Kerala: राज्यपाल अर्लेकर ने संस्कृत विश्वविद्यालय की VC गीताकुमारी को पद से हटाया, इन्हें मिला अतिरिक्त प्रभार
केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने कालडी स्थित श्री शंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय की कुलपति के.के. गीथाकुमारी को पद से हटा दिया है। एपीजे अब्दुल कलाम टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी की कुलपति सिजा थॉमस को फिलहाल अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
विस्तार
Kochi: केरल के राज्यपाल और राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति (चांसलर) राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने गुरुवार को एक बड़ा निर्णय लिया है। उन्होंने श्री शंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, कलाडी की कुलपति के के गीताकुमारी को उनके पद से हटा दिया।
राजभवन द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। हालांकि, नोटिफिकेशन में गीथाकुमारी को पद से हटाने का स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है।
सिजा थॉमस को सौंपी गई जिम्मेदारी
राज्यपाल के इस निर्णय के बाद सिजा थॉमस, जो एपीजे अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की कुलपति हैं, उन्हें श्री शंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। यह व्यवस्था अगले आदेश तक जारी रहेगी।
इस मामले पर प्रतिक्रिया जानने के लिए विश्वविद्यालय के प्रवक्ता से संपर्क करने की कई कोशिशें की गईं, लेकिन उनसे कोई जवाब नहीं मिल सका।
छात्र के परिणाम को लेकर उठा था विवाद
इस घटनाक्रम से पहले पिछले महीने विश्वविद्यालय से जुड़ा एक विवाद सामने आया था। उस समय राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की सिंडिकेट द्वारा लिए गए एक फैसले को रोक दिया था। यह फैसला एक छात्र को फेल से पास घोषित करने से जुड़ा था।
जानकारी के अनुसार, ए कलेश नाम का एक छात्र 2005 में बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स (BFA) कोर्स में असफल हो गया था। इसके बावजूद बाद में उसे मास्टर ऑफ फाइन आर्ट्स (MFA) कार्यक्रम में प्रवेश दे दिया गया, जिसे उसने वर्ष 2023 में पूरा कर लिया।
बाद में विश्वविद्यालय की सिंडिकेट ने कलेश को विशेष मामले के रूप में बीएफए की डिग्री देने का निर्णय लिया था। कलेश छात्र संगठन एसएफआई से जुड़ा बताया गया है।
हालांकि इस फैसले का विरोध हुआ और विश्वविद्यालय बचाओ अभियान समिति (Save University Campaign Committee) ने इस मामले को लेकर सरकार के पास शिकायत दर्ज कराई।
नियुक्तियों को लेकर भी लगे आरोप
सेव यूनिवर्सिटी कैंपेन कमेटी (SUCC) ने राज्यपाल के पास कुलपति के खिलाफ एक और शिकायत भी दर्ज कराई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि कुलपति ने सहायक प्रोफेसरों की भर्ती पर लगी रोक के आदेश का उल्लंघन किया और आगामी विधानसभा चुनाव से पहले शिक्षकों की नियुक्ति करने का फैसला लिया।
इस शिकायत के बाद राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने पिछले महीने विश्वविद्यालय में फैकल्टी नियुक्तियों पर रोक लगा दी थी।
इसके अलावा कुलपति पर यह आरोप भी लगाया गया कि उन्होंने नियमों का उल्लंघन करते हुए विश्वविद्यालय की जमीन क्रिकेट स्टेडियम बनाने के लिए आवंटित कर दी।
इन सभी विवादों के बीच राज्यपाल द्वारा कुलपति को पद से हटाने का निर्णय लिया गया है, हालांकि राजभवन की ओर से इस फैसले के पीछे की आधिकारिक वजह अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
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