मंत्री ने अपने ही विभाग पर कसा तंज: कहा- 11 महीने में बनी थी विधानसभा की इमारत, अब पांच साल में भी मुश्किल
दिल्ली विधानसभा में आयोजित कार्यक्रम में पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने मौजूदा निर्माण व्यवस्था पर तंज कसा। प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि 1912 में केंद्रीय विधानसभा भवन 11 महीने में बन गया था, जबकि आज पीडब्ल्यूडी ऐसी इमारत पांच साल में भी ठीक से नहीं बना पाएगी।
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दिल्ली विधानसभा में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने ऐतिहासिक विधानसभा भवन के निर्माण का जिक्र करते हुए मौजूदा सरकारी निर्माण व्यवस्था की कलई खोली। उन्होंने कहा कि सेठ फतेहचंद ने केंद्रीय विधानसभा की खूबसूरत इमारत को सिर्फ 11 महीने में तैयार कर दिया था, जबकि आज की पीडब्ल्यूडी ऐसी इमारत पांच साल में भी शायद न बना पाए। यदि बना भी ले तो पांच साल में ही इमारत टूट जाए। मंत्री की इस टिप्पणी के दौरान सदन में मौजूद लोगों के बीच हल्की मुस्कान और चर्चा भी देखने को मिली।
पीडब्ल्यूडी मंत्री के इस बयान को मौजूदा सरकारी निर्माण व्यवस्था में सुधार, बेहतर निगरानी और जवाबदेही बढ़ाने की जरूरत के संदर्भ में देखा गया। मंत्री ने भी कहा कि वह स्वयं पीडब्ल्यूडी मंत्री हैं, इसलिए उनको यह सच्चाई बखूबी पता है। पीडब्ल्यूडी की यह कार्यप्रणाली मौजूदा सरकार को विरासत में मिली है, जिसे मौजूदा सरकार बदलने के लिए लगातार काम कर रही है। यहां जानना जरूरी है कि केंद्रीय विधानसभा इमारत का निर्माण 1912 में हुआ था। इसको ई मोंटेग्यू थॉमस ने इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल के लिए डिजाइन किया था, 1919 के बाद इसमें केंद्रीय विधानसभा की बैठक आयोजित होनी शुरू हुई।
कार्यक्रम में दिल्ली विधानसभा की त्रैमासिक पत्रिका ‘विधान चेतना’ का अनावरण किया गया। यह 1924 से 1930 तक की केंद्रीय विधानसभा की कार्यवाहियों, बहसों और चर्चाओं के 89 खंडीय प्रकाशन है। प्रकाशनों का लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अनावरण किया, जबकि केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। इस दौरान पीडब्ल्यूडी मंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में विधानसभा अध्यक्ष ने इस ऐतिहासिक इमारत और इसके गौरवशाली इतिहास से लोगों को दोबारा परिचित कराने का काम किया है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दिल्ली विधानसभा भवन को देश की लोकतांत्रिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी शासन के दौर में भारतीय नेताओं ने संघर्ष और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के जरिए इस संस्था की गरिमा को मजबूत किया। बिरला ने विट्ठलभाई पटेल के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका त्याग, अनुशासन और सदन की मर्यादा के प्रति समर्पण आज भी लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए प्रेरणा है।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि दिल्ली विधानसभा अब पहले की तुलना में ज्यादा सक्रिय दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में सरकार एक टीम की तरह काम कर रही है और विधानसभा में जनहित के मुद्दों पर देर रात तक चर्चा हो रही है। रिजिजू ने कहा कि संसद और विधानसभा लोकतांत्रिक बहस के मंच हैं, जहां पक्ष और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी बराबर होती है।
विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने अपने संबोधन में केंद्रीय विधानसभा के पहले अध्यक्ष विट्ठलभाई पटेल का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने अंग्रेजी शासन के दौरान भी स्पीकर पद की गरिमा और सदन की ताकत को मजबूती से स्थापित किया। उन्होंने बताया कि किस तरह विट्ठलभाई पटेल ने अंग्रेजी सेना के कमांडर-इन-चीफ को सदन में आकर माफी मांगने के लिए मजबूर किया था। विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि विधानसभा में ऐसे कई ऐतिहासिक और प्रमाणित दस्तावेज मौजूद हैं, जिन्हें संरक्षित करने के लिए यहां एक भव्य संग्रहालय स्थापित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि ‘विधान चेतना’ के जरिए लोगों को संसदीय इतिहास और लोकतांत्रिक परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।