Delhi: नीति बनी न तय हुई जिम्मेदारी, दिल्ली में पार्किंग बनीं जानलेवा, कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती
राजधानी में पार्किंग का संकट सिर्फ अव्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। सड़कों और गलियों में वाहन खड़े करने को लेकर बढ़ते विवाद हत्या तक पहुंच गए हैं।
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राजधानी में पार्किंग का संकट सिर्फ अव्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। सड़कों और गलियों में वाहन खड़े करने को लेकर बढ़ते विवाद हत्या तक पहुंच गए हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है, पार्किंग व्यवस्था का अलग-अलग एजेंसियों में बंटा होना और पूरे शहर के लिए एक स्पष्ट, सख्त और एकीकृत नीति का अभाव है। नगर निगम, एनडीएमसी, डीडीए और मेट्रो जैसी कई एजेंसियां अपने-अपने स्तर पर पार्किंग का संचालन कर रही हैं, लेकिन इनके बीच न तो समन्वय है और न ही एक समान नियम। नतीजा यह है कि राजधानी की सड़कें धीरे-धीरे नो-मैन्स-लैंड में बदलती जा रही हैं, जहां नियम से ज्यादा ताकत और विवाद हावी हो रहे हैं।
योजना बनी पर अभी तक पूरी तरह नहीं हो पाई लागू... दिल्ली सरकार ने वर्ष 2019 में पार्किंग नियमों को अधिसूचित किया था और पार्किंग मैनेजमेंट एरिया प्लान जैसी व्यवस्था भी लागू करने की बात कही थी, लेकिन यह पहल अभी तक पूरे शहर में प्रभावी नहीं हो पाई है। राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में पार्किंग के अलग नियम, शुल्क और प्रबंधन प्रणाली देखने को मिलती है। स्थिति यह है कि जहां एक ओर कुछ क्षेत्रों में मल्टीलेवल और पेड पार्किंग की सुविधा उपलब्ध है, वहीं बड़ी संख्या में वाहन अब भी सड़कों और गलियों में खड़े नजर आते हैं। खासकर रिहायशी इलाकों में लोगों की अपनी सुविधा को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति समस्या को और गंभीर बना दिया है। कई स्थानों पर लोग अपने घर के सामने ही वाहन खड़ा करना चाहते हैं, भले ही पास में निर्धारित पार्किंग स्थल मौजूद क्यों न हो। मल्टीलेवल पार्किंग परियोजनाएं या तो धीमी गति से चल रही हैं या फिर कई जगहों पर उपयोग के लिहाज से सफल नहीं हो पाई हैं। जहां पार्किंग बनाई भी गई, वहां ऊंचे शुल्क, खराब रखरखाव या असुविधाजनक लोकेशन के कारण लोग इस्तेमाल नहीं करते।
इसलिए दिल्ली की स्थिति है खराब
पार्किंग क्षमता का कोई एकीकृत आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, क्योंकि यह व्यवस्था अलग-अलग एजेंसियों में बंटी हुई है।
राजधानी में 87 लाख वाहन पंजीकृत हैं, इसमें से करीब 70% वाहन सड़क या अनधिकृत पार्किंग पर खड़े होते हैं
दिल्ली में हर साल 5–7% की दर से वाहन बढ़ रहे हैं, लेकिन पार्किंग इंफ्रास्ट्रक्चर उसी अनुपात में नहीं बढ़ा।
अधिकांश रिहायशी इलाकों में एक परिवार के पास 2–3 वाहन हैं, लेकिन निजी पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
सड़क के दोनों ओर गाड़ियां खड़ी रहती हैं, जिससे इलाके में जाम लग जाता है। इलाके में पार्किंग की व्यवस्था नहीं है, जिससे वाहन चालक कहीं भी अपने वाहन खड़े कर देते हैं।-प्रदीप अरोड़ा, ईस्ट नत्थू कॉलोनी
मंडावली स्टेशन, ऊर्जा विहार सोसाइटी और श्रीराम चौक पर वाहनों का जमावड़ा रहता है। पार्किंग न होने से मंडावली स्थित साकेत ब्लॉक में गलियों में भी वाहन खड़े रहते हैं।-मान सिंह पंच, अध्यक्ष, आरडब्ल्यूए साकेत ब्लॉक, मंडावली
दिल्ली में पार्किंग की अनियंत्रित समस्या अब गंभीर संकट बन चुकी है। विकास मार्ग और शकरपुर जैसी जगहों पर अतिक्रमण से रास्ते बंद हैं। पार्किंग की समस्या को लेकर कई बार प्रशासन को लिखित में शिकायत की जा चुकी है।-दीपक कुमार गुप्ता, शकरपुर

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