The Conversation: दस से बीस साल की नौकरी करने के बाद आ सकता है तनाव, इसे कुछ सहज उपायों से संभाला जा सकता है
मिड-करियर चरण में ठहराव, दोहरी जिम्मेदारियां, तकनीकी बदलाव और उद्देश्य को लेकर असंतोष जैसी चुनौतियां उभरती हैं। समय रहते कौशल उन्नयन, लक्ष्य निर्धारण और संतुलन बनाकर बर्नआउट व पेशेवर ठहराव से बचा जा सकता है।
विस्तार
जब आप कॅरिअर के मध्य चरण में होते हैं या यूं कहें कि नौकरी के दस से बीस साल पूरे कर लेते हैं, तो इसे अक्सर स्थिरता और अनुभव का दौर माना जाता है। इस समय लोगों से कुशलता और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जाती है। लेकिन सच यह है कि इस दौर में कई लोग अंदर ही अंदर कई चुनौतियों से गुजरते हैं। ये चुनौतियां उनकी प्रेरणा, काम करने की क्षमता और मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं।
शुरुआती कॅरिअर की परेशानियों पर अक्सर खुलकर बात होती है और रिटायरमेंट के करीब आने वाले बदलावों की भी पहले से तैयारी रहती है। लेकिन कॅरिअर के मध्य आने पर इसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। समय रहते इन चुनौतियों को समझना और इनसे निपटना जरूरी है, ताकि बर्नआउट या काम में ऊब जैसी समस्याएं न बढ़ें।
कॅरिअर में ठहराव को तोड़ें
कॅरिअर के मध्य में अक्सर लोगों को ठहराव महसूस होता है, जब वर्षों की मेहनत के बाद पदोन्नति धीमी पड़ जाती है और आगे बढ़ने के अवसर सीमित दिखाई देते हैं। इससे निराशा और आत्म-संदेह बढ़ सकता है, खासकर तब जब युवा सहकर्मी तेजी से आगे बढ़ते दिखें। ऐसी स्थिति में नई जिम्मेदारियां लेना, स्पष्ट कॅरिअर लक्ष्य तय करना, मेंटर से मार्गदर्शन लेना और पेशेवर नेटवर्क मजबूत करना जैसे कदम ठहराव को तोड़कर कॅरिअर में नई दिशा और ऊर्जा ला सकते हैं।
दोहरी जिम्मेदारियों का संतुलन
कॅरिअर के मध्य में दफ्तर और घर की दोहरी जिम्मेदारियां तथा लगातार काम का दबाव तनाव और बर्नआउट को बढ़ा सकता है, जिससे भावनात्मक थकान और उपलब्धि की कमी महसूस होने लगती है। यदि इसे नजरअंदाज किया जाए, तो यह स्वास्थ्य और कार्यक्षमता पर असर डालता है। इसलिए समय रहते संकेत पहचानना, स्पष्ट सीमाएं तय करना, प्राथमिकताएं निर्धारित करना, जिम्मेदारियों का बंटवारा करना और स्वयं की देखभाल को महत्व देना जरूरी है।
सीखते रहें
तेजी से बदलती तकनीक मध्य-कैरिअर वाले पेशेवरों के लिए चुनौती बन सकती है, क्योंकि पुराने कौशल अप्रासंगिक होते जाते हैं और नौकरी की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती है। नई स्किल सीखना मौजूदा जिम्मेदारियों के साथ कठिन लगता है। ऐसी स्थिति में निरंतर कौशल उन्नयन, छोटे-छोटे लर्निंग लक्ष्य तय करना, ऑनलाइन कोर्स या प्रशिक्षण का लाभ उठाना और अपने अनुभव को नई तकनीक के साथ जोड़कर मजबूत बनाना जरूरी है, ताकि आत्मविश्वास और पेशेवर प्रासंगिकता बनी रहे।
मूल्यों पर पुनर्विचार करें
इस दौरान लोग अपने काम के अर्थ और उद्देश्य पर सवाल उठाने लगते हैं, जिससे असंतोष बढ़ सकता है। साथ ही, नौकरी में नई शुरुआत के डर के कारण आप बदलाव से हिचकते हैं और ठहराव में फंसे रहते हैं। ऐसे में अपने मूल्यों और लक्ष्यों पर पुनर्विचार करें और नए अवसर तलाशें, ताकि स्थिरता के साथ आगे बढ़ा जा सके।
- द कन्वर्सेशन