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CBSE: क्या अब 10वीं पास करने के लिए तीसरी भाषा में भी पास होना जरूरी होगा? सीबीएसई ने बताए नए नियम, यहां जानें

Tue, 14 Jul 2026 12:06 PM IST
Akash Kumar एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: Akash Kumar Updated Tue, 14 Jul 2026 12:06 PM IST
सार

CBSE: सीबीएसई ने एनईपी 2020 के तहत तीन भाषा व्यवस्था को लागू करने के लिए नए नियम जारी किए हैं। नए नियम 2026-27 शैक्षणिक सत्र से लागू होंगे। हालांकि, यह नियम सभी छात्रों पर एक साथ लागू नहीं होगा। सीबीएसई ने अलग-अलग कक्षाओं के लिए अलग व्यवस्था तय की है। आइए समझते हैं नए नियमों में क्या व्यवस्था रखी गई है।
 

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CBSE Makes Third Language Mandatory for Class 10 Pass Certificate Under NEP 2020, Check details here
CBSE Three Language Formula - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

CBSE: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से तीन-भाषा फॉर्मूले को पूरी तरह से लागू करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) की सिफारिशों पर आधारित इस नीति का उद्देश्य भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना और छात्रों का समग्र विकास सुनिश्चित करना है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इस नए नियम से स्कूल और छात्रों की पढ़ाई में क्या बदलाव आने वाले हैं।

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क्या है तीन-भाषा फॉर्मूला और इसके मुख्य नियम क्या हैं?

इस नई योजना का मुख्य उद्देश्य भाषा सीखने की प्रक्रिया को बोझ बनाने के बजाय इसे एक मजेदार और समृद्ध अनुभव बनाना है। इसके मूल नियम इस प्रकार हैं:

  • दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य: छात्र जिन तीन भाषाओं को चुनेंगे, उनमें से कम से कम दो भाषाएं मूल भारतीय भाषाएं होनी चाहिए।
  • तीसरी भाषा का विकल्प: किसी गैर-भारतीय भाषा (जैसे अंग्रेजी या फ्रेंच) को तीसरी भाषा के रूप में तभी चुना जा सकता है, जब बाकी की दोनों भाषाएं भारतीय भाषाएं हों।
  • भारतीय भाषाओं की परिभाषा: इसमें हिंदी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, मराठी, बंगाली, पंजाबी, गुजराती, उड़िया और असमिया जैसी भाषाएं शामिल हैं।
  • गैर-भारतीय भाषाएं: इसमें अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, अरबी और स्पेनिश जैसी विदेशी भाषाएं शामिल हैं।
     
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किस क्लास के छात्र पर क्या असर पड़ेगा?

  • कक्षा 10वीं के छात्र (सत्र 2026-27): इस बैच के लिए नियमों में कोई बदलाव नहीं है। ये छात्र पुरानी व्यवस्था के अनुसार दो-भाषा प्रणाली के तहत ही पढ़ाई जारी रखेंगे और उन्हें तीसरी भाषा पढ़ने की जरूरत नहीं होगी।
  • कक्षा 9वीं के छात्र (सत्र 2026-27): इन छात्रों को अनिवार्य रूप से तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होंगी। तीसरी भाषा का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर आंतरिक परीक्षा (Internal Assessment) के जरिए होगा। अगर कोई छात्र इस आंतरिक मूल्यांकन में फेल हो जाता है, तो भी उसे 10वीं कक्षा (सत्र 2027-28) में प्रमोट कर दिया जाएगा, लेकिन उसे 10वीं में रहते हुए 9वीं की इस परीक्षा को पास करना होगा। सीबीएसई का पासिंग सर्टिफिकेट लेने के लिए इसे क्लियर करना अनिवार्य है। जब यह बैच 10वीं में पहुंचेगा, तब तीसरी भाषा के लिए कोई सीबीएसई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी।
  • कक्षा 7वीं और 8वीं के छात्र (सत्र 2026-27): जब ये छात्र 9वीं और 10वीं कक्षा में पहुंचेंगे, तो ये भी तीन भाषाओं की पढ़ाई जारी रखेंगे, जिसमें दो भारतीय भाषाएं होंगी। जो छात्र पहले से दो गैर-भारतीय भाषाएं पढ़ रहे हैं, उन्हें एक भारतीय भाषा अतिरिक्त जोड़नी होगी। इनका मूल्यांकन भी 9वीं कक्षा की तरह केवल आंतरिक स्कूल आधारित परीक्षा से होगा, कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी।
  • कक्षा 6वीं के छात्र (सत्र 2026-27): इनके लिए नियम थोड़े अलग हैं। इन्हें तीन में से दो भारतीय भाषाएं पढ़नी होंगी। जब यह बैच और इसके बाद के सभी कक्षा 6 के बैच आगे चलकर 10वीं कक्षा में पहुंचेंगे, तो उन्हें तीसरी भाषा के लिए सीबीएसई की बोर्ड परीक्षा देनी होगी।
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6वीं से लागू होगा तीन भाषा फॉर्मूला

