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Rupal Jaiswal: 'कम पढ़ाई के साथ भी क्लियर कर सकते हैं...', 43वीं रैंक पाने वाली रूपल ने बताया सफलता का मंत्र

एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: Akash Kumar Updated Fri, 06 Mar 2026 07:27 PM IST
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सार

Rupal Jaiswal UPSC: खंडवा की रूपल धनंजय जायसवाल ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया 43वीं रैंक हासिल की है। यह उनका तीसरा प्रयास था। उन्होंने बताया कि रोज 8-10 घंटे नियमित पढ़ाई और परिवार के सहयोग से सफलता मिली। आइए जानते हैं कि इस सफलता को लेकर उनका क्या कहना है।
 

UPSC 2025: Khandwa’s Rupal Jaiswal Secures AIR 43, Shares Success Mantra of Consistency and Smart Study
माता-पिता के साथ रूपल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

UPSC CSE 2025 Result: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा 2025 का अंतिम परिणाम घोषित कर दिया है। आयोग ने मेरिट के आधार पर कुल 958 उम्मीदवारों को अलग-अलग सेवाओं में नियुक्ति के लिए अनुशंसित किया है। इनमें मध्य प्रदेश के खंडवा की रूपल धनंजय जायसवाल का नाम भी शामिल है। इस उपलब्धि पर बात करते हुए उन्होंने यूपीएससी की इस कठिन परीक्षा को पास करने का मंत्र भी बताया।

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पहले भी पास कर चुकीं है परीक्षा

मध्य प्रदेश के खंडवा की बेटी रूपल धनंजय जायसवाल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देशभर में 43वीं रैंक हासिल की है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। रूपल का यह यूपीएससी परीक्षा में तीसरा प्रयास था। इससे पहले दूसरे प्रयास में भी उन्होंने सफलता हासिल की थी और उस समय उनकी ऑल इंडिया रैंक 512 आई थी।

हालांकि, उन्होंने उस रैंक पर सेवा स्वीकार नहीं की और बेहतर रैंक हासिल करने के लिए एक बार फिर परीक्षा देने का फैसला किया। लगातार मेहनत और धैर्य के साथ तैयारी करते हुए आखिरकार उन्होंने अपने लक्ष्य को हासिल कर लिया।

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दोबारा मेहनत की और बेहतर रैंक हासिल की

अपनी सफलता के बारे में बात करते हुए रूपल ने बताया कि इस उपलब्धि के लिए उन्होंने काफी मेहनत की थी। उन्होंने कहा कि पिछली बार जो रैंक आई थी, उससे वह पूरी तरह संतुष्ट नहीं थीं, इसलिए उन्होंने तैयारी में और सुधार किया और इस बार बेहतर रैंक हासिल की।

रोज 8 घंटे पढ़ाई करती थीं रूपल

रूपल के अनुसार, वह आम तौर पर रोज लगभग 8 घंटे पढ़ाई करती थीं। वहीं मुख्य परीक्षा से करीब दो महीने पहले उन्होंने अपनी पढ़ाई का समय बढ़ाकर लगभग 10 घंटे प्रतिदिन कर दिया था।

सफलता का मंत्र 'नियमितता और निरंतरता'

उनका मानना है कि इस परीक्षा को पास करने के लिए हमेशा 12-12 घंटे पढ़ाई करना जरूरी नहीं होता। अगर पढ़ाई में नियमितता और निरंतरता बनी रहे तो कम समय में भी अच्छी तैयारी की जा सकती है।

उन्होंने यह भी बताया कि उनकी सफलता में परिवार का बहुत बड़ा योगदान रहा है। परिवार के लगातार सहयोग और हौसला बढ़ाने की वजह से ही वह अपनी तैयारी जारी रख सकीं। उनका कहना है कि अगर परिवार का साथ नहीं मिलता, तो शायद वह बीच में ही हार मान लेतीं।

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