दक्ष भी हो और निष्पक्ष भी। न्याय में गति आवश्यक है, परन्तु वह कभी भी संवैधानिक मूल्यों की कीमत पर प्राप्त नहीं की जा सकती। इस परिसर में आधुनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग तथा सुव्यवस्थित ज्यूडिशियल मालखाना जैसी सुविधाएं भी विकसित की गई हैं। इस परियोजना की एक अन्य महत्त्वपूर्ण विशेषता प्रस्तावित इंटरनेशनल आर्बिटेशन सेंटर है जो उच्च न्यायालय के संरक्षण में संचालित होगा।
उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य ऐसी न्यायपालिका का निर्माण है जो आधुनिक हो, किन्तु मानवीय भी हो, तकनीकी रूप से उन्नत हो, किन्तु संविधान के मूल्यों में दृढ़ता से निहित भी और प्रत्येक वाद के पीछे छिपे मानवीय जीवन को समझने वाली संवेदनशील संस्था भी बनी रहे। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य मामलों का शीघ्र निस्तारण करना तो है ही उसके साथ प्रयास यह भी होना चाहिए कि कोई भी नागरिक आर्थिक, सामाजिक अथवा प्रक्रियागत कठिनाइयों के कारण स्वयं को न्याय से वंचित न महसूस करे। उन्होंने कहा कि टावर ऑफ जस्टिस केवल एक भव्य इमारत न रहे, बल्कि प्रत्येक नागरिक के लिए निष्पक्ष, प्रभावी और संवेदनशील न्याय का प्रतीक बनेगा।
संविधान की मर्यादा का केंद्र है टॉवर ऑफ जस्टिस : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि गुरुग्राम में निर्मित अत्याधुनिक टावर ऑफ जस्टिस न्यायिक परिसर संविधान की मर्यादा, न्यायपालिका की गरिमा और नागरिकों के न्याय पर अटूट विश्वास का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए आर्थिक प्रगति के साथ-साथ त्वरित, सुलभ एवं पारदर्शी न्याय व्यवस्था भी उतनी ही आवश्यक है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरुग्राम आज ज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार, स्टार्टअप और वैश्विक निवेश का प्रमुख केंद्र बन चुका है। ऐसे शहर में आधुनिक न्यायिक परिसर की स्थापना न्याय व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाएगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में जिस भवन की आधारशिला रखी गई थी, उसका लोकार्पण आज भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के कर कमलों से होना एक प्रेरणादायी एवं ऐतिहासिक संयोग है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के साथ-साथ ईज ऑफ जस्टिस को भी समान महत्व देना होगा।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि गुरु द्रोणाचार्य और माता शीतला देवी की पावन भूमि पर स्थापित यह न्यायिक परिसर आने वाले वर्षों में न्याय, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जनविश्वास को और अधिक सुदृढ़ करेगा। उन्होंने टॉवर ऑफ जस्टिस का जिक्र करते हुए कहा कि दो टावरों में विकसित यह परिसर उत्तर भारत के सबसे बड़े न्यायिक परिसरों में शामिल है। पुराने परिसर की 45 अदालतों की तुलना में यहां 55 आधुनिक अदालत कक्ष स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त परिसर में बैंक, डाकघर, बार लाइब्रेरी, मध्यस्थता केंद्र तथा अन्य आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे न्यायिक कार्यप्रणाली अधिक दक्ष, प्रभावी एवं जनहितकारी बनेगी।
आधुनिक न्यायिक अधोसंरचना से लोगों का न्याय पर विश्वास होगा और मजबूत : मनोहर लाल
केंद्रीय ऊर्जा, आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि टावर ऑफ जस्टिस का उद्घाटन केवल एक नए भवन का शुभारंभ नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था के प्रति आमजन के विश्वास को और सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि न्यायालय में आने वाला प्रत्येक व्यक्ति अपने साथ न्याय की उम्मीद लेकर आता है। ऐसे में न्यायालय का वातावरण, वहां उपलब्ध सुविधाएं और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति सकारात्मक अनुभव नागरिकों के मन में विश्वास पैदा करते हैं। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम जैसे तेजी से विकसित हो रहे जिले में बढ़ते मुकदमों को देखते हुए आधुनिक सुविधाओं से युक्त विशाल न्यायिक परिसर की आवश्यकता थी। इस परिसर में न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं और वादकारियों के लिए उत्कृष्ट व्यवस्थाएं की गई हैं, जो न्यायिक प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाएंगी।
