सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   vehicles on Delhi roads is complete, but the solution is incomplete.

Economic Survey: दिल्ली की सड़कों पर वाहनों का दबाव पूरा, समाधान अधूरा; बड़े जाम के 62 बिंदुओं की पहचान

धनंजय मिश्रा, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 27 May 2026 06:35 AM IST
विज्ञापन
सार

रोजाना औसतन 10 करोड़ से ज्यादा का राजस्व वाहन पंजीकरण, रोड टैक्स के नाम पर सरकार के खजाने में पहुंच रहा है। इसके बावजूद दिल्लीवासियों को जाम से राहत नहीं मिल पा रही। 

vehicles on Delhi roads is complete, but the solution is incomplete.
file pic... - फोटो : PTI
विज्ञापन

विस्तार

राजधानी में वाहनों की बढ़ती संख्या दिल्ली सरकार के लिए कमाई का बड़ा जरिया है। रोजाना औसतन 10 करोड़ से ज्यादा का राजस्व वाहन पंजीकरण, रोड टैक्स के नाम पर सरकार के खजाने में पहुंच रहा है। इसके बावजूद दिल्लीवासियों को जाम से राहत नहीं मिल पा रही। 



स्थिति यह है कि करोड़ों रुपये की कमाई और हजारों करोड़ के परिवहन बजट के बावजूद राजधानी की प्रमुख सड़कें पीक आवर्स में घंटों थमी रहती हैं। दिल्ली सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, पिछले वित्तीय वर्ष में वाहन कर से 3,700 करोड़ राजस्व मिलने का अनुमान है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


यानी केवल वाहन पंजीकरण, रोड टैक्स और संबंधित शुल्कों से सरकार को औसतन 10.13 करोड़ प्रतिदिन की आय हो रही है। वित्तीय वर्ष 2024-25 आंकड़ा 3,241.02 करोड़ था। इस तरह एक साल में करीब 14 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले एक साल में दिल्ली में 6,43,625 नए वाहन पंजीकृत हुए। 
विज्ञापन
Trending Videos


19 मार्च 2026 तक राजधानी में कुल पंजीकृत वाहनों की संख्या 87.61 लाख पहुंच चुकी है। दिल्ली में प्रति 1,000 आबादी पर 522 वाहन हैं, जो देश के बड़े शहरों में सबसे अधिक घनत्व में शामिल है। एक मध्यमवर्गीय परिवार जब 8 लाख की कार खरीदता है, तो उसे जीएसटी, रोड टैक्स और पंजीकरण शुल्क के रूप में लगभग 1 लाख से भी अधिक का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है। यानी वाहन खरीदना सरकार के लिए बड़ा राजस्व मॉडल कहा जा सकता है लेकिन जमीन पर तस्वीर बिल्कुल उलट दिखाई देती है। 

दिल्ली सरकार ने परिवहन क्षेत्र के लिए 11,964 करोड़ का बजट रखा है, जो कुल योजना बजट का करीब 20 फीसदी है। इसके तहत सड़कों और पुलों पर 3,061 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं। सार्वजनिक परिवहन की मजबूती के लिए ईवी बसों बेड़ा बढ़ाने, मेट्रो नेटवर्क को विस्तारित करने की योजना है।

62 जाम के हाॅटस्पाॅट...
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने राजधानी में 62 बड़े जाम बिंदुओं की पहचान की है। इनमें से 30 स्थानों को अत्यधिक गंभीर श्रेणी में रखा गया है, जहां रोजाना लंबा जाम लगता है। आश्रम चौक, आईटीओ, धौला कुआं, आजादपुर, आनंद विहार, मुकरबा चौक और गुरुग्राम-दिल्ली सीमा जैसे इलाके पीक आवर्स में सबसे ज्यादा प्रभावित रहते हैं। कई जगह वाहन चालकों को कुछ किलोमीटर का सफर तय करने में 30 से 45 मिनट तक लग जाते हैं।  

निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने के लिए परिवहन ढांचे को व्यवस्थित और भरोसेमंद बनाना होगा। ईंधन बचत और जाम से राहत तभी संभव है, जब लोग निजी वाहनों की जगह सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दें। इसके लिए जरूरी है कि मेट्रो की तरह बस सेवा सुलभ और मजबूत हो। लोगों को मोहल्लों और कॉलोनियों के पास आसानी से बस सुविधा मिले। लास्ट माइल कनेक्टिविटी मजबूत करना बेहद जरूरी है।
-अनुमिता रॉयचौधरी, सीएसई की कार्यकारी निदेशक (रिसर्च व एडवोकेसी)

फ्लाईओवर, सड़क चौड़ीकरण समस्या का समाधान नहीं...
विशेषज्ञ मानते हैं कि फ्लाईओवर और सड़क चौड़ीकरण से समस्या का समाधान संभव नहीं है। अवैध पार्किंग, फुटपाथों पर अतिक्रमण, सार्वजनिक परिवहन तक कमजोर लास्ट माइल कनेक्टिविटी और निजी वाहनों पर बढ़ती निर्भरता जाम को लगातार बढ़ा रही हैं। ट्रैफिक दबाव को संभालने के लिए डीटीसी के 1,200 अतिरिक्त कर्मचारियों को भी ट्रैफिक प्रबंधन में लगाया गया है, लेकिन इसका असर सीमित नजर आ रहा है। सरकार को वाहन बढ़ने से राजस्व तो रिकॉर्डतोड़ मिल रहा है कि लेकिन जाम से जूझते दिल्लीवासियों को राहत नहीं मिल रही। 
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed