MBBS Admission 2026: पसंदीदा मेडिकल कॉलेज में दाखिला चाहिए? काउंसलिंग के दौरान इन पांच बातों का रखें खास ध्यान
NEET UG Counseling: एमबीबीएस काउंसलिंग में छात्र अक्सर कुछ आम गलतियां कर बैठते हैं। इअच्छे स्कोर के बाद भी काउंसलिंग की छोटी सी चूक से एमबीबीएस की सीट हाथ से निकल सकती है। यहां बताई गईं बुनियादी बातों का ध्यान रखकर आप अपनी वर्षों की मेहनत और मनपसंद मेडिकल सीट सुरक्षित कर सकते हैं।
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NEET UG Counseling 2026: नीट यूजी का रिजल्ट जारी होने के बाद अब सभी सफल छात्रों और उनके माता-पिता की नजरें मेडिकल कॉलेजों में दाखिले पर टिकी हैं। एमबीबीएस (MBBS) और बीडीएस (BDS) सीटों के लिए जल्द ही काउंसलिंग का दौर शुरू हो जाएगा। अक्सर देखा गया है कि नीट परीक्षा में बहुत अच्छे नंबर लाने के बाद भी कई छात्र सिर्फ इसलिए अपनी मनपसंद सीट खो देते हैं, क्योंकि वे काउंसलिंग के दौरान कुछ छोटी-छोटी गलतियां कर बैठते हैं।
काउंसलिंग की प्रक्रिया जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी ही संवेदनशील भी। आइए जानते हैं उन आम गलतियों के बारे में जिनसे आपको इस दौरान हर हाल में बचना चाहिए, ताकि एडमिशन में कोई परेशानी न हो।
1. आखिरी तारीख या समय का इंतजार करना
काउंसलिंग में रजिस्ट्रेशन करने, फीस जमा करने और कॉलेजों की पसंद (Choice Filling) भरने के लिए एक तय समय सीमा दी जाती है। कई छात्र सोचते हैं कि अभी तो तीन दिन बचे हैं, आराम से फॉर्म भरेंगे। आपका यही रवैया आप पर भारी पड़ सकता है।
- क्या परेशानी होती है?: आखिरी घंटों में वेबसाइट पर अचानक लाखों छात्रों के आने से सर्वर धीमा या डाउन हो जाता है। ऐसे में पेमेंट फंसने या फॉर्म सबमिट न होने का खतरा रहता है।
- परेशानी से बचने के लिए क्या करें?: शेड्यूल आते ही डायरी में तारीखें नोट कर लें और अंतिम तिथि से कम से कम 24 घंटे पहले अपना काम पूरा कर लें।
2. जरूरी दस्तावेजों को पहले से तैयार न रखना
रिजल्ट आने के बाद से लेकर काउंसलिंग शुरू होने के बीच का समय डॉक्यूमेंट्स को व्यवस्थित करने के लिए होता है। इसलिए अपने सभी जरूरी दस्तावेज जल्द से जल्द तैयार कर लें।
- क्या परेशानी होती है?: अक्सर ऐसा होता है कि अभ्यर्थियों को अंत समय पर पता चलता है कि जाति प्रमाण पत्र (Caste Certificate) रिन्यू नहीं है, या 10वीं-12वीं की मार्कशीट में नाम की स्पेलिंग में कोई गड़बड़ी है। इसके कारण वेरिफिकेशन के समय सीट रद्द हो सकती है।
- परेशानी से बचने के लिए क्या करें?: नीट का एडमिट कार्ड, स्कोरकार्ड, पहचान पत्र, निवास और श्रेणी प्रमाण पत्र (यदि लागू हो) की 4-5 फोटोकॉपी और ओरिजिनल पेपर्स की एक अलग फाइल बना लें।
3. चॉइस फिलिंग में लापरवाही और अंधाधुंध कॉलेज चुनना
काउंसलिंग का सबसे जरूरी हिस्सा होता है कॉलेजों की प्राथमिकता तय करना। कई बार छात्र बिना सोचे-समझे या सिर्फ नाम सुनकर किसी भी कॉलेज को ऊपर रख देते हैं। इससे उन्हें उनकी पसंद का कॉलेज नहीं मिलता है।
- क्या परेशानी होती है?: अगर आपको अपनी कम पसंद वाला कॉलेज अलॉट हो गया, तो आगे के राउंड्स में अच्छी सीट मिलने की संभावना कम हो जाती है। वहीं अगर आपने बहुत कम कॉलेज चुने, तो हो सकता है आपको कोई सीट ही न मिले।
- परेशानी से बचने के लिए क्या करें?: अपने स्कोर के हिसाब से पिछले वर्षों के कट-ऑफ को देखें। जो कॉलेज आपको सच में चाहिए और जहां आप जा सकते हैं, उन्हें ही सही क्रम में भरें।
4. नियमों और नोटिफिकेशन को ध्यान से न पढ़ना
ऑल इंडिया कोटा (AIQ) और स्टेट कोटा (State Quota) काउंसलिंग के नियम अलग-अलग होते हैं। हर राउंड के बाद सीट छोड़ने या अपग्रेड करने के नियम भी बदलते रहते हैं।
- क्या परेशानी होती है?: नियमों की सही जानकारी न होने के कारण कई बार छात्र अनजाने में काउंसलिंग प्रक्रिया से बाहर हो जाते हैं या उनकी सिक्योरिटी फीस जब्त हो जाती है।
- परेशानी से बचने के लिए क्या करें?: किसी की कही-सुनी बातों पर भरोसा करने के बजाय मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) और अपने राज्य की काउंसलिंग वेबसाइट पर जारी होने वाले 'Information Bulletin' को एक बार खुद शांति से जरूर पढ़ें।
5. पुराना या बंद ईमेल आईडी और फोन नंबर देना
काउंसलिंग के दौरान रजिस्ट्रेशन करते समय जो मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी दी जाती है, वह बेहद महत्वपूर्ण होती है। सभी जरूरी कम्युनिकेशन इन्ही के जरिए किए जाते हैं।
- क्या परेशानी होती है?: ओटीपी, सीट अलॉटमेंट के मैसेज और जरूरी अपडेट्स इसी नंबर पर आते हैं। अगर यह नंबर बंद हो गया या ईमेल का पासवर्ड भूल गए, तो बड़ी मुसीबत खड़ी हो सकती है।
- परेशानी से बचने के लिए क्या करें?: केवल वही फोन नंबर और ईमेल दें जो चालू हो और पूरी काउंसलिंग प्रक्रिया (अगले 2-3 महीने) के दौरान आपके पास ही रहे।
क्या नीट यूजी काउंसलिंग शुरू हो गई है?
नहीं, फिलहाल नीट यूजी काउंसलिंग शुरू नहीं हुई है। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी जल्द ही काउंसलिंग का शेड्यूल जारी कर सकती है। काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) की ऑफिशियल वेबसाइट को नियमित रूप से चेक करने की आदत डाल लें। इंटरनेट पर मौजूद किसी भी अनवेरिफाइड सोर्स या सोशल मीडिया के दावों पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय हमेशा आधिकारिक ब्रोशर पर ही भरोसा करें।