{"_id":"6a26edd1f29c7eda94087271","slug":"to-provide-relief-to-15-lakh-people-bjp-mps-raised-the-demand-for-removal-of-o-zone-delhi-ncr-news-c-340-1-del1011-140036-2026-06-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi NCR News: 15 लाख लोगों को राहत दिलाने के लिए भाजपा सांसदों ने उठाई ओ-जोन हटाने की मांग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi NCR News: 15 लाख लोगों को राहत दिलाने के लिए भाजपा सांसदों ने उठाई ओ-जोन हटाने की मांग
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली के प्राचीन गांवों और 92 नियमित कॉलोनियों को यमुना के ओ-जोन से बाहर करने की मांग को लेकर सांसद मनोज तिवारी और रामवीर सिंह बिधूड़ी ने उपराज्यपाल चरनजीत सिंह संधू से मुलाकात की। दोनों सांसदों ने कहा कि इससे जुड़े करीब 15 लाख लोग वर्षों से अनिश्चितता और कार्रवाई के भय में जी रहे हैं, इसलिए इसका जल्द समाधान जरूरी है।
उपराज्यपाल को सौंपे ज्ञापन में सांसदों ने बताया कि संबंधित गांवों और 92 कॉलोनियों को 24 मार्च 2008 को नियमित किया गया था और उस समय यह क्षेत्र एफ-जोन में आते थे। बाद में 10 अगस्त 2010 को इन्हें यमुना के ओ-जोन में शामिल कर दिया गया। इसके विरोध के बाद 28 सितंबर 2013 को डीडीए ने इन्हें ओ-जोन से बाहर करने के लिए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया था, लेकिन एक एनजीओ की याचिका पर एनजीटी ने इस प्रक्रिया पर रोक लगा दी।
सांसदों ने कहा कि एनजीओ की याचिका का निपटारा 13 जनवरी 2015 को हो चुका है और अब इस मामले में एनजीटी में कोई विवाद लंबित नहीं है। पूर्व उपराज्यपाल और डीडीए के तत्कालीन अधिकारियों ने भी माना था कि गांवों की आबादी का भूमि उपयोग आवासीय श्रेणी में आता है। इसके अलावा दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट और केंद्र सरकार की विशेषज्ञ समिति भी यह स्पष्ट कर चुकी है कि ये कॉलोनियां यमुना नदी से काफी दूर स्थित हैं तथा इनका नदी के प्रवाह या जल गुणवत्ता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।
विज्ञापन
दोनों सांसदों ने उपराज्यपाल से अनुरोध किया कि 28 सितंबर 2013 के ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को अंतिम रूप देकर इन गांवों और कॉलोनियों को ओ-जोन से बाहर किया जाए। उनका कहना है कि ऐसा होने से करीब 15 लाख लोगों को राहत मिलेगी और वर्षों से बनी अनिश्चितता समाप्त होगी।
नई दिल्ली। दिल्ली के प्राचीन गांवों और 92 नियमित कॉलोनियों को यमुना के ओ-जोन से बाहर करने की मांग को लेकर सांसद मनोज तिवारी और रामवीर सिंह बिधूड़ी ने उपराज्यपाल चरनजीत सिंह संधू से मुलाकात की। दोनों सांसदों ने कहा कि इससे जुड़े करीब 15 लाख लोग वर्षों से अनिश्चितता और कार्रवाई के भय में जी रहे हैं, इसलिए इसका जल्द समाधान जरूरी है।
उपराज्यपाल को सौंपे ज्ञापन में सांसदों ने बताया कि संबंधित गांवों और 92 कॉलोनियों को 24 मार्च 2008 को नियमित किया गया था और उस समय यह क्षेत्र एफ-जोन में आते थे। बाद में 10 अगस्त 2010 को इन्हें यमुना के ओ-जोन में शामिल कर दिया गया। इसके विरोध के बाद 28 सितंबर 2013 को डीडीए ने इन्हें ओ-जोन से बाहर करने के लिए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया था, लेकिन एक एनजीओ की याचिका पर एनजीटी ने इस प्रक्रिया पर रोक लगा दी।
विज्ञापन
विज्ञापन
सांसदों ने कहा कि एनजीओ की याचिका का निपटारा 13 जनवरी 2015 को हो चुका है और अब इस मामले में एनजीटी में कोई विवाद लंबित नहीं है। पूर्व उपराज्यपाल और डीडीए के तत्कालीन अधिकारियों ने भी माना था कि गांवों की आबादी का भूमि उपयोग आवासीय श्रेणी में आता है। इसके अलावा दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट और केंद्र सरकार की विशेषज्ञ समिति भी यह स्पष्ट कर चुकी है कि ये कॉलोनियां यमुना नदी से काफी दूर स्थित हैं तथा इनका नदी के प्रवाह या जल गुणवत्ता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।
Trending Videos
दोनों सांसदों ने उपराज्यपाल से अनुरोध किया कि 28 सितंबर 2013 के ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को अंतिम रूप देकर इन गांवों और कॉलोनियों को ओ-जोन से बाहर किया जाए। उनका कहना है कि ऐसा होने से करीब 15 लाख लोगों को राहत मिलेगी और वर्षों से बनी अनिश्चितता समाप्त होगी।