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Sonam Wangchuk Hunger Strike: किस वजह से अनशन कर रहे थे सोनम वांगचुक? कब से हुई शुरुआत, अब तक क्या-क्या हुआ

Sat, 18 Jul 2026 08:32 AM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: Sharukh Khan Updated Sat, 18 Jul 2026 08:32 AM IST
सार

दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता  सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने सफदरजंग अस्पताल भर्ती कराया है। उन्हें अस्पताल ले जाने के बाद पुलिस जंतर-मंतर से प्रदर्शनकारियों को हटा रही है। सोनम वांगचुक क्यों भूख हड़ताल पर बैठे थे? वांगचुक की क्या मांगें हैं? आइये जानते हैं...

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Sonam Wangchuk Hunger Strike Why was Sonam on hunger strike When did it begin and what has happened so far
Sonam Wangchuk Hunger Strike - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर से उठाकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वांगचुक पिछले 20 दिनों से NEET, CBSE, CUET और SSC जैसी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे थे। उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए, कोर्ट के आदेशों और मेडिकल विशेषज्ञों की सलाह पर पुलिस ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया है।
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सोनम वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे अन्य प्रदर्शनकारियों को भी स्थल से हटा दिया गया। वांगचुक 28 जून से अनशन पर थे और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। आइए जानते हैं कि इस आंदोलन की शुरुआत कैसे हुई और अब तक क्या क्या हुआ।
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बिगड़ती सेहत और हौसला
लगातार गिरते स्वास्थ्य के बावजूद, सोनम वांगचुक ने शुक्रवार रात एक वीडियो संदेश जारी किया था। वीडियो में संदेश दिया था कि उनका वजन लगभग 20 प्रतिशत कम हो गया है और उनकी मांसपेशियां भी प्रभावित हुई हैं। उन्होंने कहा कि अभी भी जिंदा हूं। मेरे शरीर का करीब 20 फीसदी हिस्सा चला गया है। शरीर के फैट्स के बाद अब मांसपेशियां भी जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि इसके बाद अंदरूनी ऑर्गन जाएंगे और आखिर में दिमाग, लेकिन अभी वो नौबत नहीं आई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका हौसला और मानसिक स्थिति मजबूत बनी हुई है। 
 

'चलो संसद' मार्च का आह्वान
अपने संदेश में, वांगचुक ने देशवासियों से 20 जुलाई को प्रस्तावित 'चलो संसद' मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की थी। उन्होंने तर्क दिया कि यदि प्याज की कीमतों जैसे मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही तय हो सकती है, तो करोड़ों छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों पर भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने NEET विवाद के बाद कुछ छात्रों द्वारा आत्महत्या किए जाने का भी दावा किया और सरकार से इस मुद्दे पर जवाब देने की मांग की।
 
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वांगचुक के आंदोलन को कई नागरिक संगठनों और राजनीतिक हस्तियों का समर्थन मिला है। शिवसेना-यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी NEET परीक्षा की गड़बड़ियों के खिलाफ चल रहे आंदोलन का समर्थन किया है और केंद्र सरकार को असंवेदनशील बताया है। 

6 जून 2026 से शुरू हुआ था धरना, डॉक्टरों ने सोनम वांगचुक के शरीर के अंगों को लेकर दी चेतावनी 
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का जंतर-मंतर पर धरना मूल रूप से 6 जून 2026 से शुरू हुआ था। इसके बाद पार्टी ने 20 जून से इसे अनिश्चितकालीन धरने के रूप में घोषित कर दिया था। 
 

पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 28 जून से अनशन पर थे। डॉक्टरों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य की  निगरानी कर रही थी। डॉक्टरों के अनुसार, लंबे समय तक भोजन न लेने की वजह से सोनम वांगचुक का वजन लगातार घट रहा है। सीजेपी के मुताबिक, अब तक उनका करीब नौ किलोग्राम वजन कम हो चुका है।

डॉ. सतीश लांबा ने बताया कि शुक्रवार को उनका वजन 56.55 किलोग्राम दर्ज किया गया, जो पिछले 24 घंटे में 350 ग्राम कम हुआ है। उनका ब्लड प्रेशर 108/68, ब्लड शुगर 70 एमजी/डीएल और हार्ट रेट 72 बीट प्रति मिनट दर्ज की गई। उन्होंने बताया कि शरीर में हल्का डिहाइड्रेशन है। पहले शरीर की चर्बी कम हुई, उसके बाद मांसपेशियां प्रभावित होने लगीं और अब लंबे समय तक अनशन जारी रहने पर शरीर के अन्य अंगों पर भी असर पड़ने की आशंका है। मेडिकल टीम चौबीसों घंटे उनकी निगरानी कर रही है।

20 के बाद भूत बनकर वापस आऊंगा
भूख हड़ताल के बीच सोनम वांगचुक ने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि उनका शरीर कमजोर जरूर हुआ है, लेकिन आंदोलन को लेकर उनका हौसला मजबूत है। उन्होंने बताया कि मैं किसी भी हालत में 20 जुलाई तक जीवित रहूंगा, ताकि आप सभी के साथ संसद तक मार्च कर सकूं। अगर 20 जुलाई को हमारा मार्च सफल नहीं हुआ, तो मैं भूत बनकर वापस आऊंगा। 

