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Karnataka: स्कूलों में सफाई को लेकर छिड़ी बहस, छात्रों के श्रमदान पर अलग-अलग राय; जानें किसने क्या कहा

जॉब्स डेस्क, अमर उजाला Published by: Shahin Praveen Updated Wed, 25 Mar 2026 12:19 PM IST
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सार

Karnataka Assembly: कर्नाटक विधानसभा में हाल ही में स्कूलों की सफाई और छात्रों के श्रमदान को लेकर चर्चा हुई। इसमें यह सवाल उठा कि क्या छात्रों को साफ-सफाई के काम में शामिल किया जाना चाहिए ताकि उनमें स्वच्छता की आदत विकसित हो सके, जबकि कुछ नेताओं ने इस पर बाल अधिकारों को लेकर चिंता भी जताई।

Karnataka: Debate erupts over school cleaning, differing views on student participation
कर्नाटक विधानसभा - फोटो : एएन
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विस्तार

Karnataka School: कर्नाटक विधानसभा में हाल ही में एक अहम मुद्दे पर चर्चा हुई। इसमें यह सवाल उठाया गया कि क्या छात्रों को स्कूल की सफाई करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि उनमें साफ-सफाई की अच्छी आदतें विकसित हों। 

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स्कूल शिक्षा और साक्षरता मंत्री मधु बंगारप्पा ने कहा कि यदि सदन इस संबंध में विधेयक पारित करने को तैयार है तो वे इसका स्वागत करेंगे। हालांकि, उन्होंने कहा कि "बाल अधिकारों" जैसे कारकों पर भी विचार किया जाना चाहिए।

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सफाईकर्मियों की कमी पर उठा मुद्दा

मंगलवार को पारित कर्नाटक राज्य सिविल सेवा (शिक्षकों के तबादलों का नियमन) (संशोधन) विधेयक पर चर्चा के दौरान, जेडी(एस) के सदन नेता ने 'डी ग्रुप' कार्यकर्ताओं की भर्ती की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्कूलों में सफाईकर्मियों की कमी है और बच्चों से ही परिसर की सफाई करवाई जाती है।

उन्होंने कहा, "सरकार को डी ग्रुप कार्यकर्ताओं की भर्ती करनी चाहिए या बच्चों को स्वयं सफाई करने की अनुमति देनी चाहिए।"

अध्यक्ष यू टी खादर ने कहा कि उन्होंने भी अपने स्कूली दिनों में अपने स्कूल परिसर की सफाई की थी। उन्होंने पूछा, "क्या बच्चों द्वारा स्कूल परिसर की सफाई करने में कोई समस्या है?"

"हमने स्कूल में ये सब करके ही सीखा है,खादर ने कहा और आगे कहा कि स्कूली बच्चों का कक्षाओं की सफाई करना बिलकुल ठीक है।"

डी ग्रुप कर्मचारियों की भर्ती बनाम छात्रों से सफाई 

उन्होंने कहा, "हम सभी, यहां तक कि कॉन्वेंट सिस्टम में पढ़े हुए भी, सुबह 7 बजे उठकर अपने स्कूल के मैदान, कक्षाएँ और यहाँ तक कि शौचालय भी साफ करते थे। अब न तो स्कूलों (सरकारी स्कूलों) में डी ग्रुप के कर्मचारी हैं और न ही आप (सरकार) बच्चों को यह काम करने की अनुमति दे रहे हैं।"

जवाब में मंत्री मधु बंगारप्पा ने कहा कि डी ग्रुप के कर्मचारियों को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं है, बल्कि स्कूलों के रखरखाव को लेकर है। “इसकी आवश्यकता है।”

वरिष्ठ भाजपा विधायक अरागा ज्ञानेंद्र ने बताया कि महात्मा गांधी स्वयं शौचालय साफ करते थे। उन्होंने कहा, "क्या हमारे बच्चे गांधी जी से बड़े हैं? उन्हें करने दीजिए और सीखने दीजिए। हमने भी यह किया है।"

बाल अधिकार और शिक्षा के माध्यम पर बहस

बाल अधिकारों का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा, "हम बाल अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर सकते (बच्चों को स्कूल परिसर साफ करने की अनुमति देकर)। हमें इन बातों पर विचार करना होगा... अगर सदन ऐसा कोई कानून बनाता है, तो मैं उसका स्वागत करूंगा।"

इस पर खादर ने जवाब दिया, "तो फिर इसे (सफाई को) कौशल विकास में शामिल कर लीजिए।"

सदन में वरिष्ठ कांग्रेस विधायकों के.एम. शिवलिंगे गौड़ा और बसवराज रायरेड्डी के बीच स्कूलों में शिक्षा के माध्यम को लेकर तीखी बहस भी हुई।

गौड़ा ने जोर देकर कहा कि बच्चों को प्रगति करने, काम करने और दुनिया भर में यात्रा करने के लिए अंग्रेजी सीखनी चाहिए, जबकि रायरेड्डी ने इस बात पर बल दिया कि कन्नड़ में पढ़ने वाले बच्चे भी कमतर नहीं हैं और शिक्षा का माध्यम व्यक्तिगत पसंद का अधिकार है।

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