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'संयोग या प्रयोग': सीपी का तबादला फिर प्रदर्शकारियों पर कार्रवाई, माकपा नेता ने उठाए केंद्र सरकार पर सवाल
Sat, 18 Jul 2026 10:33 PM IST
Rahul Kumar Tiwari
संवाद न्यूज एजेंसी, नई दिल्ली
संवाद न्यूज एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: Rahul Kumar Tiwari
Updated Sat, 18 Jul 2026 10:33 PM IST
सार
जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को हटाए जाने के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। माकपा नेता वृंदा करात ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया। उन्होंने नए पुलिस कमिश्नर की नियुक्ति के अगले दिन हुई कार्रवाई के समय पर भी सवाल खड़े किए।
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सोनम वांगचुक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दिल्ली पुलिस कमिश्नर के तबादले के 24 घंटे के भीतर जंतर मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक पर हुई पुलिसिया कार्रवाई से सियासत गरमा गई है। शनिवार को जंतर-मंतर पहुंचीं माकपा की वरिष्ठ नेता वृंदा करात ने भी वांगचुक और छात्रों पर हुई कार्रवाई पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कल दिल्ली पुलिस कमिश्नर का तबादला हुआ और अगले ही दिन सोनम वांगचुक को धरना स्थल से हटा दिया गया। देश की जनता जानना चाहती है कि यह संयोग है या प्रयोग।
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करात ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन लोकतंत्र की बुनियाद है, लेकिन केंद्र सरकार संवाद के बजाय पुलिस के जरिए असहमति की आवाज दबाने का रास्ता अपना रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस सीधे केंद्र सरकार के अधीन है, इसलिए इस कार्रवाई की जवाबदेही भी केंद्र सरकार की है।
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उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा। वृंदा करात ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध को बलपूर्वक खत्म करना किसी भी सरकार के लिए उचित नहीं है। सरकार के सुशासन के दावों पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा, यह सुशासन नहीं, दुशासन है। लोकतंत्र में जनता की आवाज सुनने के बजाय उसे दबाया जा रहा है।
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वृंदा करात ने कहा कि आंदोलनकारी कोई अपराधी नहीं हैं बल्कि अपनी मांगों को शांतिपूर्ण ढंग से रखने आए हमारे ही देश के नागरिक हैं। ऐसे में पुलिस कार्रवाई यह संदेश देती है कि असहमति के लिए इस सरकार में कोई जगह नहीं है।