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टावर ऑफ जस्टिस के लोकार्पण के मौके पर बोले सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। टावर ऑफ जस्टिस के लोकार्पण के मौके पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि अतिरिक्त न्यायालयों के निर्माण से अधिक मामलों की सुनवाई संभव होगी। लंबित मामलों के निस्तारण में गति आएगी और विशेष रूप से कॉमर्शियल डिस्प्यूट तथा नेगोशियबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट से जुड़े मामलों के लिए अधिक न्यायिक क्षमता उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि हमारी प्राथमिकता सदैव ऐसी न्याय व्यवस्था का निर्माण होनी चाहिए जो दक्ष भी हो और निष्पक्ष भी। न्याय में गति आवश्यक है, परन्तु वह कभी भी संवैधानिक मूल्यों की कीमत पर प्राप्त नहीं की जा सकती। इस परिसर में आधुनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग तथा सुव्यवस्थित ज्यूडिशियल मालखाना जैसी सुविधाएं भी विकसित की गई हैं। इस परियोजना की एक अन्य महत्त्वपूर्ण विशेषता प्रस्तावित इंटरनेशनल आर्बिटेशन सेंटर है जो उच्च न्यायालय के संरक्षण में संचालित होगा।
उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य ऐसी न्यायपालिका का निर्माण है जो आधुनिक हो, किन्तु मानवीय भी हो, तकनीकी रूप से उन्नत हो, किन्तु संविधान के मूल्यों में दृढ़ता से निहित भी और प्रत्येक वाद के पीछे छिपे मानवीय जीवन को समझने वाली संवेदनशील संस्था भी बनी रहे। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य मामलों का शीघ्र निस्तारण करना तो है ही उसके साथ प्रयास यह भी होना चाहिए कि कोई भी नागरिक आर्थिक, सामाजिक अथवा प्रक्रियागत कठिनाइयों के कारण स्वयं को न्याय से वंचित न महसूस करे। उन्होंने कहा कि टावर ऑफ जस्टिस केवल एक भव्य इमारत न रहे, बल्कि प्रत्येक नागरिक के लिए निष्पक्ष, प्रभावी और संवेदनशील न्याय का प्रतीक बनेगा।
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संविधान की मर्यादा का केंद्र है टॉवर ऑफ जस्टिस : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि गुरुग्राम में निर्मित अत्याधुनिक टावर ऑफ जस्टिस न्यायिक परिसर संविधान की मर्यादा, न्यायपालिका की गरिमा और नागरिकों के न्याय पर अटूट विश्वास का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए आर्थिक प्रगति के साथ-साथ त्वरित, सुलभ एवं पारदर्शी न्याय व्यवस्था भी उतनी ही आवश्यक है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरुग्राम आज ज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार, स्टार्टअप और वैश्विक निवेश का प्रमुख केंद्र बन चुका है। ऐसे शहर में आधुनिक न्यायिक परिसर की स्थापना न्याय व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाएगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में जिस भवन की आधारशिला रखी गई थी, उसका लोकार्पण आज भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के कर कमलों से होना एक प्रेरणादायी एवं ऐतिहासिक संयोग है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के साथ-साथ ईज ऑफ जस्टिस को भी समान महत्व देना होगा।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि गुरु द्रोणाचार्य और माता शीतला देवी की पावन भूमि पर स्थापित यह न्यायिक परिसर आने वाले वर्षों में न्याय, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जनविश्वास को और अधिक सुदृढ़ करेगा। उन्होंने टॉवर ऑफ जस्टिस का जिक्र करते हुए कहा कि दो टावरों में विकसित यह परिसर उत्तर भारत के सबसे बड़े न्यायिक परिसरों में शामिल है। पुराने परिसर की 45 अदालतों की तुलना में यहां 55 आधुनिक अदालत कक्ष स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त परिसर में बैंक, डाकघर, बार लाइब्रेरी, मध्यस्थता केंद्र तथा अन्य आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे न्यायिक कार्यप्रणाली अधिक दक्ष, प्रभावी एवं जनहितकारी बनेगी।
आधुनिक न्यायिक अधोसंरचना से लोगों का न्याय पर विश्वास होगा और मजबूत : मनोहर लाल
केंद्रीय ऊर्जा, आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि टावर ऑफ जस्टिस का उद्घाटन केवल एक नए भवन का शुभारंभ नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था के प्रति आमजन के विश्वास को और सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि न्यायालय में आने वाला प्रत्येक व्यक्ति अपने साथ न्याय की उम्मीद लेकर आता है। ऐसे में न्यायालय का वातावरण, वहां उपलब्ध सुविधाएं और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति सकारात्मक अनुभव नागरिकों के मन में विश्वास पैदा करते हैं। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम जैसे तेजी से विकसित हो रहे जिले में बढ़ते मुकदमों को देखते हुए आधुनिक सुविधाओं से युक्त विशाल न्यायिक परिसर की आवश्यकता थी। इस परिसर में न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं और वादकारियों के लिए उत्कृष्ट व्यवस्थाएं की गई हैं, जो न्यायिक प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाएंगी।