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Delhi BMW Accident: 'पीड़ित को जानबूझकर दूर के अस्पताल ले जाया गया', दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विजय पुंडीर
Updated Fri, 23 Jan 2026 04:03 PM IST
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सार
दिल्ली पुलिस ने पटियाला हाउस कोर्ट को बताया कि पिछले साल सितंबर में धौला कुआं के पास बीएमडब्ल्यू कार से कुचले गए वित्त मंत्रालय के 52 वर्षीय अधिकारी नवजोत सिंह को आरोपी ने जानबूझकर दूर के अस्पताल पहुंचाया, जबकि हादसा आरोपी की लापरवाही के कारण हुआ था।
delhi accident
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
धौला कुआं बीएमडब्ल्यू कांड में दिल्ली पुलिस ने पटियाला हाउस कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। अदालत ने आरोप पत्र पर संज्ञान लेते हुए आरोपी महिला गगनप्रीत कौर को नोटिस जारी किया है। वहीं, अदालत ने मामले में संबंधित पक्षों को 2 फरवरी को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है।
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दिल्ली पुलिस ने पटियाला हाउस कोर्ट को बताया कि पिछले साल सितंबर में धौला कुआं के पास बीएमडब्ल्यू कार से कुचले गए वित्त मंत्रालय के 52 वर्षीय अधिकारी नवजोत सिंह को आरोपी ने जानबूझकर दूर के अस्पताल पहुंचाया, जबकि हादसा आरोपी की लापरवाही के कारण हुआ था। इस मामले में आरोपी के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या सहित अन्य धाराओं में चार्जशीट दाखिल की गई है।
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न्यायिक मजिस्ट्रेट अंकित गर्ग ने गुरुवार को दिसंबर में दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लिया और आरोपी गगनप्रीत मक्कड़ को समन जारी किया। मामले की अगली सुनवाई 2 फरवरी को होगी। जांच अधिकारी ने कोर्ट में कहा, इस मामले में हादसा आरोपी (बीएमडब्ल्यू चालक गगनप्रीत मक्कड़) की गलती से हुआ और उसने जानबूझकर पीड़ित को दूर के अस्पताल ले जाया। इसलिए आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या), 281 (लापरवाही से वाहन चलाना), 125बी (जीवन या सुरक्षा को खतरे में डालने वाला कार्य) और 238ए (साक्ष्य मिटाने) के तहत आरोप लगाए गए हैं।
पुलिस ने अपनी 400 पेज की चार्जशीट में आरोप लगाया कि 14 सितंबर 2025 को दोपहर करीब 1:30 बजे दिल्ली कैंटोनमेंट मेट्रो स्टेशन के पास रिंग रोड पर आरोपी की तेज रफ्तार (100-110 किमी/घंटा) बीएमडब्ल्यू एक्स5 ने मेट्रो पिलर से टकराकर पलट गई और हरि नगर निवासी नवजोत सिंह की मोटरसाइकिल से जा टकराई। इससे सिंह की मौत हो गई और उनकी पत्नी सहित तीन अन्य घायल हो गए।
आरोपी ने कीमती समय बर्बाद किया
पुलिस ने आरोप लगाया कि हादसे के बाद आरोपी ने पीड़ितों को नजदीकी अस्पतालों जैसे दिल्ली कैंटोनमेंट अस्पताल या एम्स ट्रॉमा सेंटर (10-15 मिनट की दूरी) की बजाय करीब 20 किमी दूर जीटीबी नगर स्थित अस्पताल ले जाया, जहां पहुंचने में 23 मिनट लगे। पुलिस ने नुलाइफ अस्पताल को छोटा दो मंजिला नर्सिंग होम बताया और कहा कि इससे ट्रॉमा केयर का गोल्डन आवर बर्बाद हो गया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, नवजोत सिंह हादसे के बाद 5-15 मिनट तक जीवित रहे और भारी रक्तस्राव के कारण मौत हुई। पुलिस का कहना है कि समय पर उचित चिकित्सा सहायता मिलती तो उनकी जान बच सकती थी। आरोपी ने मौके पर पहुंची एम्बुलेंस की मदद भी ठुकरा दी।