IIT: आईआईटी में सीट भरने के लिए एमटेक पाठ्यक्रम में होगा बदलाव; संस्थानों को देनी होगी संयुक्त रिपोर्ट
IIT MTech Courses: आईआईटी में एमटेक सीटें भरने के लिए पाठ्यक्रम में बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। सभी संस्थानों को संयुक्त रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके आधार पर नया कोर्स डिजाइन किया जाएगा। यह नया पाठ्यक्रम खास क्षेत्रों पर केंद्रित होगा।
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IIT: सरकार आईआईटी की एमटेक सीट भरने के लिए पाठ्यक्रम में बदलाव करेगी। इसे लेकर समीक्षा चल रही है। इसमें ध्यान रखा जाएगा कि डिग्री के बाद युवाआ युवाओं को रोजगार मिलने में परेशानी नहीं हो। नया पाठ्यक्रम विशेष क्षेत्र पर केंद्रित होगा। इसमें दोहरा एमटेक यानी अनुसंधान एवं उद्योग, बहु-विषयक एमटेक और मिश्रित पद्धति (ऑनलाइन और ऑफलाइन) आदि को शामिल किया जाएगा। इसके लिए सभी 21 आईआईटी पाठ्यक्रम में बदलाव के लिए साथ कर सरकार को रिपोर्ट देंगे।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आईआईटी में पाठ्यक्रम एवं दाखिला निर्धारण पर काम करने वाली सर्वोच्च नियामक इकाई आईआईटी काउंसिल में विभिन्न आईआईटी ने एमटेक सीट खाली रहने का मुद्दा उठाया है। उनका मानना है कि एमटेक की सीटें खाली रह जाती हैं। आईआईटी से बीटेक उत्तीर्ण उम्मीदवार उसी कैंपस में एमटेक में दाखिला नहीं लेना चाहते हैं। इसका सबसे प्रमुख कारण रोजगार की कमी और एमटेक में इंडस्ट्री इंटर्नशिप का अभाव है। स्नातक डिग्री के बाद उन्हें स्नातकोत्तर में विशिष्टीकरण प्रोग्राम का विकल्प नहीं मिलता है।
नए बदलाव में एमटेक पाठ्यक्रमों की वर्तमान स्थिति, उद्योग की उभरती जरूरतों, प्रस्तावित सुधारों और आगे की रणनीति तय होगी। आईआईटी विशेषज्ञ अपनी रिपोर्ट सरकार को देंगे। सरकार की मंजूरी के बाद आईआईटी प्रबंधन एमटेक पाठ्यक्रम को संशोधित करेगा। इसमें इंडस्ट्री विशेषज्ञ भी शामिल होंगे, ताकि वे अपनी जरूरतों के आधार पर बदलाव करते हुए नए विषय शामिल कर सकें।
क्या-क्या होंगे बदलाव?
खास बात है बदलाव में एमटेक में इंडस्ट्री इंटर्नशिप को भी शामिल करना है। उत्पाद आधारित पाठ्यक्रम शुरू करने की सिफारिश भी है, जिनमें शोध प्रकाशन अनिवार्य नहीं होते हैं।
किस वर्ष कितनी सीटें रहीं खाली
एमटेक की सीटें लगातार खाली रह रही हैं। वर्ष 2020-21 में एमटेक में 3,229 सीट और वर्ष 2021-22 में 3,083 सीट खाली रह गई हैं। इसका असर सीधा पीएचडी पाठ्यक्रमों पर भी पड़ा है। वर्ष 2020 में पीएचडी में 1,779 तो वर्ष 2021 में यह आंकड़ा 1,852 था। इसका प्रमुख कारण आईआईटी में उन्नत और अनुसंधान कार्यक्रमों में रिक्तियां हैं।