सीबीएसई इससे पहले 29 जून को भी तीन भाषा फॉर्मूला लागू करने का एलान कर चुका है। इसके तहत 2026-27 सत्र से 6वीं कक्षा से छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी। इन तीन भाषाओं में कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी होगा।

जो छात्र पहले से अंग्रेजी के साथ कोई विदेशी भाषा पढ़ रहे हैं, वे उसे जारी रख सकेंगे। लेकिन इसके साथ उन्हें एक अतिरिक्त भारतीय भाषा भी पढ़नी होगी।

अब तक ज्यादातर छात्र 8वीं के बाद तीसरी भाषा छोड़ देते थे। लेकिन नए नियम के बाद 2026-27 से 9वीं और 2027-28 से 10वीं में भी तीसरी भाषा पढ़ना अनिवार्य हो जाएगा। हालांकि, 2026-27 में 10वीं बोर्ड परीक्षा देने वाले मौजूदा छात्रों पर इस नियम का कोई असर नहीं पड़ेगा।

क्या इस नियम में किसी को छूट भी मिलेगी?

सीबीएसई ने अलग-अलग परिस्थितियों को देखते हुए कुछ विशेष मामलों में छूट भी प्रदान की है:

  • विशेष आवश्यकता वाले बच्चे (CwSN): दिव्यांग जन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को नियमों में छूट और रियायतें दी जाएंगी।
  • भारत के बाहर के स्कूल: विदेशों में स्थित सभी सीबीएसई स्कूलों को तीसरी भाषा के रूप में भारतीय भाषा चुनने की अनिवार्यता से पूरी तरह छूट दी गई है।
  • विदेशी छात्र: विदेश से भारत लौटने वाले विदेशी मूल के छात्रों को भी तीसरी भाषा के रूप में भारतीय भाषा पढ़ने से छूट दी गई है।
  • राज्यों के बीच ट्रांसफर होने पर (Migration): यदि माता-पिता या अभिभावक का ट्रांसफर दूसरे राज्य में होता है, तो छात्र अपनी पुरानी तीसरी भाषा के कॉम्बिनेशन को ही कक्षा 9वीं में जारी रख सकता है। स्कूलों को इसके लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने होंगे।

 

स्कूलों को नए नियम लागू करने में क्या मदद मिलेगी?

इस बड़े बदलाव को आसान बनाने के लिए सीबीएसई और एनसीईआरटी स्कूलों को पूरा सहयोग दे रहे हैं:

  • किताबें और पाठ्यक्रम: एनसीईआरटी अपनी वेबसाइट पर संसाधन उपलब्ध करा रही है। संविधान की 22 भारतीय भाषाओं में कक्षा 6वीं के लिए तीसरी भाषा की विशेष किताबें तैयार की जा रही हैं।
  • मूल्यांकन का ढांचा: कक्षा 9वीं की तीसरी भाषा के मूल्यांकन से जुड़ी गाइडलाइंस शैक्षणिक वेबसाइट cbseacademic.nic.in पर देखी जा सकती हैं।
  • शिक्षकों की व्यवस्था: स्कूलों में शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए स्कूलों को छूट दी गई है कि वे योग्य मौजूदा शिक्षकों की मदद ले सकते हैं, रिटायर्ड या पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षकों को रख सकते हैं, सहोदय क्लस्टर के तहत आपस में शिक्षक साझा कर सकते हैं या ऑनलाइन/हाइब्रिड माध्यम से पढ़ाई करवा सकते हैं।

नए नियम को अदालत में चुनौती

सीबीएसई के इस फैसले को अदालत में चुनौती भी दी गई है। तीन भाषा फॉर्मूला को लेकर दायर याचिका पर फिलहाल सुनवाई चल रही है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की है कि सीबीएसई के उस पुराने फैसले को बहाल किया जाए, जिसमें 9वीं कक्षा में तीसरी भाषा को अनिवार्य बनाने की व्यवस्था को 2029-30 तक टाल दिया गया था।

वहीं, केंद्र सरकार ने इस नीति का बचाव किया है। सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने का अधिकार केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के पास है।

सरकार के मुताबिक, तीन भाषा फॉर्मूला से छात्रों में बहुभाषी क्षमता बढ़ेगी, भारतीय भाषाओं को बढ़ावा मिलेगा और सांस्कृतिक विविधता को मजबूती मिलेगी।

क्यों अहम माना जा रहा है यह फैसला?

सीबीएसई के इस फैसले के बाद पहली बार तीसरी भाषा को सीधे 10वीं के पास सर्टिफिकेट से जोड़ दिया गया है। भले ही इसकी परीक्षा बोर्ड एग्जाम का हिस्सा नहीं होगी, लेकिन स्कूल स्तर पर होने वाले मूल्यांकन में सफल हुए बिना छात्र को 10वीं का पास प्रमाणपत्र नहीं मिलेगा। 

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