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Delhi NCR News: तनाव और अकेलेपन की गिरफ्त में युवा, मानसिक स्वास्थ्य पर गहराता संकट
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काम का दबाव और इमोशनल स्ट्रेस भी कारण
डिजिटल दुनिया में बढ़ी दूरी, असल रिश्ते हो रहे कमजोर
सोनम प्रतिहस्त
नई दिल्ली। राजधानी में युवाओं के बीच बढ़ता तनाव और सामाजिक अलगाव अब गंभीर समस्या बनता जा रहा है। बदलती जीवनशैली, काम का दबाव और रिश्तों में घटता संवाद मानसिक स्वास्थ्य पर सीधा असर डाल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में स्थिति और चिंताजनक हो सकती है।
मानव व्यवहार एवं संबंध संस्थान के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. ओम प्रकाश के अनुसार, युवाओं में बढ़ता काम का दबाव, कॅरिअर को लेकर असुरक्षा और इमोशनल स्ट्रेस मानसिक तनाव को बढ़ा रहे हैं। इसके साथ ही परिवार और दोस्तों से कम होती बातचीत भी सामाजिक अलगाव को बढ़ावा दे रही है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि सोशल मीडिया और मोबाइल के अत्यधिक उपयोग के कारण युवाओं के वास्तविक रिश्ते प्रभावित हो रहे हैं। ऑनलाइन एक्टिव रहने के बावजूद वे अंदर से अकेलापन महसूस कर रहे हैं, जो धीरे-धीरे मानसिक समस्या का रूप ले रहा है।
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डॉ. ओम प्रकाश का कहना है कि युवाओं में अनिद्रा, मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत जैसे लक्षण तेजी से बढ़ रहे हैं। ये संकेत बताते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है और समय रहते इलाज जरूरी है।
केस स्टडी: टारगेट के दबाव में घिरा युवा
पूर्वी दिल्ली के 24 वर्षीय एक निजी कंपनी में काम करने वाले युवक (नाम बदलकर राहुल) ने बताया कि लगातार टारगेट और लंबे काम के घंटों ने उसे मानसिक रूप से थका दिया। धीरे-धीरे उसने दोस्तों से दूरी बना ली और अकेलापन महसूस करने लगा। बाद में नींद न आने और चिड़चिड़ापन बढ़ने पर उसे डॉक्टर की मदद लेनी पड़ी।
केस स्टडी: सोशल मीडिया से बढ़ा अकेलापन
दक्षिण दिल्ली की 21 वर्षीय छात्रा (नाम बदलकर नेहा) ने बताया कि वह दिनभर सोशल मीडिया पर सक्रिय रहती थी, लेकिन असल जिंदगी में लोगों से बातचीत कम हो गई। धीरे-धीरे उसे उदासी और अकेलापन महसूस होने लगा। काउंसिलिंग और दिनचर्या में बदलाव के बाद उसकी स्थिति में सुधार आया।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
-नियमित दिनचर्या और पर्याप्त नींद बेहद जरूरी।
-रोजाना व्यायाम और आउटडोर गतिविधियां अपनाएं।
-परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं।
-स्क्रीन टाइम सीमित करें।
-जरूरत पड़ने पर काउंसिलिंग जरूर लें।
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डिजिटल दुनिया में बढ़ी दूरी, असल रिश्ते हो रहे कमजोर
सोनम प्रतिहस्त
नई दिल्ली। राजधानी में युवाओं के बीच बढ़ता तनाव और सामाजिक अलगाव अब गंभीर समस्या बनता जा रहा है। बदलती जीवनशैली, काम का दबाव और रिश्तों में घटता संवाद मानसिक स्वास्थ्य पर सीधा असर डाल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में स्थिति और चिंताजनक हो सकती है।
मानव व्यवहार एवं संबंध संस्थान के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. ओम प्रकाश के अनुसार, युवाओं में बढ़ता काम का दबाव, कॅरिअर को लेकर असुरक्षा और इमोशनल स्ट्रेस मानसिक तनाव को बढ़ा रहे हैं। इसके साथ ही परिवार और दोस्तों से कम होती बातचीत भी सामाजिक अलगाव को बढ़ावा दे रही है।
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विशेषज्ञ बताते हैं कि सोशल मीडिया और मोबाइल के अत्यधिक उपयोग के कारण युवाओं के वास्तविक रिश्ते प्रभावित हो रहे हैं। ऑनलाइन एक्टिव रहने के बावजूद वे अंदर से अकेलापन महसूस कर रहे हैं, जो धीरे-धीरे मानसिक समस्या का रूप ले रहा है।
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डॉ. ओम प्रकाश का कहना है कि युवाओं में अनिद्रा, मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत जैसे लक्षण तेजी से बढ़ रहे हैं। ये संकेत बताते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है और समय रहते इलाज जरूरी है।
केस स्टडी: टारगेट के दबाव में घिरा युवा
पूर्वी दिल्ली के 24 वर्षीय एक निजी कंपनी में काम करने वाले युवक (नाम बदलकर राहुल) ने बताया कि लगातार टारगेट और लंबे काम के घंटों ने उसे मानसिक रूप से थका दिया। धीरे-धीरे उसने दोस्तों से दूरी बना ली और अकेलापन महसूस करने लगा। बाद में नींद न आने और चिड़चिड़ापन बढ़ने पर उसे डॉक्टर की मदद लेनी पड़ी।
केस स्टडी: सोशल मीडिया से बढ़ा अकेलापन
दक्षिण दिल्ली की 21 वर्षीय छात्रा (नाम बदलकर नेहा) ने बताया कि वह दिनभर सोशल मीडिया पर सक्रिय रहती थी, लेकिन असल जिंदगी में लोगों से बातचीत कम हो गई। धीरे-धीरे उसे उदासी और अकेलापन महसूस होने लगा। काउंसिलिंग और दिनचर्या में बदलाव के बाद उसकी स्थिति में सुधार आया।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
-नियमित दिनचर्या और पर्याप्त नींद बेहद जरूरी।
-रोजाना व्यायाम और आउटडोर गतिविधियां अपनाएं।
-परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं।
-स्क्रीन टाइम सीमित करें।
-जरूरत पड़ने पर काउंसिलिंग जरूर लें।