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Cambridge University: कैम्ब्रिज के सबसे युवा अश्वेत प्रोफेसर मृत पाए गए, साहित्यिक चोरी के आरोपों से थे घिरे

Sat, 15 Aug 2026 11:17 AM IST
Shahin Praveen पीटीआई
पीटीआई Published by: Shahin Praveen Updated Sat, 15 Aug 2026 11:17 AM IST
सार

Plagiarism Allegations: कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के सबसे युवा अश्वेत प्रोफेसर के रूप में पहचान बनाने वाले एक शिक्षाविद मृत पाए गए हैं। हाल के महीनों में उन पर साहित्यिक चोरी (प्लेजरिज्म) के आरोप लगे थे, जिसके बाद वे चर्चा में रहे। उनकी मौत के कारणों की जांच की जा रही है।

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Cambridge’s Youngest Black Professor Found Dead Amid Plagiarism Allegations
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Plagiarism Allegations: कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के एक ब्रिटिश समाजशास्त्री, जिन्होंने साहित्यिक चोरी के सार्वजनिक आरोपों और मीडिया की जांच-पड़ताल के कारण पिछले हफ्ते इस्तीफा दे दिया था, शुक्रवार को मृत पाए गए।

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जेसन अर्डे, जो 2023 में कैम्ब्रिज के सबसे युवा अश्वेत प्रोफेसर बने थे (तब वे 37 साल के थे), ने मीडिया के भारी दबाव के बाद इस्तीफा दे दिया था। उन पर अपने एकेडमिक काम में साहित्यिक चोरी के आरोप लगे थे और उनकी एथलेटिक व फंडरेजिंग उपलब्धियों के दावों पर भी सवाल उठाए गए थे।
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'द टाइम्स' और 'टेलीग्राफ' अखबारों के साथ-साथ BBC और Sky News ने रिपोर्ट दी कि 41 वर्षीय अर्डे शुक्रवार दोपहर दक्षिण लंदन के बैटरसी में एक घर के अंदर "बेसुध" (कोई प्रतिक्रिया न देने वाली हालत में) पाए गए।

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दक्षिण लंदन में घर के अंदर मृत मिले प्रोफेसर जेसन अर्डे

मकैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के एक ब्रिटिश समाजशास्त्री, जिन्होंने साहित्यिक चोरी के सार्वजनिक आरोपों और मीडिया की जांच-पड़ताल के कारण पिछले हफ्ते इस्तीफा दे दिया था, शुक्रवार को मृत पाए गए।


जेसन अर्डे, जो 2023 में कैम्ब्रिज के सबसे युवा अश्वेत प्रोफेसर बने थे (तब वे 37 साल के थे), ने मीडिया के भारी दबाव के बाद इस्तीफ़ा दे दिया था। उन पर अपने एकेडमिक काम में साहित्यिक चोरी के आरोप लगे थे और उनकी एथलेटिक व फंडरेजिंग उपलब्धियों के दावों पर भी सवाल उठाए गए थे।

'द टाइम्स' और 'टेलीग्राफ' अखबारों के साथ-साथ BBC और Sky News ने रिपोर्ट दी कि 41 वर्षीय अर्डे शुक्रवार दोपहर दक्षिण लंदन के बैटरसी में एक घर के अंदर "बेसुध" (कोई प्रतिक्रिया न देने वाली हालत में) पाए गए।

आरोपों के बावजूद अपने पक्ष पर कायम रहे अर्डे

शिक्षा के समाजशास्त्र के प्रोफेसर पद से इस्तीफा देते हुए, अर्डे ने एक बयान में लिखा कि "लगातार आरोपों, अटकलों और सार्वजनिक टिप्पणियों ने मुझ पर और मेरे प्रियजनों पर गहरा असर डाला है"।

उन्होंने कहा कि उनके पद छोड़ने को "मेरे बारे में फैलाई गई बातों को सच मान लेने की गलती नहीं समझी जानी चाहिए"। उन्होंने साहित्यिक चोरी के आरोपों से इनकार किया, लेकिन अपनी डॉक्टरेट पर काम करते समय कुछ गलतियां होने की बात स्वीकार की। दो दर्जन से ज्यादा शिक्षाविदों और राजनेताओं समेत उनके समर्थकों ने साहित्यिक चोरी (प्लेजरिज्म) के आरोपों को "बदनाम करने की साजिश" बताया है। उनका कहना है कि यह साजिश अर्डे और "अहम पदों" पर बैठे अन्य अश्वेत लोगों की साख को कमजोर करने के लिए रची गई है।



कैम्ब्रिज में अर्डे की नियुक्ति ने उनकी निजी कहानी को सबके सामने ला दिया। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने डिस्लेक्सिया, विकास में देरी और ऑटिज्म जैसी चुनौतियों का सामना किया। इन वजहों से वे 11 साल की उम्र तक बोल नहीं पाते थे और किशोरावस्था के आखिरी वर्षों तक पढ़ना-लिखना नहीं जानते थे।

कैम्ब्रिज साहित्यिक चोरी के आरोपों की जांच कर रहा है।

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