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दिल्ली मास्टर प्लान 2047: यमुना के सक्रिय बाढ़ क्षेत्र में बनेंगे नो-एक्टिविटी जोन, हितधारकों ने दिए कई सुझाव
Wed, 30 Sep 2026 12:51 PM IST
अनुज कुमार
आदित्य पाण्डेय, अमर उजाला, नई दिल्ली
आदित्य पाण्डेय, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनुज कुमार
Updated Wed, 30 Sep 2026 12:51 PM IST
सार
दिल्ली में बुधवार को मास्टर प्लान दिल्ली-2047 पर नौवीं हितधारक बैठक हुई। इसमें यमुना के सक्रिय बाढ़ क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए गतिविधि-मुक्त क्षेत्र तय करने की जरूरत बताई गई। बैठक में यमुना के पुनर्जीवन, आर्द्रभूमि संरक्षण और दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाने पर भी मंथन हुआ।
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डीडीए की ओर से बैठक
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दिल्ली में यमुना के सक्रिय बाढ़ क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए नो-एक्टिविटी जोन की पहचान करने की जरूरत बताई गई है। मास्टर प्लान दिल्ली-2047 को लेकर बुधवार को हुई नौवीं हितधारक बैठक में यमुना के पुनर्जीवन, बाढ़ क्षेत्र, आर्द्रभूमि और प्राकृतिक नालों के संरक्षण के साथ दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाने के उपायों पर मंथन हुआ। बैठक में ई-कचरा प्रबंधन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाने और यातायात जाम से निपटने के लिए एकीकृत रणनीति तैयार करने के सुझाव भी सामने आए।
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दिल्ली विकास प्राधिकरण की ओर से आयोजित बैठक में एमपीडी-2047 में यमुना और हरित-नीले ढांचे से जुड़े प्रावधानों की जानकारी दी गई। योजना में यमुना के पुनर्जीवन के साथ बाढ़ क्षेत्र, आर्द्रभूमि, जल निकायों और प्राकृतिक व निर्मित नालों के संरक्षण का प्रावधान रखा गया है। हितधारकों ने सक्रिय यमुना बाढ़ क्षेत्र की पहचान कर वहां नो-एक्टिविटी जोन तय करने की जरूरत बताई, ताकि संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान से बचाया जा सके।
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प्रदूषण रोकने के लिए समग्र योजना
बैठक में दिल्ली के प्रदूषण को केवल एक समस्या के रूप में देखने के बजाय उससे जुड़े अलग-अलग पहलुओं को एक साथ जोड़कर रणनीति बनाने पर जोर रहा। इसके तहत प्राकृतिक संसाधनों के समग्र पुनर्जीवन की योजना तैयार करने का सुझाव दिया गया। इसमें जल संसाधन, हरित क्षेत्र, जैव विविधता और यमुना के संरक्षण को एक साथ देखने की जरूरत बताई गई।
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हरित-नीले नेटवर्क से बढ़ेगी पर्यावरणीय मजबूती
एमपीडी-2047 में शहरी जंगलों और जैव विविधता को मजबूत करने के साथ हरित क्षेत्रों का आपस में जुड़ा नेटवर्क तैयार करने पर जोर है। इसमें स्थानीय प्रजातियों को बढ़ावा देने और प्रकृति आधारित समाधान अपनाने की बात कही गई है। इससे दिल्ली के पर्यावरण की गुणवत्ता सुधारने के साथ जलवायु संबंधी चुनौतियों से निपटने और शहर को अधिक रहने योग्य बनाने का लक्ष्य है।
ई-कचरे के लिए गाइडलाइन की जरूरत
हितधारकों ने ई-कचरा प्रबंधन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करने का सुझाव दिया। तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक कचरे के सुरक्षित प्रबंधन के लिए नियोजन स्तर पर व्यवस्था तय करने की जरूरत बैठक में रखी गई। इसके अलावा प्रदूषण और पर्यावरणीय दबाव कम करने के लिए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को शहरी विकास से जोड़ने पर भी जोर दिया गया।
जाम घटाने के लिए एकीकृत रणनीति
बैठक में यातायात जाम और आवाजाही की समस्या से निपटने के लिए एकीकृत रणनीति बनाने की जरूरत बताई गई। इसके साथ ही जमीन के ऊपर और नीचे विकसित होने वाले बुनियादी ढांचे के बीच बेहतर तालमेल के लिए एकीकृत ढांचा तैयार करने का सुझाव भी आया। इसका मकसद सड़क, जल, सीवर और अन्य शहरी सुविधाओं के विकास को अलग-अलग करने के बजाय आपस में जोड़ना है।
जनभागीदारी पर एलजी का जोर
एलजी तरनजीत सिंह संधू के निर्देश पर हुई इस बैठक में यमुना और दिल्ली के अन्य हरित-नीले संसाधनों के संरक्षण में लोगों की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया गया। एलजी का कहना है कि यमुना और अन्य प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े मुद्दों का स्थायी समाधान तभी संभव है, जब दिल्ली के लोग इनके संरक्षण और रखरखाव में अपनी हिस्सेदारी महसूस करें।
तीन महीने में होंगी करीब 20 बैठकें
एमपीडी-2047 को लेकर डीडीए की तीन महीने की हितधारक सहभागिता प्रक्रिया के तहत यह नौवीं बैठक थी। इस पूरी प्रक्रिया में करीब 20 बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इनमें दिल्ली के नियोजन और विकास से जुड़े अलग-अलग विषयों और हितधारक समूहों से सुझाव लिए जा रहे हैं, ताकि मास्टर प्लान के प्रावधानों को व्यापक भागीदारी के साथ लागू करने की दिशा तय की जा सके। बैठक में एमसीडी, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, शहरी विकास विभाग, दिल्ली सरकार, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, केंद्रीय भूजल बोर्ड, पीडब्ल्यूडी, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, दिल्ली जल बोर्ड समेत विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए।