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Delhi NCR News: हैंडलूम हाट में वीव द फ्यूचर 5.0 का आगाज
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- केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने किया उद्घाटन, 30 से अधिक ब्रांड और 24 राष्ट्रीय स्तर पर पहचाने गए बुनकर ले रहे हिस्सा
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर हैंडलूम हाट में वीव द फ्यूचर 5.0 का आगाज हुआ। केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने नए रूप में तैयार द हैंडलूम एक्सपीरियंस सेंटर और विश्वकर्मा गैलरी का भी शुभारंभ किया। हथकरघा विकास आयुक्त कार्यालय, कपड़ा मंत्रालय की ओर से आयोजित प्रदर्शनी का यह पांचवां संस्करण है।
प्रदर्शनी में देशभर के 30 से अधिक चुनिंदा ब्रांड और राष्ट्रीय स्तर पर पहचाने गए 24 बुनकर हिस्सा ले रहे हैं। यहां पारंपरिक हथकरघे के अलावा ऊन, रेशम, भांग, केला, बांस, बिछुआ, अनानास के पत्ते और कमल जैसे प्राकृतिक एवं पुनर्योजी रेशों से तैयार उत्पाद प्रदर्शित किए जा रहे हैं।
बुनकरों की आय बढ़ाने पर जोर
उद्घाटन के दौरान गिरिराज सिंह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य बुनकरों की आय बढ़ाने, बाजार तक उनकी पहुंच मजबूत करने और उन्हें नए अवसर उपलब्ध कराने का है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बुनकर की सालाना आय कम से कम पांच लाख रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
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दुर्लभ वस्त्र बने आकर्षण
प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण विश्वकर्मा गैलरी है, जहां 1981 से 1991 के बीच आयोजित ऐतिहासिक विश्वकर्मा प्रदर्शनियों के दुर्लभ वस्त्र प्रदर्शित किए गए हैं। फाइबर्स ऑफ लैंड, टेक्सटाइल्स थ्रू टाइम और चक्र जैसी स्थापनाएं भी हथकरघे और प्राकृतिक रेशों की यात्रा को दर्शाती हैं। 23 अगस्त तक चलने वाली प्रदर्शनी में वेट फेल्टिंग, प्राकृतिक रंगाई और हाथ से कताई सहित विभिन्न कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इसका उद्देश्य भारतीय हथकरघे को आधुनिक डिजाइन और टिकाऊ उत्पादन से जोड़ना है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर हैंडलूम हाट में वीव द फ्यूचर 5.0 का आगाज हुआ। केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने नए रूप में तैयार द हैंडलूम एक्सपीरियंस सेंटर और विश्वकर्मा गैलरी का भी शुभारंभ किया। हथकरघा विकास आयुक्त कार्यालय, कपड़ा मंत्रालय की ओर से आयोजित प्रदर्शनी का यह पांचवां संस्करण है।
प्रदर्शनी में देशभर के 30 से अधिक चुनिंदा ब्रांड और राष्ट्रीय स्तर पर पहचाने गए 24 बुनकर हिस्सा ले रहे हैं। यहां पारंपरिक हथकरघे के अलावा ऊन, रेशम, भांग, केला, बांस, बिछुआ, अनानास के पत्ते और कमल जैसे प्राकृतिक एवं पुनर्योजी रेशों से तैयार उत्पाद प्रदर्शित किए जा रहे हैं।
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बुनकरों की आय बढ़ाने पर जोर
उद्घाटन के दौरान गिरिराज सिंह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य बुनकरों की आय बढ़ाने, बाजार तक उनकी पहुंच मजबूत करने और उन्हें नए अवसर उपलब्ध कराने का है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बुनकर की सालाना आय कम से कम पांच लाख रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
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दुर्लभ वस्त्र बने आकर्षण
प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण विश्वकर्मा गैलरी है, जहां 1981 से 1991 के बीच आयोजित ऐतिहासिक विश्वकर्मा प्रदर्शनियों के दुर्लभ वस्त्र प्रदर्शित किए गए हैं। फाइबर्स ऑफ लैंड, टेक्सटाइल्स थ्रू टाइम और चक्र जैसी स्थापनाएं भी हथकरघे और प्राकृतिक रेशों की यात्रा को दर्शाती हैं। 23 अगस्त तक चलने वाली प्रदर्शनी में वेट फेल्टिंग, प्राकृतिक रंगाई और हाथ से कताई सहित विभिन्न कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इसका उद्देश्य भारतीय हथकरघे को आधुनिक डिजाइन और टिकाऊ उत्पादन से जोड़ना है।