 

कांग्रेस समेत कई नेताओं ने दिया समर्थन
शुक्रवार को प्रदर्शन को कांग्रेस सहित कई विपक्षी नेताओं का समर्थन भी मिला। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा, राजेंद्र पाल, एनसीपी (शरद पवार) सांसद सुप्रिया सुले और हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला समेत कई नेताओं ने जंतर मंतर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की। वहीं, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने भी सोशल मीडिया के जरिए सीजेपी को समर्थन दिया। 

 

क्या है पूरा मामला?
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) नीट पेपर लीक की निष्पक्ष जांच, परीक्षा प्रणाली में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन कर रही है। पार्टी का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक जंतर मंतर से धरना समाप्त नहीं किया जाएगा। आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र, अभिभावक और युवा लगातार शामिल हो रहे हैं।

 

20 जून से जंतर मंतर पर शुरू हुआ प्रदर्शन
दिल्ली पुलिस से अनुमति मिलने के बाद 20 जून को अभिजीत दीपके अपने समर्थकों के साथ जंतर मंतर पहुंचे। प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुआ। छात्र हाथों में पोस्टर और थाली चम्मच लेकर शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग करते नजर आए। शाम को निर्धारित अनुमति अवधि समाप्त होने के बाद पुलिस ने प्रदर्शन खत्म करने को कहा, लेकिन अभिजीत दीपके ने साफ कर दिया कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक धरना जारी रहेगा।

बिजली पानी को लेकर बढ़ा विवाद
आंदोलन के दौरान अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि कुछ समय के लिए धरनास्थल पर बिजली और पानी की आपूर्ति रोक दी गई थी। हालांकि बाद में दोनों सेवाएं बहाल कर दी गईं। इस घटना के बाद प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन पर आंदोलन को कमजोर करने का आरोप लगाया।

 

प्रदर्शन के नौवें दिन सोनम वांगचुक की एंट्री
आंदोलन के नौवें दिन पर्यावरण और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी जंतर मंतर पहुंचे। भूख हड़ताल शुरू करने से पहले उन्होंने अभिजीत दीपके के साथ राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। उनके आंदोलन में शामिल होने के बाद प्रदर्शन स्थल पर भीड़ और समर्थन दोनों बढ़ गए। हरियाणा की खाप पंचायतों के प्रतिनिधि भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे।

 

स्वच्छता सुविधाओं को लेकर दिल्ली पुलिस पर आरोप
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल शुरू होने के बाद अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने धरनास्थल पर पानी और स्वच्छता संबंधी सुविधाएं बंद कर दी हैं। उनका कहना है कि पुलिस को वांगचुक की उम्र और स्वास्थ्य की जानकारी देने के बावजूद सहयोग नहीं किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने आशंका जताई कि अन्य बुनियादी सुविधाएं भी बंद की जा सकती हैं। हालांकि इन आरोपों पर दिल्ली पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

अमायरा के परिवार ने जताया समर्थन
आंदोलन के दौरान नौ वर्षीय अमायरा का परिवार भी जंतर मंतर पहुंचा। परिवार प्रदर्शन कर रहे छात्रों के लिए भोजन लेकर आया। सीजेपी ने अमायरा को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि स्कूल में कथित बुलिंग के बाद जान गंवाने वाली बच्ची के परिवार को अब तक न्याय नहीं मिला है और संगठन न्याय मिलने तक उनके साथ खड़ा रहेगा।
 

कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत कैसे हुई?
कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन अभियान के रूप में हुई थी। बाद में यह सोशल मीडिया से निकलकर छात्र और युवा मुद्दों पर केंद्रित जन अभियान बन गया। संगठन ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों, पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। इसके बाद विभिन्न राज्यों में भी आंदोलन और जनसभाएं आयोजित की गईं।

 

क्या हैं आंदोलन की प्रमुख मांगें?
सीजेपी की प्रमुख मांगों में नीट पेपर लीक की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, प्रभावित छात्रों और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को न्याय तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था में व्यापक सुधार शामिल हैं। पार्टी का कहना है कि जब तक इन मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
 

क्या यह वांगुचक की पहली भूख हड़ताल है?
यह पहली बार नहीं है जब वांगचुक ऐसी भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इससे पहले भी वह लद्दाख बचाओ आंदोलन के तहत दो बड़े अनशन कर चुके हैं। वांगचुक ने 6 मार्च 2024 से शून्य से नीचे तापमान में 21 दिन का 'क्लाइमेट फास्ट किया था। इसके बाद अक्तूबर 2024 में उन्होंने 16 दिन की एक और भूख हड़ताल की। उनकी प्रमुख मांगें थीं कि लद्दाख को राज्य का दर्जा दिया जाए, संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किया जाए और क्षेत्र के पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। हालांकि उनकी मांग पूरी नहीं हुई।
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