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Delhi NCR News: दिल्ली हाईकोर्ट ने थानों में महिला शौचालय व सैनेटरी पैड वेंडिंग मशीन अनिवार्य की
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सभी थानों का छह सप्ताह में होगा सर्वेक्षण, अनुपालन पर 27 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को दिल्ली के सभी पुलिस थानों में महिला कर्मियों के लिए महिला शौचालय व सैनेटरी पैड वेंडिंग मशीन उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को सभी थानों का सर्वेक्षण कराने व छह सप्ताह में जिन थानों में ये सुविधाएं नहीं हैं, वहां बनवाने के आदेश दिए। अदालत ने कहा कि सर्वेक्षण के आधार पर हर थाने में महिला कर्मियों के लिए सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन व शौचालय उपलब्ध कराने के कदम उठाए जाएं। पुलिस अगली तिथि को एक शपथपत्र दाखिल करे, जिसमें अनुपालन के लिए उठाए गए कदमों का विवरण होगा। अगली सुनवाई 27 सितंबर को होगी।
यह आदेश एनजीओ जस्टिस फॉर राइट्स फाउंडेशन की याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया गया। याचिका में आरटीआई आंकड़ों के हवाले से कहा गया कि अधिकांश थानों में महिला कर्मियों को बुनियादी मासिक धर्म स्वच्छता सुविधाओं व साफ शौचालयों के बिना ड्यूटी करनी पड़ती है, जो संविधान के अनुच्छेद 14, 15 व 21 का उल्लंघन है। याचिका में मुंबई पुलिस की स्मार्ट मैत्रिण परियोजना व सीआरपीएफ की सुविधाओं का भी उल्लेख किया गया।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को दिल्ली के सभी पुलिस थानों में महिला कर्मियों के लिए महिला शौचालय व सैनेटरी पैड वेंडिंग मशीन उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को सभी थानों का सर्वेक्षण कराने व छह सप्ताह में जिन थानों में ये सुविधाएं नहीं हैं, वहां बनवाने के आदेश दिए। अदालत ने कहा कि सर्वेक्षण के आधार पर हर थाने में महिला कर्मियों के लिए सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन व शौचालय उपलब्ध कराने के कदम उठाए जाएं। पुलिस अगली तिथि को एक शपथपत्र दाखिल करे, जिसमें अनुपालन के लिए उठाए गए कदमों का विवरण होगा। अगली सुनवाई 27 सितंबर को होगी।
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यह आदेश एनजीओ जस्टिस फॉर राइट्स फाउंडेशन की याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया गया। याचिका में आरटीआई आंकड़ों के हवाले से कहा गया कि अधिकांश थानों में महिला कर्मियों को बुनियादी मासिक धर्म स्वच्छता सुविधाओं व साफ शौचालयों के बिना ड्यूटी करनी पड़ती है, जो संविधान के अनुच्छेद 14, 15 व 21 का उल्लंघन है। याचिका में मुंबई पुलिस की स्मार्ट मैत्रिण परियोजना व सीआरपीएफ की सुविधाओं का भी उल्लेख किया गया।
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