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Global Teacher Prize 2026: भारतीय शिक्षक रूबल नागी ने जीता ग्लोबल टीचर प्राइज, 10 लाख डॉलर का मिला इनाम

एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: शाहीन परवीन Updated Fri, 06 Feb 2026 11:55 AM IST
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सार

Indian Teachers: भारतीय शिक्षक रूबल नागी को ग्लोबल टीचर प्राइज 2026 से सम्मानित किया गया। उन्हें दुबई में हुए वर्ल्ड गवर्नमेंट समिट में यह पुरस्कार मिला, साथ ही 10 लाख डॉलर का इनाम भी मिला।

Indian Teacher Rouble Nagi Wins Global Teacher Prize 2026, Bags $1 Million Award
Pariksha pe charcha 2026 - फोटो : mediaoffice.ae/en/news/2026 (Edit by Amar ujala)
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विस्तार
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World Government Summit: भारतीय शिक्षिका रूबल नागी ने ग्लोबल टीचर प्राइज 2026 जीता है। उन्हें यह सम्मान दुबई में आयोजित वर्ल्ड गवर्नमेंट समिट के दौरान दिया गया, जिसमें उन्हें 10 लाख डॉलर की पुरस्कार राशि भी मिली।

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यह पुरस्कार GEMS Education द्वारा अपने 10वें संस्करण में प्रस्तुत किया गया। रूबल नागी को यह सम्मान दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने प्रदान किया।
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नागी को उपेक्षित दीवारों को इंटरैक्टिव शैक्षिक भित्ति चित्रों में बदलने के लिए सम्मानित किया गया, जो पढ़ने, लिखने, अंकगणित के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण जागरूकता भी सिखाते हैं।

10 लाख बच्चों को स्कूल से जोड़ने में रूबल नागी का योगदान

पिछले 20 वर्षों में रूबल नागी ने कला को पढ़ाई का जरिया बनाकर 10 लाख से ज्यादा बच्चों को स्कूल से जोड़ने में मदद की है। उन्हें 139 देशों से आए 5,000 से ज्यादा नामांकनों में से चुना गया।

रूबल नागी आर्ट फाउंडेशन के जरिए उन्होंने पूरे भारत में 800 से अधिक शिक्षा केंद्र खोले हैं। ये केंद्र 100 से ज्यादा गरीब समुदायों और गांवों में बच्चों के लिए सुरक्षित और प्रेरणादायक जगह बनाते हैं।

ये केंद्र उन बच्चों को मदद करते हैं जो स्कूल से बाहर हैं - उन्हें शिक्षा में वापस लाने, पढ़ाई में सहारा देने, मनोसामाजिक मदद और रचनात्मक गतिविधियाां देने में सहायता मिलती है।

सीखने की जीवंत दीवारों के जरिए शिक्षा में क्रांति

रूबल नागी की शिक्षण पद्धति का मुख्य आधार ‘सीखने की जीवंत दीवारें’ है। इसमें परित्यक्त दीवारों को खुली कक्षाओं में बदलकर बच्चों के लिए सीखने का वातावरण बनाया जाता है।

नागी पूरे भारत में घूमती हैं, शिक्षकों को मार्गदर्शन देती हैं और बच्चों के साथ सीधे काम करती हैं। उन्होंने 600 से अधिक शिक्षकों और स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित किया है, जिससे एक ऐसा मॉडल तैयार हुआ है जिसे बड़े पैमाने पर लागू किया जा सकता है और जो बच्चों की शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक जरूरतों को पूरा करता है।

उनके कार्यक्रमों ने स्कूल छोड़ने की दर में 50% से ज्यादा कमी लाई है और बच्चों के लंबे समय तक पढ़ाई में बने रहने में जरूरी सुधार किया है।

सीखने की जीवंत दीवारों के जरिए शिक्षा में नवाचार

रूबल नागी की शिक्षण पद्धति का मुख्य आधार ‘सीखने की जीवंत दीवारें’ है, जिसमें परित्यक्त दीवारों को खुली कक्षाओं में बदलकर बच्चों के लिए सीखने का वातावरण तैयार किया जाता है।

रूबल नागी ने यह भी योजना बनाई है कि पुरस्कार राशि का उपयोग ऐसे व्यावसायिक संस्थान की स्थापना में किया जाएगा, जो व्यावसायिक कौशल और डिजिटल साक्षरता में मुफ्त प्रशिक्षण देगा। इसका उद्देश्य है लाखों वंचित युवाओं के लिए जीवन के अवसर बदलना।

ग्लोबल टीचर प्राइज को यूनेस्को और वर्की फाउंडेशन ने विश्व सरकार शिखर सम्मेलन के दौरान प्रस्तुत किया, और इसे जीईएमएस एजुकेशन द्वारा आयोजित किया गया। यह पुरस्कार शिक्षण में उनके असाधारण योगदान को सम्मानित करता है।
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