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Delhi NCR News: संपत्ति धोखाधड़ी मामले में तीन आरोपी सबूतों के अभाव में बरी
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अदालत में सुनवाई के दौरान मामला साक्ष्यों के अभाव में कमजोर पड़ गया
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
साकेत कोर्ट ने करीब एक दशक पुराने संपत्ति से जुड़े कथित करोड़ों रुपये के धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में तीन आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस सबूत पेश करने में विफल रहा। इस मामले में एचएस थापर, विकास थापर और मनीष थापर पर आरोप था कि उन्होंने मालवीय नगर स्थित एक संपत्ति को बिना किसी बकाया या बंधक के होने का झांसा देकर बेचा। आरोपों के अनुसार, यह संपत्ति पहले सुरेंद्र सिंह को बेची गई और बाद में वही संपत्ति शिकायतकर्ता सुकृत बजाज तक पहुंची। बाद में यह सामने आया कि संपत्ति पहले से बैंक के पास गिरवी रखी हुई थी, जिसके कारण खरीदार को बैंक का बकाया चुकाना पड़ा।
हालांकि, अदालत में सुनवाई के दौरान मामला साक्ष्यों के अभाव में कमजोर पड़ गया। मुख्य गवाह सुरेंद्र सिंह की मृत्यु हो जाने के कारण अभियोजन पक्ष का केस काफी प्रभावित हुआ। अदालत ने कहा कि वही एकमात्र व्यक्ति थे जो यह स्पष्ट कर सकते थे कि कथित धोखाधड़ी कैसे हुई। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि उन्होंने संपत्ति खरीदने के बाद बैंक का कर्ज चुकाया, लेकिन अदालत ने पाया कि उनका आरोपियों से सीधा कोई लेन-देन या संपर्क साबित नहीं हुआ है। मामले में फॉरेंसिक रिपोर्ट में कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर को फर्जी बताया गया था, लेकिन यह साबित नहीं हो सका कि यह फर्जीवाड़ा आरोपियों ने ही किया था। जांच एजेंसी भी हस्ताक्षरों का उचित मिलान कराने और संबंधित गवाहों को पेश करने में असफल रही।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
साकेत कोर्ट ने करीब एक दशक पुराने संपत्ति से जुड़े कथित करोड़ों रुपये के धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में तीन आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस सबूत पेश करने में विफल रहा। इस मामले में एचएस थापर, विकास थापर और मनीष थापर पर आरोप था कि उन्होंने मालवीय नगर स्थित एक संपत्ति को बिना किसी बकाया या बंधक के होने का झांसा देकर बेचा। आरोपों के अनुसार, यह संपत्ति पहले सुरेंद्र सिंह को बेची गई और बाद में वही संपत्ति शिकायतकर्ता सुकृत बजाज तक पहुंची। बाद में यह सामने आया कि संपत्ति पहले से बैंक के पास गिरवी रखी हुई थी, जिसके कारण खरीदार को बैंक का बकाया चुकाना पड़ा।
हालांकि, अदालत में सुनवाई के दौरान मामला साक्ष्यों के अभाव में कमजोर पड़ गया। मुख्य गवाह सुरेंद्र सिंह की मृत्यु हो जाने के कारण अभियोजन पक्ष का केस काफी प्रभावित हुआ। अदालत ने कहा कि वही एकमात्र व्यक्ति थे जो यह स्पष्ट कर सकते थे कि कथित धोखाधड़ी कैसे हुई। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि उन्होंने संपत्ति खरीदने के बाद बैंक का कर्ज चुकाया, लेकिन अदालत ने पाया कि उनका आरोपियों से सीधा कोई लेन-देन या संपर्क साबित नहीं हुआ है। मामले में फॉरेंसिक रिपोर्ट में कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर को फर्जी बताया गया था, लेकिन यह साबित नहीं हो सका कि यह फर्जीवाड़ा आरोपियों ने ही किया था। जांच एजेंसी भी हस्ताक्षरों का उचित मिलान कराने और संबंधित गवाहों को पेश करने में असफल रही।
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