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WBSSC Recruitment Scam: शिक्षक भर्ती घोटाले में टीएमसी युवा नेता कुंतल घोष गिरफ्तार, ईडी ने की थी छापेमारी

एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: देवेश शर्मा Updated Sat, 21 Jan 2023 11:50 AM IST
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सार

WBSSC Recruitment Scam: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने लगातार दो दिनों तक पूछताछ के बाद पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाले (West Bengal Teacher Recruitment) में तृणमूल कांग्रेस की युवा शाखा (TMC's Youth Wing) के सदस्य कुंतल घोष (Kuntal Ghosh) को गिरफ्तार कर लिया है।

ED arrested Trinamool Congress youth leader Kuntal Ghosh in connection with the teachers recruitment jobs scam
TMC youth leader Kuntal Ghosh - फोटो : Social Media
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विस्तार

WBSSC Recruitment Scam:  प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने लगातार दो दिनों तक पूछताछ के बाद पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाले (West Bengal Teacher Recruitment) में तृणमूल कांग्रेस की युवा शाखा (TMC's Youth Wing) के सदस्य कुंतल घोष (Kuntal Ghosh) को गिरफ्तार कर लिया है। घोष हुगली से टीएमसी की यूथ विंग के सदस्य हैं, जिनके फ्लैट पर ईडी के अधिकारियों ने शुक्रवार को मामले के सिलसिले में छापा मारा था।

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सूत्रों ने बताया कि कुंतल घोष को सबूतों के आधार पर गिरफ्तार किया गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कोलकाता में ईडी के अधिकारियों ने घोष के चिनार पार्क स्थित अपार्टमेंट में रातभर ली गई तलाशी के बाद शनिवार सुबह उन्हें पहले हिरासत में लिया था और फिर बाद में गिरफ्तार कर लिया। 

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सीबीआई के अनुसार, 2014 और 2021 के बीच पूरे पश्चिम बंगाल में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए टीएमसी नेताओं द्वारा कथित तौर पर 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई गई थी। बंगाल के निजी संचालित कॉलेजों और संस्थानों के संघ के अध्यक्ष तपस मंडल ने सीबीआई द्वारा पूछताछ के दौरान कुंतल घोष पर नौकरी चाहने वालों से पैसे उगाहने का आरोप लगाया था। पिछले साल, राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को कक्षा नौ से 12वीं के लिए स्कूल सेवा आयोग की भर्ती में गिरफ्तार किया गया था, जिससे ममता बनर्जी सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई थी। 
 


सीबीआई को पिछले साल मई में 2014 और 2021 के बीच पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) और पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा गैर-शिक्षण कर्मचारियों (ग्रुप सी और डी) और शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति की जांच करने का निर्देश दिया गया था। कथित तौर पर चयन परीक्षा में विफल होने के बाद नौकरी पाने के लिए 5 लाख रुपये से 15 लाख रुपये तक की रिश्वत दी।


 

 
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