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सोनम वांगचुक: डिंपल यादव बोलीं- BJP वाले सफेद चादर का कफन लेकर आए, अखिलेश ने कहा- भाजपा सरकार नहीं अहंकार है

Sat, 18 Jul 2026 10:24 AM IST
Akash Dwivedi डिजिटल डेस्क, लखनऊ
डिजिटल डेस्क, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Sat, 18 Jul 2026 10:24 AM IST
सार

सांसद ने सामाजिक कार्यकर्ता को अस्पताल ले जाने की पुलिस कार्रवाई पर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए इसे लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध का सम्मान होना चाहिए। घटना के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और विभिन्न दल अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

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Dimple Yadav Slams BJP Over Sonam Wangchuk Hospitalisation Calls It an Attack on Democratic Voices
सोनम वांगचुक को सपा का साथ - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

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समाजवादी पार्टी सांसद डिंपल यादव ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाने की घटना को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा- 'बीजेपी वाले देश के लिए सफेद चादर का कफन लेकर आए हैं। जब शांतिपूर्ण आवाजो को दबाया जाता है, तो संविधान और लोकतंत्र भी आहत होते हैं। सोनम वांगचुक जैसे लोगों की आवाज दबाना, देश की आत्मा को दबाना है।'

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अखिलेश यादव बोले- भाजपा सरकार नहीं, अहंकार है

अखिलेश यादव ने अपने एक्स अकाउंट से लिखा- सोनम वांगचुक जी को ‘बल-प्रयोग’ करके, जबरदस्ती उनके आमरण अनशन स्थल से उठाकर ले जाना अत्यंत निंदनीय समाचार है। आज सुबह घटी ये घटना थोड़ी ही देर में पूरे देश और संपूर्ण विश्व में फैल चुकी है। सारी दुनिया और देशभर में श्री सोनम वांगचुक जी को लेकर गहरी चिंता है और भाजपा सरकार के ख़िलाफ़ आक्रोश भी। जो लोग सादी वर्दी में इस कार्रवाई को अंजाम देने के लिए धोखे से अचानक घुसे थे, उनकी पहचान सार्वजनिक की जाए। 

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ये हमारी पुरजोर माग है कि सोनम वांगचुक जी की चिकित्सा ‘न्यायिक निगरानी’ में हो क्योंकि सोनम वांगचुक जी का जीवन मानवता, पर्यावरण-संरक्षण, लोकतांत्रिक मूल्यों, युवा ऊर्जा की प्रेरणा, साइंस और इनोवेशन के लिए अनमोल है। 

हमारे देश की जनता व समस्त विश्व इस समय भाजपा सरकार को संदेह और सवाल भरी संदिग्ध नज़र से देख रहा है। दमनकारी राजनीति करनेवाली भाजपा सरकार की इस अवांछनीय कार्रवाई ने इंटरनेशनल लेवल पर हमारे देश की मानवीय और डेमोक्रेटिक इमेज को बेहद धूमिल और खंडित करने का काम किया है। 
 

भाजपा ने न कभी गांधी जी में विश्वास किया, न कभी उनके गांधीवादी तौर-तरीकों में। भाजपा की नकारात्मक विचारधारा ही ‘विवाद’ की है; संवाद की नहीं।
भाजपा निराशा का पर्याय बन चुकी है। भाजपा सरकार नहीं, अहंकार है!

भाजपा की सोच दरारवादी है, इसीलिए जहां भी एकता, सौहार्द और एकजुटता होती है, भाजपा डरकर प्रतिक्रियावादी बनकर आंदोलनों को तितर-बितर कर देती है लेकिन भाजपा भूल गयी है कि आज की नई पीढ़ी ‘डिजिटल यूनिटी’ के माध्यम से वैचारिक क्रांति लाने में सक्षम है। ऐसा हुआ है, हो रहा है और होगा भी। 

दरअसल, शनिवार सुबह दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को पुलिस सफदरजंग अस्पताल लेकर गई। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया, जिससे मौके पर हंगामे की स्थिति बन गई। 

ये पुलिस नहीं आरएसएस के गुंडे हैं

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि 'सुबह सात बजे जब मैं फ्रेश होने के लिए यहां से निकला, तो पुलिस के गुंडे वहां आए। वे सोनम सर को गालियां देते हुए घसीटकर लेकर गए। 60 साल का एक व्यक्ति, जो 20 दिनों से भूख हड़ताल पर था उन्हें दिल्ली पुलिस जबरदस्ती घसीटकर यहां से लेकर गई।

हमें नहीं पता कि कहां लेकर गए हैं। जैसे ही मुझे खबर मिली, मैं जंतर-मंतर आ रहा था, तो पुलिस ने मेरे साथ भी मारपीट की। ये पुलिस नहीं आरएसएस के गुंडे हैं। मैं विदेश से अपने देश वापस आया था, क्या मैं कोई अपराधी हूं? मुझे इन लोगों ने सड़कों पर मारा।

 

सोनम वांगचुक 21 दिनों से अनशन पर बैठे

सोनम वांगचुक पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 21 दिनों से अनशन पर बैठे हैं। लंबे अनशन के कारण उनकी सेहत लगातार बिगड़ रही थी और उनका वजन करीब 9.5 किलोग्राम कम हो चुका है।

इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश दिया था कि वांगचुक का प्रतिदिन मेडिकल परीक्षण कराया जाए और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जाए। इसी आदेश के अनुपालन में पुलिस उन्हें शनिवार सुबह अस्पताल लेकर गई। घटना के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।


 

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