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Pahalgam Attack: आतंकियों के खिलाफ धैर्य व तकनीक का 'ऑपरेशन महादेव', 93 दिन, 250 किमी तक पीछा,फिर फाइनल जस्टिस
आशुतोष भाटिया, नई दिल्ली
Published by: Digvijay Singh
Updated Tue, 21 Apr 2026 06:12 AM IST
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सार
पहलगाम के बायसरन में पिछले साल 22 अप्रैल को पर्यटकों पर हुए कायरतापूर्ण हमले को एक साल पूरा होने आया है। वह दिन जब निर्दोष नागरिकों के खून से घाटी लाल हुई थी, देश गहरे सदमे में था। इस हमले के बाद सुरक्षा बलों ने धैर्य और तकनीक की मदद से ऑपरेशन महादेव चलाया।
तकनीक और धैर्य की जंग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पहलगाम के बायसरन में पिछले साल 22 अप्रैल को पर्यटकों पर हुए कायरतापूर्ण हमले को एक साल पूरा होने आया है। वह दिन जब निर्दोष नागरिकों के खून से घाटी लाल हुई थी, देश गहरे सदमे में था। इस हमले के बाद सुरक्षा बलों ने धैर्य और तकनीक की मदद से ऑपरेशन महादेव चलाया। एक साल बाद हमने इस पूरे मिशन की पड़ताल की।
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इस ऑपेरशन में पूरे 93 दिन 250 किलोमीटर तक पीछा करने के बाद सेना ने देश के दुश्मनों को उनके अंजाम तक पहुंचा दिया। इस मिशन ने साबित किया कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादियों के लिए देश का कोई कोना सुरक्षित नहीं है।
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विशेष बलों की एंट्री
हमले के बाद खुफिया जानकारी, तकनीकी इनपुट और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर यह पुष्टि हुई कि हमले में लश्कर-ए-ताइबा के तीन विदेशी आतंकवादी शामिल थे। सेना ने इन तीनों आतंकियों सुलेमान शाह, हमजा अफगानी और जिबरान भाई की पहचान कर ली। लेकिन ये आतंकी दक्षिण कश्मीर के दुर्गम जंगलों और हापतनार, बुगमार तथा त्राल की पहाड़ियों में छिप गए थे। मामले की गंभीरता देखते हुए सेना ने अपने कुलीन पैरा स्पेशल फोर्सेज को मैदान में उतारा।
तकनीक और धैर्य की जंग
ऑपेरशन के शुरुआती चरण में ही यह स्पष्ट हो गया कि आतंकवादी घने जंगलों और ऊंचाई वाले क्षेत्रों का सहारा लेकर बचने की कोशिश कर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि यह ऑपरेशन आधुनिक तकनीक और धैर्य का अनूठा संगम था। ड्रोन, रिमोटली पायलट एयरक्राफ्ट और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर की मदद से 300 वर्ग किलोमीटर के इलाके के भीतर लिदवास, हरवान और दाचीगाम में बड़े पैमाने पर घेराबंदी की गई। आतंकियों को लगा कि घना जंगल उनका कवच बनेगा, लेकिन सेना के कमांडोज ने 10 जुलाई तक उन्हें दाचीगाम के 25 वर्ग किलोमीटर के दायरे में समेट दिया।
अंतिम प्रहार
ऑपरेशन का निर्णायक क्षण 28 जुलाई 2025 को आया। पैरा स्पेशल फोर्सेज की एक टीम ने रात के अंधेरे में 10 घंटे पैदल चल 3 किमी की दूरी तय की। सेना की टीम ने कठिन पहाड़ी इलाके में आतंकियों को चारों तरफ से घेर लिया। इसके बाद उनपर सटीक व निर्णायक हमला किया गया। कुछ ही मिनटों की मुठभेड़ में तीनों आतंकवादी मारे गए। 93 दिनों तक चले ऑपरेशन महादेव ने उन मासूमों को न्याय दिलाया, जिन्होंने बायसरन में जान गंवाई थी।

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