UP Board Exam: नकल करने वाले छात्रों के अभिभावकों से संवाद की जरूरत: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल
Uttar Pradesh Governor: उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने परीक्षा प्रणाली में अनुशासन और सुधार पर जोर देते हुए कहा कि अनुचित साधनों का प्रयोग करते पकड़े गए छात्रों के अभिभावकों से बातचीत की जानी चाहिए, ताकि इसके पीछे की परिस्थितियों को समझा जा सके।
विस्तार
Anandiben Patel: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि जो छात्र परीक्षा में नकल या गलत तरीके अपनाते हैं, उनके माता-पिता को बुलाकर उनसे बात करनी चाहिए। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि बच्चे किन कारणों से ऐसा करने को मजबूर हुए।
राजभवन द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, राज्यपाल की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय ने अपने डिजिटल परीक्षा तंत्र पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी।
प्रस्तुति के दौरान, विश्वविद्यालय ने बताया कि पारदर्शिता, निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, विश्वविद्यालय के कमांड सेंटर से सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से परीक्षा हॉलों की लाइव निगरानी की जाती है।
परीक्षा निगरानी और छात्रों की मानसिक स्थिति पर जोर
प्रस्तुति के दौरान, विश्वविद्यालय ने बताया कि पारदर्शिता, निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विश्वविद्यालय के कमांड सेंटर से सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से परीक्षा हॉलों की लाइव निगरानी की जाती है।
पटेल ने कहा, “परीक्षा में नकल करते पाए गए छात्रों के अभिभावकों को बुलाकर उनसे बात की जानी चाहिए और उन परिस्थितियों को समझने का प्रयास किया जाना चाहिए जिनके कारण छात्र ऐसे कृत्यों में लिप्त हुए। संवाद बच्चों को सही दिशा में मार्गदर्शन करने का एक प्रभावी माध्यम है।”
गुजरात में मंत्री और मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के अनुभवों को साझा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि कक्षा 10 और 12 की परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद, कुछ छात्र असफलता के कारण आत्महत्या के विचारों तक पहुंच गए थे।
उत्तर पुस्तिका जांच में सावधानी की जरूरत
उन्होंने बताया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से छात्रों और अभिभावकों से बातचीत की और उत्तर पुस्तिकाएं मंगवाईं, जिनमें से कई में कई पृष्ठ खाली थे। उन्होंने अभिभावकों को स्कूलों का दौरा करने, शिक्षकों से मुद्दों पर चर्चा करने और बच्चों को पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित करने की सलाह दी।
पटेल ने इस बात पर जोर दिया कि उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के दौरान, त्रुटियों को संबंधित स्थान पर स्पष्ट रूप से चिह्नित किया जाना चाहिए ताकि पुनर्मूल्यांकन चाहने वाले छात्र अपनी कमियों को समझ सकें।
बच्चों के शैक्षणिक प्रदर्शन के प्रति अभिभावकों की संवेदनशीलता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि मूल्यांकन प्रक्रिया अत्यंत सावधानी से की जानी चाहिए और गलत मूल्यांकन के मामलों में आर्थिक दंड का प्रावधान होना चाहिए।