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Save Yamuna: दिल्ली में यमुना की सफाई को मिली रफ्तार, अधिकांश एसटीपी मानकों पर खरे; DPCC की रिपोर्ट में खुलासा
नितिन राजपूत, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 25 Jun 2026 04:20 AM IST
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सार
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की मई की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) निर्धारित पर्यावरणीय मानकों पर खरे उतरे हैं।
6 से 18 मई के बीच दिल्ली के कई एसटीपी से पानी के नमूने लेकर जांच की गई थी।
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
दिल्ली में यमुना नदी की स्थिति को लेकर एक राहत भरी तस्वीर सामने आई है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की मई की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) निर्धारित पर्यावरणीय मानकों पर खरे उतरे हैं।
रिपोर्ट में पाया गया कि इन प्लांट्स से निकलने वाला शोधित पानी कितना खट्टा या साबुन जैसा है (पीएच), पानी में मौजूद गंदे ठोस कण और मिट्टी और कचरे के छोटे-छोटे कण (टीएसएस) की मात्रा कितनी है। साथ ही, पानी में मौजूद ऑक्सीजन (बीओडी) और पानी में मौजूद केमिकल गंदगी (सीओडी) को साफ करने के लिए कितनी ऑक्सीजन की जरूरत है समेत कई अन्य तय मानकों ने सीमा को नहीं लांघा है।
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डीपीसीसी की परीक्षण आईआईसी वाटर लेबोरेटरी की डॉ. नंदिता मोइत्रा ने बताया कि 6 से 18 मई के बीच दिल्ली के कई एसटीपी से पानी के नमूने लेकर जांच की गई थी। रिपोर्ट में 30 से अधिक एसटीपी का विस्तृत विश्लेषण शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग सभी प्लांट्स में पानी का पीएच स्तर 6.5 से 9.0 के बीच पाया गया, जो निर्धारित मानकों के अनुरूप है।
पानी में मौजूद ठोस कण (टीएसएस) अधिकांश आउटलेट्स में 10 मिलीग्राम प्रति लीटर या उसके आसपास दर्ज किया गया। वहीं, बीओडी का स्तर भी ज्यादातर स्थानों पर 10 मिलीग्राम प्रति लीटर या उससे कम पाया गया। साथ ही, सीओडी भी अधिकतर प्लांट्स में निर्धारित 50 मिलीग्राम प्रति लीटर की सीमा के अंदर रहा।
इन एसटीपी ने किए मानक पूरे
रिपोर्ट के अनुसार, ऑयल एंड ग्रीस, अमोनिकल नाइट्रोजन, डिसॉल्व्ड फॉस्फेट और फीकल कोलीफॉर्म जैसे अहम मानक भी अधिकांश प्लांट्स में निर्धारित सीमा के अंदर पाए गए। प्रमुख प्लांट्स में दिल्ली गेट ने इनलेट में अधिक प्रदूषण होने के बावजूद आउटलेट में सभी मानकों को पूरा किया। सेन नर्सिंग होम, अशोक विहार, चिल्ला और कोंडली एसटीपी का प्रदर्शन भी संतोषजनक रहा।
इसी तरह रोहिणी, यमुना विहार, मेहरौली, वसंत कुंज, कापसहेड़ा, मजनपुर, नरेला, ओखला और केशोपुर स्थित प्लांट्स के आउटलेट का पानी भी निर्धारित मानकों के अनुरूप पाया गया। रिपोर्ट में पप्पनखेड़ा, नजफगढ़ और सोनिया विहार स्थित प्लांट्स में भी सुधार दर्ज किया गया है।
सात एसटीपी मानकों पर खरे नहीं उतरे
रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि सात एसटीपी निर्धारित डिस्चार्ज मानकों को पूरा नहीं कर पाए। रिपोर्ट के अनुसार यमुना विहार फेज-III एसटीपी के आउटलेट में फीकल कोलीफॉर्म 7,600 प्रति, जबकि मानक 230 प्रति 100 मिलीलीटर में सबसे संभावित संख्या है। यहां टीएसएस 17 और बीओडी 28 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज किया गया, जो तय सीमा से अधिक है। महरोली एसटीपी में फीकल कोलीफॉर्म 15,000 प्रति 100 मिलीलीटर में सबसे संभावित संख्या पाई गई। साथ ही, टीएसएस, बीओ़डी, अमोनियाकल नाइट्रोजन और डिसॉल्व्ड फॉस्फेट भी मानकों से ऊपर रहे।
वसंत कुंज के दो एसटीपी में भी टीएसएस, बीओडी, सीओडी, डिसॉल्व्ड फॉस्फेट और फीकल कोलीफॉर्म का स्तर अधिक मिला। एक प्लांट में फीकल कोलीफॉर्म 17,000 और दूसरे में 8,100 प्रति 100 मिलीलीटर में सबसे संभावित संख्या दर्ज की गई। रिपोर्ट में यमुना विहार फेज-I, घिटोरनी और कोरोनेशन पिलर एसटीपी को भी मानकों पर खरा न उतरने वाला बताया गया है।